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Mathura: पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान व विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह
Fri, 03 Mar 2023 03:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 03 Mar 2023 03:04 PM IST
सार
राज्यपाल ने कहा कि पशुपालन पर चर्चा करते हुए कहा कि पशुपालन राष्ट्र की संपति है। एक जमाना था, जब पशुओं की अधिकता परिवार की संपन्नता मानी जाती थी।
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान व विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह हुआ। समरोह की अध्यक्षता प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। वहीं मुख्य अतिथि केंद्रीय आयुक्त पशुपालन अभिजीत मित्रा रहे। कुलपति प्रो. एके श्रीवास्तव ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उन्होंने बताया की विवि ने नई शिक्षा नीति प्रभावी की है। इस बार कॉलेज ऑफ वेटरनेरी साइंस के 101 और कॉलेज ऑफ बायोटेक के 30 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 19 मेडल प्रदान किए गए हैं।
इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि पशुपालन पर चर्चा करते हुए कहा कि पशुपालन राष्ट्र की संपति है। एक जमाना था , जब पशुओं की अधिकता परिवार की संपन्नता मानी जाती थी। इसमे गाय हमारी संस्कृति का हिस्सा है। दुनिया मे हम 22 प्रतिशत दूध का उत्पादन कर रहे हैं। यह क्षेत्र हमको आत्म निर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से पांच-पांच गांव गोद लेकर विभिन्न गतिविधियों के संचालन करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था टुकड़ो में बटी है। इसे एक दूसरे से जोड़ने की जरूरत है। प्राथमिक के छात्रों को माध्यमिक और विश्वविद्यालयों की गतिविधियों से परिचित कराने की जरूरत है। जिससे वह अपनी रुचि के अनुसार अपना भविष्य का लक्ष्य तय कर सके।
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इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि पशुपालन पर चर्चा करते हुए कहा कि पशुपालन राष्ट्र की संपति है। एक जमाना था , जब पशुओं की अधिकता परिवार की संपन्नता मानी जाती थी। इसमे गाय हमारी संस्कृति का हिस्सा है। दुनिया मे हम 22 प्रतिशत दूध का उत्पादन कर रहे हैं। यह क्षेत्र हमको आत्म निर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से पांच-पांच गांव गोद लेकर विभिन्न गतिविधियों के संचालन करने की बात कही।
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उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था टुकड़ो में बटी है। इसे एक दूसरे से जोड़ने की जरूरत है। प्राथमिक के छात्रों को माध्यमिक और विश्वविद्यालयों की गतिविधियों से परिचित कराने की जरूरत है। जिससे वह अपनी रुचि के अनुसार अपना भविष्य का लक्ष्य तय कर सके।
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