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गैर प्रांतों के युवा फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा बन गए शिक्षक
Updated Sun, 01 Jul 2018 10:36 PM IST
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गोवर्धन (मथुरा)। मथुरा में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले की गूंज उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य प्रदेशों में भी सुनाई दे रही है। शिक्षकों की भर्ती में एक और बड़ा घोटाला है। गैर प्रांतों के हजारों युवा मथुरा व अन्य
जनपदों के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा कर शिक्षक बन गए हैं। वे यहां के बेरोजगारों का हक छीन रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अलग-अलग स्तर से कई बार शिक्षकों की भर्ती की गई है। इसमें उत्तर प्रदेश में स्थायी निवास करने वाले पात्र अभ्यर्थी शिक्षक बनने के लिए पात्र थे।
उत्तर प्रदेश की सीमा राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश व बिहार की सीमा जुड़ी है। इसमें मथुरा जनपद से हरियाणा व राजस्थान की सीमा जुड़ी है। इन प्रांतों से आए अभ्यर्थियों ने साठगांठ कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं, जो उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती नियमावली के विपरीत है।
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इन शिक्षकों के अपने प्रांत में भी निवास प्रमाण पत्र बने हैं। अगर इन शिक्षकों के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी। गोवर्धन के आसपास के गांवों के विद्यालयों में ऐसे सैकड़ों शिक्षक कार्यरत हैं, जिनका स्थायी निवास अन्य प्रांतों का है।
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जनपदों के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा कर शिक्षक बन गए हैं। वे यहां के बेरोजगारों का हक छीन रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अलग-अलग स्तर से कई बार शिक्षकों की भर्ती की गई है। इसमें उत्तर प्रदेश में स्थायी निवास करने वाले पात्र अभ्यर्थी शिक्षक बनने के लिए पात्र थे।
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उत्तर प्रदेश की सीमा राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश व बिहार की सीमा जुड़ी है। इसमें मथुरा जनपद से हरियाणा व राजस्थान की सीमा जुड़ी है। इन प्रांतों से आए अभ्यर्थियों ने साठगांठ कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं, जो उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती नियमावली के विपरीत है।
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इन शिक्षकों के अपने प्रांत में भी निवास प्रमाण पत्र बने हैं। अगर इन शिक्षकों के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी। गोवर्धन के आसपास के गांवों के विद्यालयों में ऐसे सैकड़ों शिक्षक कार्यरत हैं, जिनका स्थायी निवास अन्य प्रांतों का है।