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प्रदूषण का बढ़ता ग्राफ, पर्यावरण पर लग रहा दाग
Updated Mon, 05 Jun 2017 12:03 AM IST
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एटा। हवा मेें जहर घुल गया, पानी काला हो गया और धरती बंजर हो गई। जिले में प्रदूषण साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ता प्रदूषण सेहत को तो नुकसान दे रहा है, साथ ही भविष्य के लिए भी अच्छा संकेत नहीं हैं। आलम यह है कि जिले में प्रदूषण का मानक बढ़ता जा रहा है।
आज विश्व पर्यावरण दिवस है। ऐसे में प्रदूषण को लेकर चर्चा करना लाजिमी है। जिले में प्रदूषण का असर मानकों को पार कर गया है। वाहनों का बढ़ता बोझ, धुआं उगलते वाहन, शहर के किनारे जलते कूड़े का धुआं, कटते पेड़ समेत तमाम कारण प्रदूषण में इजाफा कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो शहर की आवोहवा में सल्फर डाइ आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए, जो कि कई गुना बढ़ चुकी है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष वातावरण पीएम की मात्रा 93 थी, जो कि इन दिनों 135-140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच चुकी है। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह ने कहा कि मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण और इसके विपरीत असर को स्पष्ट करती है।
पौधरोपण खूब, रखरखाव भूले
जिले में पिछले वर्ष 352425 पौधों का रोपण किया गया। लेकिन वन विभाग पौधों का रखरखाव भूल गया। ऐसे में आधे से ज्यादा पौधे मृत हो गए।
यह कहते हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2013 75 से 80 डेसिबल
2014 80 से 92 डेसिबल
2015 85 से 95 डेसिबल
2016 87 से 96 डेसिबल
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2014 87 36 41
2014 93 38 44
2015 94 40 49
2016 130 46 55
इन बीमारियों के बढ़ रहे रोगी
जिले में प्रदूषण बढ़ने के बाद सांस, अस्थमा, हार्ट अटैक, दमा समेत तमाम बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं। फिजीशियन डा. एस चंद्रा बताते हैं कि लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि चेहरा ढका हो। प्रदूषण बढ़ने से बीमारियां बढ़ रही हैं।
इनका कहना है
जिले में प्रदूषण का बढ़ता कहर हानिकारक है। इसके दुष्प्रभाव भविष्य में घातक होंगे। अभी से प्रदूषण रोकने की पहल की जाए।
डा. ज्ञानेंद्र रावत, पर्यावरण विद्
बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक है। सांस लेने में तकलीफ होेने जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण रोकने के लिए हर व्यक्ति को खुद से पहल करनी होगी।
डा. निरुपमा वर्मा, समाजसेविका
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आज विश्व पर्यावरण दिवस है। ऐसे में प्रदूषण को लेकर चर्चा करना लाजिमी है। जिले में प्रदूषण का असर मानकों को पार कर गया है। वाहनों का बढ़ता बोझ, धुआं उगलते वाहन, शहर के किनारे जलते कूड़े का धुआं, कटते पेड़ समेत तमाम कारण प्रदूषण में इजाफा कर रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो शहर की आवोहवा में सल्फर डाइ आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए, जो कि कई गुना बढ़ चुकी है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष वातावरण पीएम की मात्रा 93 थी, जो कि इन दिनों 135-140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच चुकी है। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह ने कहा कि मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण और इसके विपरीत असर को स्पष्ट करती है।
पौधरोपण खूब, रखरखाव भूले
जिले में पिछले वर्ष 352425 पौधों का रोपण किया गया। लेकिन वन विभाग पौधों का रखरखाव भूल गया। ऐसे में आधे से ज्यादा पौधे मृत हो गए।
यह कहते हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2013 75 से 80 डेसिबल
2014 80 से 92 डेसिबल
2015 85 से 95 डेसिबल
2016 87 से 96 डेसिबल
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2014 87 36 41
2014 93 38 44
2015 94 40 49
2016 130 46 55
इन बीमारियों के बढ़ रहे रोगी
जिले में प्रदूषण बढ़ने के बाद सांस, अस्थमा, हार्ट अटैक, दमा समेत तमाम बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं। फिजीशियन डा. एस चंद्रा बताते हैं कि लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि चेहरा ढका हो। प्रदूषण बढ़ने से बीमारियां बढ़ रही हैं।
इनका कहना है
जिले में प्रदूषण का बढ़ता कहर हानिकारक है। इसके दुष्प्रभाव भविष्य में घातक होंगे। अभी से प्रदूषण रोकने की पहल की जाए।
डा. ज्ञानेंद्र रावत, पर्यावरण विद्
बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक है। सांस लेने में तकलीफ होेने जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण रोकने के लिए हर व्यक्ति को खुद से पहल करनी होगी।
डा. निरुपमा वर्मा, समाजसेविका