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महावीर की डगर पर बढ़े माटी के लाल

Tue, 16 Apr 2019 11:08 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2019 11:08 PM IST
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महावीर की डगर पर बढ़े माटी के लाल
एटा। जैन समाज में एटा का विशेष स्थान है। एटा की माटी ने कई दिगंबर संतों को जना है। महावीर के संदेश के प्रचार के लिए माटी के लालों ने अपनी सुख सुविधाओं का त्याग किया और तपस्या के बल पर पूरे विश्व में जैन धर्म और एटा का डंका बजाया। आज महावीर जयंती है। ऐसे में जिले के गौरव रहे महान संतों का याद करना लाजिमी है।
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आचार्य विमल सागर महाराज
जिले के जलेसर विकासखंड के गांव कोसमा में वर्ष 1915 में जन्मे आचार्य विमल सागर महाराज ने पूरे विश्व में जैन धर्म की पताका फहराई। बताया जाता है कि आचार्य विमल सागर महाराज ने दीक्षा से पूर्व हेडमास्टर की नौकरी भी की लेकिन उनका घर-गृहस्थी में मन नहीं लगा। दीक्षा लेने के बाद उन्होंने तपस्या के बल पर हजारों भक्तों को जीवन जीने की कला सिखाई। हालांकि आचार्य विमल सागर महराज की समाधि हो चुकी है, लेकिन आज भी जैन श्रावक गुरू उपकारों को समय-समय पर याद करते हैं। प्रसिद्ध गीतकार रवींद्र जैन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आचार्य विमल सागर के प्रमुख शिष्यों में से हैं।
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आचार्य सन्मति सागर महाराज
जिले के शिकोहाबाद रोड स्थित गांव फफोतू निवासी प्यारेलाल के पुत्र ओमप्रकाश ने भी स्वात्म कल्याण की लगन लगाकर जैन धर्म का नाम आगे बढ़ाया। जैनेश्वरी दीक्षा के बाद उन्हें आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज के नाम से पहचाना गया। उन्होंने आचार्य श्री महावीर कीर्ति महाराज से शास्त्रों का अध्ययन किया। आचार्य सन्मति सागर जी महाराज महीनों तक उपवास रखते थे और महीनों तक मौन रखकर साधना करते थे।
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उपाध्याय उर्जयत सागर
शहर के पुरानी बस्ती निवासी बर्तन व्यापारी लाला बंगालीदास जैन के घर में जन्मे राहुल जैन ने भी जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर उर्जयंत सागर नाम पाया। भगवान महावीर के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार और त्याग मार्ग को अंगीकार कर वे जिन धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।

इन संतों पर भी समाज को नाज
इन तीन संतों के अलावा एटा के कई श्रावकों ने त्याग मार्ग को अपनाया है। इनमें उपाध्याय तेजस्व सागर, मुनि विष्णु सागर, मुनि अनुकंपा सागर, मुनि सुपार्श्व सागर, मुनि सुमर सागर, मुनि पदम सागर, मुनि अनंत सागर, आर्यिका विनीतमती, आर्यिका विव्रांतश्री, आर्यिका मनोमती, आर्यिका नियममती, आर्यिका विज्ञमती, ऐलक विश्वयज्ञ सागर, क्षुल्लक विजय सागर, क्षुल्लिका विलक्षणमति, क्षुल्लक सुरेंद्र सागर, क्षुल्लिका विमोहमती, क्षुल्लिका विर्वधमती, आर्यिका मोक्षमती, आर्यिका श्रेष्ठमती प्रमुख हैं।

कठिन है जैन संतों की चर्या
वर्तमान समय में जैन संतों की चर्या बेहद कठिन है। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम में हर परिस्थति में संतों को दिगंबर मुद्रा में रहना होता है। दिन में खड़े होकर एक बार अन्न जल ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही भोजन में बाल अथवा अन्य जीव देख अतंराय कर्म से प्रायश्चित करते हैं। रात को मौन रहते हैं। धर्म और आत्म कल्याण को तत्पर रहते हैं।


वीर विमल क्षेत्र ने बढ़ाया गौरव
शहर के कासगंज रोड पर बने वीर विमल क्षेत्र ने भी जिले का गौरव बढ़ाया है। क्षेत्र पर बनी भगवान महावीर की 15 फुट ऊंची प्रतिमा को उत्तर भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा घोषित किया जा चुका है। कासगंज रोड से गुजरने वाले हर व्यक्ति को भगवान महावीर अहिंसा का संदेश देते नजर आते हैं।
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