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राधारानी के जन्मोत्सव पर लूटीं बधाइयां
Updated Wed, 30 Aug 2017 12:02 AM IST
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राधारानी के जन्म पर उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन (मथुरा)। श्रीधाम वृंदावन में राधारानी का जन्मोत्सव मंगलवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ गया। ब्रह्म मुहूर्त से ही धर्मनगरी वृंदावन में श्रद्घालुओं की चहल-पहल और राधाप्यारी ने जनम लियौ है, की गूंज सुनाई देने लगी। मंदिरों में भोर में ही पंचामृत अभिषेक का क्रम शाम काल तक चलता रहा।
राधावल्लभ मंदिर में राधाष्टमी की पूर्वसंध्या से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। शयन आरती के बाद 9:30 से 12 बजे तक राधावल्लभ लाल के दर्शन हुए। ढ़ाढ़ी-ढ़ाढिन नृत्य और बधाई गायन से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया। मंगलवार सुबह 5 बजे ठाकुरजी के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद समाज गायन हुआ। 10 बजे से ब्रजवासियों और दोपहर 1 बजे से गोस्वामियों के दधिकांधा और अभिषेक में कई मनों दूध और दही का प्रयोग हुआ। भक्ति रंग में रंगने की भक्तों में मानो होड़ सी लगी थी। गोस्वामियों समाज के लोग बीच-बीच में चलौ वृषभानु गोप के द्वार, राधा प्यारी ने जन्म लियौ है... बधाइयां गा रहे थे। प्रसाद ग्रहण करने में श्रद्धालुओं में मानो होड़ सी लगी थी और सराबोर हो भक्त अपने को धन्य मान रहे थे।
वहीं राधादामोदर मंदिर में प्रात: मंदिर सेवायत कनिका गोस्वामी, कृष्णा गोस्वामी ने ठाकुरजी के श्रीविग्रहों का पंचामृत अभिषेक किया। इसके बाद राजभोग आरती हुई। वहीं, टटिया स्थान में प्रात:काल से समाज बधाई गायन हुआ। यहां राधा जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में स्वामी हरिदास जी की गुदड़ी और करूए के विशेष दर्शन का भक्तों ने लाभ लिया। नगर के सेवाकुंज मंदिर, छोटे और बड़े रासमंडल में भी दधिकांधा हुआ। रासलीला के दौरान राधारानी ने भक्तों को कमल के फूल पर विराजमान होकर जन्म के दर्शन दिए।
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हरिदासजी के समाधिस्थल का हुआ अभिषेक
वृंदावन। स्वामी हरिदासजी के समाधिस्थल निधिवनराज में ब्रह्म मुहूर्त में सेवायत गोस्वामियों द्वारा राधा जन्म का पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर को रंग बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया।
परंपराओं के साथ हो रहा खिलवाड़
वृंदावन। स्वामी हरिदासजी की समाधि स्थल के अभिषेक का समय सेवायत के द्वारा 4:30 का दिया गया था जबकि 3:45 बजे ही सेवायतों ने समाधिस्थल का अभिषेक कर डाला। इसे लेकर भक्तों में नाराजगी रही।
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राधावल्लभ मंदिर में राधाष्टमी की पूर्वसंध्या से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। शयन आरती के बाद 9:30 से 12 बजे तक राधावल्लभ लाल के दर्शन हुए। ढ़ाढ़ी-ढ़ाढिन नृत्य और बधाई गायन से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया। मंगलवार सुबह 5 बजे ठाकुरजी के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद समाज गायन हुआ। 10 बजे से ब्रजवासियों और दोपहर 1 बजे से गोस्वामियों के दधिकांधा और अभिषेक में कई मनों दूध और दही का प्रयोग हुआ। भक्ति रंग में रंगने की भक्तों में मानो होड़ सी लगी थी। गोस्वामियों समाज के लोग बीच-बीच में चलौ वृषभानु गोप के द्वार, राधा प्यारी ने जन्म लियौ है... बधाइयां गा रहे थे। प्रसाद ग्रहण करने में श्रद्धालुओं में मानो होड़ सी लगी थी और सराबोर हो भक्त अपने को धन्य मान रहे थे।
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वहीं राधादामोदर मंदिर में प्रात: मंदिर सेवायत कनिका गोस्वामी, कृष्णा गोस्वामी ने ठाकुरजी के श्रीविग्रहों का पंचामृत अभिषेक किया। इसके बाद राजभोग आरती हुई। वहीं, टटिया स्थान में प्रात:काल से समाज बधाई गायन हुआ। यहां राधा जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में स्वामी हरिदास जी की गुदड़ी और करूए के विशेष दर्शन का भक्तों ने लाभ लिया। नगर के सेवाकुंज मंदिर, छोटे और बड़े रासमंडल में भी दधिकांधा हुआ। रासलीला के दौरान राधारानी ने भक्तों को कमल के फूल पर विराजमान होकर जन्म के दर्शन दिए।
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हरिदासजी के समाधिस्थल का हुआ अभिषेक
वृंदावन। स्वामी हरिदासजी के समाधिस्थल निधिवनराज में ब्रह्म मुहूर्त में सेवायत गोस्वामियों द्वारा राधा जन्म का पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर को रंग बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया।
परंपराओं के साथ हो रहा खिलवाड़
वृंदावन। स्वामी हरिदासजी की समाधि स्थल के अभिषेक का समय सेवायत के द्वारा 4:30 का दिया गया था जबकि 3:45 बजे ही सेवायतों ने समाधिस्थल का अभिषेक कर डाला। इसे लेकर भक्तों में नाराजगी रही।