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पांच टीमों ने 36 गांवों में देखा कीटों का प्रभाव
Updated Thu, 27 Sep 2018 08:49 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। धान व कपास की फसल मेें आए रोग को लेकर कृषि निदेशालय से आई टीम के लोगों ने छाता तहसील के 36 गांवों में सर्वे किया। निदेशालय व आगरा से आए कृषि वैज्ञानिकों ने पांच टीम बनाकर कीटों से प्रभावित धान व कपास की फसल को देखा।
छाता तहसील के 200 गांवों में धान और कपास की फसल मेें कीटों के हमले से फसल खराब हो रही है। इसे लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी कृषि विश्वविद्यालय कानपुर व कृषि निदेशालय लखनऊ तथा क्षेत्रीय कार्यालय आगरा से आई कृषि वैज्ञानिकों की टीम मथुरा में डेरा डाले हुए है।
गुरुवार को कृषि वैज्ञानिकों की पांच टीमों ने गांव दलौता, सियाहा, विसंभरा, नगलाभीमा, शेरगढ़, पैगांव, भदावल, खायरा सहित 36 गावों में खराब हुई फसल का सर्वे किया। उप कृषि निदेशक डॉ. धुरेंद्र कुमार ने बताया कि सर्वाधिक नुकसान धान की बासमती प्रजाति में देखने को मिल रहा है। कपास में भी आंशिक नुकसान है। इसमें अधिक जलभराव वाले इलाकों में रोपी गई धान की फसल में 60 से 80 प्रतिशत तक नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई है। सर्वे के दौरान फसल बीमा कंपनी व राजस्व विभाग के कर्मचारी साथ रहे।
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छाता तहसील के 200 गांवों में धान और कपास की फसल मेें कीटों के हमले से फसल खराब हो रही है। इसे लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी कृषि विश्वविद्यालय कानपुर व कृषि निदेशालय लखनऊ तथा क्षेत्रीय कार्यालय आगरा से आई कृषि वैज्ञानिकों की टीम मथुरा में डेरा डाले हुए है।
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गुरुवार को कृषि वैज्ञानिकों की पांच टीमों ने गांव दलौता, सियाहा, विसंभरा, नगलाभीमा, शेरगढ़, पैगांव, भदावल, खायरा सहित 36 गावों में खराब हुई फसल का सर्वे किया। उप कृषि निदेशक डॉ. धुरेंद्र कुमार ने बताया कि सर्वाधिक नुकसान धान की बासमती प्रजाति में देखने को मिल रहा है। कपास में भी आंशिक नुकसान है। इसमें अधिक जलभराव वाले इलाकों में रोपी गई धान की फसल में 60 से 80 प्रतिशत तक नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई है। सर्वे के दौरान फसल बीमा कंपनी व राजस्व विभाग के कर्मचारी साथ रहे।
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