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अवैध कब्जे के ध्वस्तीकरण को 36 साल से नहीं मिली पुलिस
Updated Mon, 05 Jun 2017 01:25 AM IST
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आगरा। अपनी कारगुजारी को छुपाने के लिए सरकारी विभाग क्या-क्या तर्क रखते हैं, इसका ताजा उदाहरण आवास विकास परिषद है। कमला नगर में बेशकीमती भूखंड को अवैध कब्जे से मुक्त कराने में हीलाहवाली करते रहे परिषद ने खुद की गर्दन फंसती देख पूरी जिम्मेदारी पुलिस के सिर मढ़ दी। इसका खुलासा पिछले दिनों जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई एंटी भू माफिया टास्क फोर्स की बैठक में हुआ।
बैठक में परिषद ने बताया कि कमला नगर डी-101/1 के निकट पोस्ट ऑफिस भूखंड परिषद की भूमि रकवा 98 वर्गमीटर पर तीन दशक से अधिक समय से कब्जा है। इस भूखंड पर अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश भी हो चुके हैं। मगर, अब तक इसे कब्जे से मुक्त न कराए जाने पर जब डीएम ने विभागीय अधिकारियों को घेरा तो उन्होंने तर्क दिया कि 36 साल से अवैध भूखंड पर अवैध कब्जा है। मगर, पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण अब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस पर डीएम ने विभागीय अधिकारियों की जमकर लताड़ लगाई। उन्हें पुलिस अधिकारियों से बात कर शीघ्र जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए निर्देशित किया गया।
इधर, राजकीय उद्यान विभाग की पालीवाल पार्क स्थित 650 वर्गमीटर जमीन पर 1977 से अवैध कब्जे को न हटाए जाने पर भी विभागीय अधिकारियों को आड़े हाथों लिया गया। इस जमीन की कीमत 325 लाख रुपये से अधिक है। इसमें भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई। आगरा विकास प्राधिकरण की भी रकवा 0.3807 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा हो चुका है। बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें तमाम विभागों की मिलीभगत उजागर हो रही है। सालों से भू माफियाओं के कब्जे से जमीनों को मुक्त कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। सिर्फ कागजी खानापूर्ति करते रहे।
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यहां भी हुए सरकारी जमीनों पर कब्जे
मऊ में गाटा संख्या 1032 पर वर्ष 1995 से कब्जा है। यह नगर निगम की जमीन है।
धांधुपुरा के गाटा संख्या 590, 667, 670 पर नगर निगम की जमीन पर 25 साल से कब्जा है।
बाह के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरैरा, झाड़े की गढ़ी, धोबई, मंगदपुर व डेरक गांव में विद्यालय के खेल के मैदान की जमीन पर कब्जा।
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बैठक में परिषद ने बताया कि कमला नगर डी-101/1 के निकट पोस्ट ऑफिस भूखंड परिषद की भूमि रकवा 98 वर्गमीटर पर तीन दशक से अधिक समय से कब्जा है। इस भूखंड पर अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश भी हो चुके हैं। मगर, अब तक इसे कब्जे से मुक्त न कराए जाने पर जब डीएम ने विभागीय अधिकारियों को घेरा तो उन्होंने तर्क दिया कि 36 साल से अवैध भूखंड पर अवैध कब्जा है। मगर, पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण अब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस पर डीएम ने विभागीय अधिकारियों की जमकर लताड़ लगाई। उन्हें पुलिस अधिकारियों से बात कर शीघ्र जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए निर्देशित किया गया।
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इधर, राजकीय उद्यान विभाग की पालीवाल पार्क स्थित 650 वर्गमीटर जमीन पर 1977 से अवैध कब्जे को न हटाए जाने पर भी विभागीय अधिकारियों को आड़े हाथों लिया गया। इस जमीन की कीमत 325 लाख रुपये से अधिक है। इसमें भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई। आगरा विकास प्राधिकरण की भी रकवा 0.3807 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा हो चुका है। बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत एंटी भू माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें तमाम विभागों की मिलीभगत उजागर हो रही है। सालों से भू माफियाओं के कब्जे से जमीनों को मुक्त कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। सिर्फ कागजी खानापूर्ति करते रहे।
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यहां भी हुए सरकारी जमीनों पर कब्जे
मऊ में गाटा संख्या 1032 पर वर्ष 1995 से कब्जा है। यह नगर निगम की जमीन है।
धांधुपुरा के गाटा संख्या 590, 667, 670 पर नगर निगम की जमीन पर 25 साल से कब्जा है।
बाह के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरैरा, झाड़े की गढ़ी, धोबई, मंगदपुर व डेरक गांव में विद्यालय के खेल के मैदान की जमीन पर कब्जा।