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आलू के बाद अब लहसूल प्याज ने किसानों को रुलाया
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एटा। आलू के बाद किसानों को लहसुन और प्याज का भी भाव नहीं मिल रहा है। इससे किसान परेशान है। अच्छा भाव मिलने के उद्देश्य से किसानों ने लहसुन को एक साल तक रोके रखा है। लगातार गिर रहे लहसुन के भाव से किसान बैचेन है। ऐसे में आढ़तिया किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए 150 से 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से लहसुन खरीद रहे हैं।
प्रतिवर्ष किसानों को लहसुन का भाव 1500 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान लहसुन की खेती करने लगे। हालांकि इस वर्ष लहसुन का भाव काफी गिर गया। किसान इंतजार कर करके थक चुका है लेकिन भाव नहीं बढ़ रहा है। मजबूर होकर किसान सस्ते भाव में ही लहसुन को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस वर्ष उनका खर्च तक फसल में नहीं निकल पा रहा है। मालूम हो कि जिले की चार हजार हेक्टेयर भूमि पर साढ़े तीन हजार किसान लहसुन की खेती करते हैं।
150 से ज्यादा है मंडी में आढ़ती
नगर की मंडी में 150 से अधिक लहसुन के आढ़तियां है। इनके पास लहसुन भरा पड़ा है। आढ़तियों ने बताया कि उनका लहसुन बिहार, बंगाल, हैदराबाद, नागालैंड आदि प्रदेश तक जाता था, जहां भाव भी अच्छा मिलता था लेकिन अब बाहर की मंडियों में भी लहसुन का कोई खरीदार नहीं है।
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आढ़तियों और किसानों की बात
नगला जट्टा के किसान, नत्थूलाल ने बताया कि छह बीघा खेत में लहसुन किया था। पूरा लहसुन घर में रखा था। जरूरत पड़ने पर मंडी बेचने पहुंचे तो लहसुन का कोई अच्छा भाव देने को तैयार नहीं है। खेरियाकला के किसान ओमप्रकाश ने बताया कि प्रतिवर्ष लहसुन करते हैं लेकिन इस वर्ष के बराबर लहसुन की हालत कभी खराब नहीं हुई। इस वर्ष तो हम लोगों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। वहीं आढ़ती उमेश चंद्र ने बताया कि अभी तक हमारे यहां के लहसुन की मांग नागालैंड, आंध्र प्रदेश में होती थी लेकिन अब हर जगह लहसुन होना शुरू हो गया है। ऐसे में यहां के लहसुन की मांग भी कम होती जा रही है। आढ़ती अनिल गुप्ता ने बताया कि मंडी में 150 से ज्यादा पंजीकृत लहसुन के व्यापारी है। सभी के पास लहसुन भरा पड़ा है। सभी लोग अच्छा भाव आने का इंतजार कर रहे हैं। पूरे साल में भाव उठा तक नहीं है।
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प्रतिवर्ष किसानों को लहसुन का भाव 1500 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान लहसुन की खेती करने लगे। हालांकि इस वर्ष लहसुन का भाव काफी गिर गया। किसान इंतजार कर करके थक चुका है लेकिन भाव नहीं बढ़ रहा है। मजबूर होकर किसान सस्ते भाव में ही लहसुन को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस वर्ष उनका खर्च तक फसल में नहीं निकल पा रहा है। मालूम हो कि जिले की चार हजार हेक्टेयर भूमि पर साढ़े तीन हजार किसान लहसुन की खेती करते हैं।
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150 से ज्यादा है मंडी में आढ़ती
नगर की मंडी में 150 से अधिक लहसुन के आढ़तियां है। इनके पास लहसुन भरा पड़ा है। आढ़तियों ने बताया कि उनका लहसुन बिहार, बंगाल, हैदराबाद, नागालैंड आदि प्रदेश तक जाता था, जहां भाव भी अच्छा मिलता था लेकिन अब बाहर की मंडियों में भी लहसुन का कोई खरीदार नहीं है।
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आढ़तियों और किसानों की बात
नगला जट्टा के किसान, नत्थूलाल ने बताया कि छह बीघा खेत में लहसुन किया था। पूरा लहसुन घर में रखा था। जरूरत पड़ने पर मंडी बेचने पहुंचे तो लहसुन का कोई अच्छा भाव देने को तैयार नहीं है। खेरियाकला के किसान ओमप्रकाश ने बताया कि प्रतिवर्ष लहसुन करते हैं लेकिन इस वर्ष के बराबर लहसुन की हालत कभी खराब नहीं हुई। इस वर्ष तो हम लोगों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। वहीं आढ़ती उमेश चंद्र ने बताया कि अभी तक हमारे यहां के लहसुन की मांग नागालैंड, आंध्र प्रदेश में होती थी लेकिन अब हर जगह लहसुन होना शुरू हो गया है। ऐसे में यहां के लहसुन की मांग भी कम होती जा रही है। आढ़ती अनिल गुप्ता ने बताया कि मंडी में 150 से ज्यादा पंजीकृत लहसुन के व्यापारी है। सभी के पास लहसुन भरा पड़ा है। सभी लोग अच्छा भाव आने का इंतजार कर रहे हैं। पूरे साल में भाव उठा तक नहीं है।