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बदले मौसम ने किसानों को डराया, देर शाम बरसे बदरा

Mon, 21 Jan 2019 10:30 PM IST
anant jain anant anant
Updated Mon, 21 Jan 2019 10:30 PM IST
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बदले मौसम ने किसानों को डराया, देर शाम बरसे  बदरा
माौसम - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद। सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली। दिनभर आसमान में बादल छाये रहे। देर शाम झमाझम बारिश होने से किसान चिंतित नजर आए। बारिश के चलते सरसों की फसल में फफूंदी एवं आलू की फसल में चुर्री रोग लगने की संभावना बढ़ जाएगी। मंडी में नये आलू के भाव भी बढ़ जाएंगे। लेकिन गेहूं की फसल के लिए बदला मौसम रामबाण साबित होगा।
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बीते कुछ दिनों से सूर्य के तेज से मौसम में गरमाहट आ गई थी। लेकिन सोमवार को दोपहर बाद अचानक बदल गया। शाम को झमाझम बारिश होने लगी। बदले मौसम से जहां एक ओर गेहूं की फसल को लाभ होगा वहीं आलू और सरसों की फसल के खराब होने आशंका से किसान परेशान दिखे।
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मौसम के बदलते मिजाज का असर बाजार पर भी दिखा। शाम को दुकानदार जल्दी दुकानों को बंद कर गए।
होटल, धर्मशालाओं में 22 जनवरी को होने वाले शादी समारोह की तैयारियों पर बारिश ने पानी फेर दिया। शादी वाले घरों में छांव में खाने की स्टाल लगाने से ही लेकर स्टेज सजवाने की तैयारी करते दिखाई दिए। यह नजारा अधिकांश होटल एवं धर्मशालाओं व मैरिज होम में देखने को मिला।
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-महीपुरा निवासी आलू उत्पादक किसान सुरेशपाल सिंह ने कहा दस बीघा आलू बोया था। बारिश होने के कारण आलू में चुर्री रोग आने की संभावना बढ़ गई है। ऐसा हुआ तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। क्योंकि पिछले वर्ष का आलू व्यापारी तय होने के बाद भी लेने नहीं आया।

टूंडला। सोमवार शाम अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए। तेज धूलभरी हवाओं ने लोगों को परेशान किया। वहीं बूंदाबांदी के बाद हल्की बरसात को देखकर किसान के माथे पर चिंता की लकीर नजर आईं। मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए बाजार में दुकानदारों ने दुकान के शटर नीचे गिरा लिए।

बारिश शुरू होते ही आलू व सरसों किसानों के चेहरे पर चिंता साफ नजर आ रही थी। आलू व सरसों किसान योगेश उपाध्याय, रघुवीर सिंह, वेद प्रकाश, हरिचरन, हुब्बलाल, महावीर, ब्रजवीर सिंह चौहान, दिनेश जादौन, शीलेन्द्र प्रताप सिंह आदि का कहना था कि अगर बारिश तेज हो गयी तो आलू की फसल खराब हो जाएगी।


वहीं खेतों में पकी खड़ी सरसों की फसल खेतों में ही फूटकर खराब हो जाएगी। ऐसे में किसान बर्बाद हो जाएगा। वहीं गेहूं, जौ आदि के किसानों ने हल्की बारिश को गेंहू, जौ की फसल के लिए अमृत बताया है।
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