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किसान वैज्ञानिक ढंग से करें खेती: डीएम
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:30 PM IST
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गोष्ठी में मौजूद अतिथि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। जब से हमारे देश के किसानों ने वैज्ञानिक ढंग से खेती करना प्रारंभ की तभी से हम खाद्यान्न में आत्मनिर्भर हुए और अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। किसान वैज्ञानिक ढंग से खेती करें। जैविक खाद का अधिक प्रयोग कर कम लागत में अच्छी उत्पादकता लें। आमदनी बढ़ाकर आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। तभी किसान का विकास होगा और देश उन्नति करेगा। यह बातें डीएम यशवंत राव ने जिला स्तरीय खरीफ गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कहीं।
उन्होंने किसानों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि किसान आंधी, बरसात, पानी सब का मुकाबला करने के बाद भी आम आदमी का पेट भरने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं। बावजूद इसके किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दें। बागवानी की ओर बढ़ें, उपज किए सामान से कोई न कोई सामान बनाकर बेचें, कच्चा माल न बेचें तभी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
उन्होंने कहा कि खेतों में लगातार एक ही फसल करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। किसान फसल चक्र अपनाकर ख्ेातों में अदल-बदल कर फसलेें करने से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसान मेला प्रदर्शनी में पशुपालन, उद्यान, कृषि, मत्स्य, भूमि सुधार एवं टाटा केमिकल के स्टालों का जिलाधिकारी ने अवलोकन कर जानकारी प्राप्त की। डा. शंकर सिंह, डा. विकास रंजन चौधरी ने खेती को वैज्ञानिक विधि से करने, जैविक खाद का प्रयोग करने, प्रमाणित बीजों के प्रयोग करने, रसायनिक दवाओं को उचित समय पर संतुलित मात्रा में प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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खरीफ गोष्ठी के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार गुप्ता, उप निदेशक कृषि यूवी सिंह गौतम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी योगेश कुमार सारस्वत, जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा, जिला उद्यान अधिकारी, किसान यूनियन के अध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत सहित अन्य संबंधित अधिकारी, कृषक बंधु आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने किसानों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि किसान आंधी, बरसात, पानी सब का मुकाबला करने के बाद भी आम आदमी का पेट भरने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं। बावजूद इसके किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दें। बागवानी की ओर बढ़ें, उपज किए सामान से कोई न कोई सामान बनाकर बेचें, कच्चा माल न बेचें तभी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि खेतों में लगातार एक ही फसल करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। किसान फसल चक्र अपनाकर ख्ेातों में अदल-बदल कर फसलेें करने से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसान मेला प्रदर्शनी में पशुपालन, उद्यान, कृषि, मत्स्य, भूमि सुधार एवं टाटा केमिकल के स्टालों का जिलाधिकारी ने अवलोकन कर जानकारी प्राप्त की। डा. शंकर सिंह, डा. विकास रंजन चौधरी ने खेती को वैज्ञानिक विधि से करने, जैविक खाद का प्रयोग करने, प्रमाणित बीजों के प्रयोग करने, रसायनिक दवाओं को उचित समय पर संतुलित मात्रा में प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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खरीफ गोष्ठी के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार गुप्ता, उप निदेशक कृषि यूवी सिंह गौतम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी योगेश कुमार सारस्वत, जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा, जिला उद्यान अधिकारी, किसान यूनियन के अध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत सहित अन्य संबंधित अधिकारी, कृषक बंधु आदि उपस्थित रहे।