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अब किसानों को फसल की लागत न निकलने का डर
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:17 AM IST
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फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। जुलाई में 90 मिलीमीटर और अगस्त में बारिश ही नहीं हुई है। सामान्य से कम बारिश होने से जनपद में सूखे के आसार बन गए हैं। इससे किसानों के हलक अभी से सूखने लगे हैं। अच्छी बारिश की उम्मीद में धान की रोपाई भी कर दी थी लेकिन कम बारिश ने किसानों की लागत न निकलने की चिंता बढ़ा दी है। वहीं नहरें भी सूखी पड़ी हैं। किसानों ने प्रशासन से मथुरा को सूखा क्षेत्र घोषित करने की मांग भी कर चुके हैं।
रजबहा व माइनरों में पानी न आने से टैंटीगांव व आसपास के गांवों किसानों की खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। किसानों का कहना है कि इस बार जुलाई महीना सूखे में चला गया। अब अगस्त में भी 12 दिन बीत गए हैं, मगर बारिश नहीं हुई है। धान, अरहर, बाजरा, उड़द, मूंग, ज्वार, तिल की फसलें सूखने लगी हैं। किसान कन्हैया लाल, पूरन सिंह, रघुवीर और श्यामा का कहना है कि बारिश न होने तथा सिंचाई के लिए नहर, रजबहा में पानी न आने से बोई गई फसलें चौपट हो गई हैं। कई किसान फसलों को जुतवा चुके हैं। हरनौल, सरकोरिया, नगला हरिया, बैकुंठपुर, सामौली, नगला ओहावा, राजागढ़ी, तुलागढ़ी, सुदामागढ़ी, लोहई, भालई, महमूदगढ़ी, खायरा, जरारा, बेरा, भदनवारा गांवों के किसान परेशान हैं। चौ. सरनाम सिंह, इंदर सिंह, नारायन सिंह, चंदन सिंह, पूर्व चेयरमैन राजपाल सिंह, चंद्रप्रकाश उर्फ बॉबी भइया, सुरेंद्र सिंह , यूसुफ कुरैशी, छिद्दी सिंह, ठा. देशराज सिंह सिसौदिया, सुभाष द्विवेदी, महेश शर्मा आदि ने मथुरा को सूखा जिला घोषित करने की डीएम से मांग की है।
इस बार 480 एकड़ में हुई रोपाई
टैंटीगांव व आसपास के गांवों में 480 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। छाता तहसील के चौमुंहा, छाता नंदगांव ब्लाक में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। चौमुंहा में 10 प्रतिशत किसान धान की रोपाई कर पाए हैं। अन्य 90 प्रतिशत किसानों की नर्सरी में खड़ी धान सूख गई। अकबरपुर के सहदेव दरोगा ने 80 बीघा धान की फसल है। सहदेव ने कहा कि अच्छी बारिश और शेरगढ़ रजबहा और कोसी ड्रेन से सिंचाई कर लेंगे लेकि न बारिश हुई और न ही रजबहा और ड्रेन में पानी आया। अब उनकी फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है।
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रजबहा व माइनरों में पानी न आने से टैंटीगांव व आसपास के गांवों किसानों की खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। किसानों का कहना है कि इस बार जुलाई महीना सूखे में चला गया। अब अगस्त में भी 12 दिन बीत गए हैं, मगर बारिश नहीं हुई है। धान, अरहर, बाजरा, उड़द, मूंग, ज्वार, तिल की फसलें सूखने लगी हैं। किसान कन्हैया लाल, पूरन सिंह, रघुवीर और श्यामा का कहना है कि बारिश न होने तथा सिंचाई के लिए नहर, रजबहा में पानी न आने से बोई गई फसलें चौपट हो गई हैं। कई किसान फसलों को जुतवा चुके हैं। हरनौल, सरकोरिया, नगला हरिया, बैकुंठपुर, सामौली, नगला ओहावा, राजागढ़ी, तुलागढ़ी, सुदामागढ़ी, लोहई, भालई, महमूदगढ़ी, खायरा, जरारा, बेरा, भदनवारा गांवों के किसान परेशान हैं। चौ. सरनाम सिंह, इंदर सिंह, नारायन सिंह, चंदन सिंह, पूर्व चेयरमैन राजपाल सिंह, चंद्रप्रकाश उर्फ बॉबी भइया, सुरेंद्र सिंह , यूसुफ कुरैशी, छिद्दी सिंह, ठा. देशराज सिंह सिसौदिया, सुभाष द्विवेदी, महेश शर्मा आदि ने मथुरा को सूखा जिला घोषित करने की डीएम से मांग की है।
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इस बार 480 एकड़ में हुई रोपाई
टैंटीगांव व आसपास के गांवों में 480 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। छाता तहसील के चौमुंहा, छाता नंदगांव ब्लाक में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। चौमुंहा में 10 प्रतिशत किसान धान की रोपाई कर पाए हैं। अन्य 90 प्रतिशत किसानों की नर्सरी में खड़ी धान सूख गई। अकबरपुर के सहदेव दरोगा ने 80 बीघा धान की फसल है। सहदेव ने कहा कि अच्छी बारिश और शेरगढ़ रजबहा और कोसी ड्रेन से सिंचाई कर लेंगे लेकि न बारिश हुई और न ही रजबहा और ड्रेन में पानी आया। अब उनकी फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है।
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