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संपदा की कीमत समझेंगे तो सुरक्षा करेंगे
Updated Sat, 23 Sep 2017 10:08 PM IST
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आगरा। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने जेपी सभागार में शनिवार को काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसटी), लखनऊ के सहयोग से विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एंड इट्स प्रोटेक्शन’ पर आधारित था। तमाम विद्वानाें ने विषय पर विचार रखे।
मुख्य अतिथि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीएमएसआरडीई) कानपुर के पूर्व निदेशक डा. अरविंद कुमार सक्सेना ने कहा कि लोगाें को पहले संपदा की कीमत समझनी होगी। कीमत समझ में आ जाएगी तो उसकी रक्षा के लिए खुद प्रेरित होंगे। उन्होंने शोधार्थियों के लिए सुझाव दिया कि बेसिक रिसर्च जरूरी है, इसको थोड़ा ट्विस्ट कर दिया जाए तो अप्लाइड हो जाएगा।
लैब में काम करते समय उसे नोट करते रहें, यह बाद में मददगार साबित होता है। उन्हाेंने कहा कि जरूरी नहीं है कि शोध के लिए सारे संसाधन विश्वविद्यालय में मिल जाएं, जहां भी सुविधा मिले, उसका उपयोग करना चाहिए।
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कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध की दिशा में आगे बढ़ेगा। यहां के शिक्षक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तर भारत में अपना परचम लहराएंगे। विशिष्ट अतिथि सीनियर ज्वाइंट कंट्रोलर ऑफ पेटेंट एंड डिजाइंस, दिल्ली के सीनियर ज्वाइंट कंट्रोलर डा. आर. दीक्षित ने कहा कि बौद्धिक संपदा को आगे बढ़ाना है तो बेसिक रिसर्च को अप्लाइड रिसर्च में परिवर्तित करना होगा। सीएसटी की संयुक्त निदेशक डा. शशि राना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के यशवंत देव पंवार ने भी विचार व्यक्त किया। तकनीकी सत्र में डीएमएसआरडीई के डा. एमके पांडेय, सीएसटी के वैज्ञानिक बलराम सिंह और प्रतीक सेंगर ने परिचर्चा की। विचार गोष्ठी के संयोजक प्रो. पीएन सक्सेना ने स्वागत भाषण दिया। चेयरपर्सन प्रो. आशा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डा. संजीव कुमार शर्मा ने किया।
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मुख्य अतिथि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीएमएसआरडीई) कानपुर के पूर्व निदेशक डा. अरविंद कुमार सक्सेना ने कहा कि लोगाें को पहले संपदा की कीमत समझनी होगी। कीमत समझ में आ जाएगी तो उसकी रक्षा के लिए खुद प्रेरित होंगे। उन्होंने शोधार्थियों के लिए सुझाव दिया कि बेसिक रिसर्च जरूरी है, इसको थोड़ा ट्विस्ट कर दिया जाए तो अप्लाइड हो जाएगा।
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लैब में काम करते समय उसे नोट करते रहें, यह बाद में मददगार साबित होता है। उन्हाेंने कहा कि जरूरी नहीं है कि शोध के लिए सारे संसाधन विश्वविद्यालय में मिल जाएं, जहां भी सुविधा मिले, उसका उपयोग करना चाहिए।
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कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध की दिशा में आगे बढ़ेगा। यहां के शिक्षक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तर भारत में अपना परचम लहराएंगे। विशिष्ट अतिथि सीनियर ज्वाइंट कंट्रोलर ऑफ पेटेंट एंड डिजाइंस, दिल्ली के सीनियर ज्वाइंट कंट्रोलर डा. आर. दीक्षित ने कहा कि बौद्धिक संपदा को आगे बढ़ाना है तो बेसिक रिसर्च को अप्लाइड रिसर्च में परिवर्तित करना होगा। सीएसटी की संयुक्त निदेशक डा. शशि राना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के यशवंत देव पंवार ने भी विचार व्यक्त किया। तकनीकी सत्र में डीएमएसआरडीई के डा. एमके पांडेय, सीएसटी के वैज्ञानिक बलराम सिंह और प्रतीक सेंगर ने परिचर्चा की। विचार गोष्ठी के संयोजक प्रो. पीएन सक्सेना ने स्वागत भाषण दिया। चेयरपर्सन प्रो. आशा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डा. संजीव कुमार शर्मा ने किया।