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बिटिया को शिशुग्रह भेजने पर आक्रोश

Fri, 15 Sep 2017 11:27 PM IST
Updated Fri, 15 Sep 2017 11:27 PM IST
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बिटिया को शिशुग्रह भेजने पर आक्रोश
फिरोजाबाद/नारखी। लावारिस नवजात कन्या को नई जिंदगी लेने वाले दंपति से अलग कर बाल कल्याण समिति ने राजकीय शिशु गृह आगरा भेज दिया। गुस्साए ग्रामीण शुक्रवार को सड़क पर उतर आए और फरिहा-कोटला जाम कर दिया। बेटी को वापस दिलाने की मांग करते रहे। बेटी छोड़ने के बाद दंपति भी बुरी तरह बिलखता रहा।
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नारखी के गांव बरतरा में नलकूप के पास आठ सितंबर को नवजात बालिका झाडियों में पड़ी मिली थी। उस नवजात को ग्रामीणों ने बरतरा निवासी गीता देवी पत्नी मुकेश को सौंप दिया था। बाल कल्याण समिति को इसकी जानकारी हुई तो पुलिस के माध्यम से दपंति को बुला लिया।
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शुक्रवार को समिति के सदस्य डा. जफर आलम, संगीता पांडेय, जगजीवन राम शर्मा, कुमुद शर्मा ने कागजी प्रक्रिया पूरी करके बालिका को राजकीय शिशु गृह आगरा में भेजा। दंपति से बालिका को वापस देने की बारी आई तो दंपति बिखलने लगा। शाम को जब ग्रामीणों को इस बात की जानकारी हुई तो पूरा गांव एकजुट हो गया और सड़क पर उतर आया।
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ग्रामीणों का कहना था कि जब समिति इतनी जागरुक है तो उसे आकर क्यों नहीं बचा लिया। पुलिस जबरदस्ती बालिका को ले गई है। नारखी के थाना प्रभारी मौके पर पहुंच गए और जाम खुलवाने का प्रयास किया। मगर आक्रोशित ग्रामीण बेटी को वापस दिलाने की मांग करते रहे।

फिरोजाबाद। एक मां वो थी, जिसने जन्म देने के बाद झाडियों में फेंक दिया। वहीं जिस मां ने उसे अपनाया तो कागजी दावपेंच दिखाकर उस बेटी को फिर से अनाथ कर दिया। अनाथ कन्या से इतना दंपति को मोह हो गया था, उसे बेटी अपनाकर पालनपोषण शुरु कर दिया था। क्योंकि दंपति की शादी को करीब 20 वर्ष हो चुके थे और उनके पास कोई बच्चा भी नहीं था। दंपति ने अनाथ नवजात को ‘दीपिका’ नाम भी दिया।


बालकल्याण समिति के सदस्य जफर आलम ने बताया कि किशोर न्याय बालकों की देखरेख संरक्षण अधिनियम 2015 के सेक्शन 31 के तहत अगर कोई बच्चा लावारिश हालत में मिलता है तो 24 घंटे अंदर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। अन्यथा सेक्शन 34 के तहत सजा का प्रावधान है। गोद लेने के लिए आनलाइन कानूनी प्रक्रिया करनी होगी। क्योंकि सरकार ने बच्चों का भविष्य देखते हुए कानून बनाए है। ताकि उनका गलत इस्तेमाल न हो।
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