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चिकन पॉक्स से मासूम की मौत
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:57 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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कासगंज।
गंजडुंडवारा क्षेत्र के ग्राम कुडरी में शनिवार को चिकन पॉक्स से एक मासूम की मौत हो गई। अब तक इस क्षेत्र में इस संक्रामक बीमारी के चलते दो मासूमों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी से निपटने में पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।
अर्शित (9 माह) पुत्र सतेंद्र निवासी कुडरी कई दिन से चिकन पॉक्स से पीड़ित था। इस गांव में कई लोगों में बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची थी। इसी गांव की पंचायत लभेड़ में भी पांच बच्चों में चिकन पॉक्स टीम को मिला। चिकित्सकों ने इन सभी को दवा भी दी। अर्शित की हालत में सुधार न होने पर फिर से टीम गांव में पहुंची। चिकित्सकों ने बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए उसे बाहर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवारीजन उसे मथुरा के लिए लेकर जा रहे थे। तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। समीपवर्ती गांव नगला पीतम में भी तीन दिन पहले हिमांशु (4) पुत्र वीरेंद्र की इसी संक्रामक बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत के बाद से ग्रामीणों में दहशत है। ग्राम प्रधान पति संजीव ने बताया कि इस क्षेत्र में चिकन पॉक्स का काफी प्रकोप है। उनकी ग्राम पंचायत लभेड़ के अंतर्गत कडरी, लभेड व नारमई में कई बच्चों में यह बीमारी फैली हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहुंच कर दवा भी दी, लेकिन इसके बाद भी राहत नहीं मिल पा रही।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रंगजी दुबे का कहना है कि चिकन पॉक्स से मौत नहीं होती। यदि चिकन पॉक्स की स्थिति में पोस्ट निमोनिया हो जाता है तो फेफड़े के संक्रमण से मौत हो जाती है। यह बच्चा भी इसी बीमारी का शिकार हो गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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गंजडुंडवारा क्षेत्र के ग्राम कुडरी में शनिवार को चिकन पॉक्स से एक मासूम की मौत हो गई। अब तक इस क्षेत्र में इस संक्रामक बीमारी के चलते दो मासूमों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी से निपटने में पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।
अर्शित (9 माह) पुत्र सतेंद्र निवासी कुडरी कई दिन से चिकन पॉक्स से पीड़ित था। इस गांव में कई लोगों में बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची थी। इसी गांव की पंचायत लभेड़ में भी पांच बच्चों में चिकन पॉक्स टीम को मिला। चिकित्सकों ने इन सभी को दवा भी दी। अर्शित की हालत में सुधार न होने पर फिर से टीम गांव में पहुंची। चिकित्सकों ने बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए उसे बाहर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवारीजन उसे मथुरा के लिए लेकर जा रहे थे। तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। समीपवर्ती गांव नगला पीतम में भी तीन दिन पहले हिमांशु (4) पुत्र वीरेंद्र की इसी संक्रामक बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत के बाद से ग्रामीणों में दहशत है। ग्राम प्रधान पति संजीव ने बताया कि इस क्षेत्र में चिकन पॉक्स का काफी प्रकोप है। उनकी ग्राम पंचायत लभेड़ के अंतर्गत कडरी, लभेड व नारमई में कई बच्चों में यह बीमारी फैली हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहुंच कर दवा भी दी, लेकिन इसके बाद भी राहत नहीं मिल पा रही।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रंगजी दुबे का कहना है कि चिकन पॉक्स से मौत नहीं होती। यदि चिकन पॉक्स की स्थिति में पोस्ट निमोनिया हो जाता है तो फेफड़े के संक्रमण से मौत हो जाती है। यह बच्चा भी इसी बीमारी का शिकार हो गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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