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संसाधन के अभाव में पिछड़ी खेल प्रतिभाएं
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:52 PM IST
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जिले के खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा मुकाम
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। जिले में संसाधन के अभाव में ओलंपिक खेल हॉकी, जिम्नास्टिक, जूडो तलवारबाजी आदि काफी पिछड़ रहे हैं। यहां जो संसाधन उपलब्ध हैं वह भी दम तोड़ रहे हैं। शासन स्तर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। प्रतिभा निखारने के लिए शासन और जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। गर्मियों की आधी छुट्टी बीतने के बाद खेल निदेशालय ने कोच तैनात किए हैं।
जिला स्टेडियम में कोच की तैनाती के लिए हर साल लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस बार भी गर्मियों की आधी छुट्टियां बीतने के बाद खेल निदेशालय ने कोच तैनात किए हैं। वर्तमान में जूडो, तलवारबाजी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, हाकी के कोच तैनात हैं। हर साल कोच भेजे जाते हैं।
एक साल हाकी, जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण पाने वाले खिलाड़ी को दूसरे साल अन्य खेलों में जाना पड़ता है। बार बार खेल कोच बदलने से खिलाड़ियों को परेशानी होती है। इस बार भी दाऊदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में देरी से कोच तैनात किए गए। अब खिलाड़ियों को खेल उपकरणों जैसे वाल्टिंग टेबल, रोमनरिंग, बैलेंसिंग बीम का इंतजार करना पड़ रहा है।
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इसके बाद भी जिम्नास्टिक खेल में बेटियां जिले का नाम रोशन कर रही हैं। सुहागनगरी की बेटी मधु बघेल, रूबी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। दोनों सन् 2015 में रूस और तजाकिस्तान में खेल का प्रदर्शन कर चुकी हैं। रुबी और मधु अपने-अपने ग्रुपों में यूपी चैंपियन रहीं हैं। इसके बाद यूपी की टीम से राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला। इन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर यूपी के लिए नेशनल चैंपियनशिप भी हासिल की है। कई पदक भी जीते। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला।
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जिला स्टेडियम में कोच की तैनाती के लिए हर साल लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस बार भी गर्मियों की आधी छुट्टियां बीतने के बाद खेल निदेशालय ने कोच तैनात किए हैं। वर्तमान में जूडो, तलवारबाजी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, हाकी के कोच तैनात हैं। हर साल कोच भेजे जाते हैं।
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एक साल हाकी, जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण पाने वाले खिलाड़ी को दूसरे साल अन्य खेलों में जाना पड़ता है। बार बार खेल कोच बदलने से खिलाड़ियों को परेशानी होती है। इस बार भी दाऊदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में देरी से कोच तैनात किए गए। अब खिलाड़ियों को खेल उपकरणों जैसे वाल्टिंग टेबल, रोमनरिंग, बैलेंसिंग बीम का इंतजार करना पड़ रहा है।
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इसके बाद भी जिम्नास्टिक खेल में बेटियां जिले का नाम रोशन कर रही हैं। सुहागनगरी की बेटी मधु बघेल, रूबी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। दोनों सन् 2015 में रूस और तजाकिस्तान में खेल का प्रदर्शन कर चुकी हैं। रुबी और मधु अपने-अपने ग्रुपों में यूपी चैंपियन रहीं हैं। इसके बाद यूपी की टीम से राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला। इन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर यूपी के लिए नेशनल चैंपियनशिप भी हासिल की है। कई पदक भी जीते। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला।