{"_id":"5936e7ed4f1c1b01758b4575","slug":"14967705571-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेबस मरीज, बेदर्द डॉक्टर और बदइंतजामी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेबस मरीज, बेदर्द डॉक्टर और बदइंतजामी
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। आईएमए की स्थानीय इकाई के चिकित्सक मंगलवार को भी हड़ताल पर रहे। इसके चलते निजी अस्पताल, क्लीनिक बंद रहे। उपचार कराने आए मरीज भटकते रहे। इसके चलते जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ रोज की अपेक्षा और बढ़ गई थी। इस दौरा जिला अस्पताल में 1200 मरीज पहुंचे।
मरीज इलाज को तरसते रहे। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही, लेकिन डाक्टर नदारद रहे। सीएमएस डाक्टर बी सागर बाल रोग विशेषज्ञ हैं, उनके कक्ष में ताला पड़ा रहा।
वह ऊपर बैठे रहे, लेकिन बच्चों को देखने नहीं आए। नाक,कान, गला रोग विशेषज्ञ डा. आरसी शर्मा के कक्ष में भी ताला पड़ा रहा। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में पिछले दो सप्ताह से एसी खराब पड़ा है। वहीं जनरल वार्ड में कूलर में पानी नहीं है। इस
विज्ञापन
केस नंबर-एक
बागवाला थाना क्षेत्र के गांव जैतपुरा से गुड्डू अपने दुधमुंहे बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बच्चे की सांस फूलने से हालत बिगड़ रही थी। इमरजेंसी में प्रवेश किया, लेकिन यहां कोई नहीं मिला। वह डाक्टर खोजने लगा। कर्मचारी ने बच्चों का डाक्टर नहीं होने की बात कही। स्टाफ थोड़ा पसीजा और हालत देख ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाया, लेकिन गैस ही नहीं थी। कक्ष में खड़े लोगों ने गुस्सा जताया, तो डाक्टर साहब आए, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने की बात कह कर टरका दिया।
केस नंबर-दो
गांव धिरामई निवासी अमर सिंह सुबह सांस की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल पहुंचे। पहले तो डाक्टर ने भर्ती करने में आनाकानी की, परिवारीजनों के गुहार लगाने पर बोतल चढ़ाने की बात कह दी। करीब एक घंटे दर्द से तड़पने के बाद बोतल लगी। जब दोपहर में हालत बिगड़ी, तो कोई डाक्टर देखने नहीं आए। इस पर परिवारीजन मजबूरी में ले गए। स्ट्रेचर की व्यवस्था न होने पर परिवारीजन उनको गोद में उठाकर ले गए।
केस नंबर-तीन
गांव असरौली निवासी महिला अपने बच्चे को बुखार की हालत में लेकर इमरजेंसी पहुंची। काफी देर तक बच्चे को गोद में लिए बैठी रही। डाक्टर ड्यूटी रूम में एसी में बैठे डाक्टर के पास गई, तो उन्होंने कहा बाद में आना अभी व्यस्त हैं। काफी देर तक महिला इंतजार करती रही, लेकिन डाक्टर का ध्यान उसकी ओर नहीं गया और बाद में वह मायूस होकर चली गई।
जिला अस्पताल की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सीएमओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। मरीजों का उपचार नहीं करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ शासन को लिखा जाएगा और कार्रवाई भी होगी।
अमित किशोर, डीएम
विज्ञापन
मरीज इलाज को तरसते रहे। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही, लेकिन डाक्टर नदारद रहे। सीएमएस डाक्टर बी सागर बाल रोग विशेषज्ञ हैं, उनके कक्ष में ताला पड़ा रहा।
विज्ञापन
वह ऊपर बैठे रहे, लेकिन बच्चों को देखने नहीं आए। नाक,कान, गला रोग विशेषज्ञ डा. आरसी शर्मा के कक्ष में भी ताला पड़ा रहा। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में पिछले दो सप्ताह से एसी खराब पड़ा है। वहीं जनरल वार्ड में कूलर में पानी नहीं है। इस
विज्ञापन
केस नंबर-एक
बागवाला थाना क्षेत्र के गांव जैतपुरा से गुड्डू अपने दुधमुंहे बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बच्चे की सांस फूलने से हालत बिगड़ रही थी। इमरजेंसी में प्रवेश किया, लेकिन यहां कोई नहीं मिला। वह डाक्टर खोजने लगा। कर्मचारी ने बच्चों का डाक्टर नहीं होने की बात कही। स्टाफ थोड़ा पसीजा और हालत देख ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाया, लेकिन गैस ही नहीं थी। कक्ष में खड़े लोगों ने गुस्सा जताया, तो डाक्टर साहब आए, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने की बात कह कर टरका दिया।
केस नंबर-दो
गांव धिरामई निवासी अमर सिंह सुबह सांस की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल पहुंचे। पहले तो डाक्टर ने भर्ती करने में आनाकानी की, परिवारीजनों के गुहार लगाने पर बोतल चढ़ाने की बात कह दी। करीब एक घंटे दर्द से तड़पने के बाद बोतल लगी। जब दोपहर में हालत बिगड़ी, तो कोई डाक्टर देखने नहीं आए। इस पर परिवारीजन मजबूरी में ले गए। स्ट्रेचर की व्यवस्था न होने पर परिवारीजन उनको गोद में उठाकर ले गए।
केस नंबर-तीन
गांव असरौली निवासी महिला अपने बच्चे को बुखार की हालत में लेकर इमरजेंसी पहुंची। काफी देर तक बच्चे को गोद में लिए बैठी रही। डाक्टर ड्यूटी रूम में एसी में बैठे डाक्टर के पास गई, तो उन्होंने कहा बाद में आना अभी व्यस्त हैं। काफी देर तक महिला इंतजार करती रही, लेकिन डाक्टर का ध्यान उसकी ओर नहीं गया और बाद में वह मायूस होकर चली गई।
जिला अस्पताल की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सीएमओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। मरीजों का उपचार नहीं करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ शासन को लिखा जाएगा और कार्रवाई भी होगी।
अमित किशोर, डीएम