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बिछंद पहाडृपुर में पोलियो दवा पिलाने का बहिष्कार
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:13 PM IST
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जैथरा। खराब रास्ते के विरोध में उतरे बिछंद पहाड़पुर के ग्रामीणों ने पोलियो की दवा का बहिष्कार कर दिया। किसी भी बच्चे को दवा नहीं पीने दी। ग्राम प्रधान एवं प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगा रहे लोगों ने जमकर नारेबाजी कर टीम को बंधक बना लिया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम के प्रयास भी असफल रहे।
जैथरा विकास खंड के गांव बिछंद के लोग गांव की बदहाली को लेकर आक्रोशित हैं। गांव का विकास न होने का गुस्सा रविवार को ग्रामीणों ने अपने बच्चों को पोलियो की दवा न पिलाकर उतारा। अभियान का विरोध कर नाराजगी जता रहे ग्रामीणों का कहना है कि गांव की अव्यवस्थाओं की ओर प्रधान, प्रशासन का ध्यान नहीं है।
इससे लोगों का जीवन नर्क हो रहा है। कीचड़ भरे रास्तों पर गिरने से तीन बच्चों के हाथ टूट चुके है, गौतम पुत्र संजीव, रोहित पुत्र सुमन तथा रिषभ पुत्र रामब्रजेश शामिल है। वहीं दर्जनभर अन्य घायल हुए हैं। शिकायतों के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।
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पोलियो की दवा का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने दवा पिलाने पहुंची टीम को बंधक बनाकर नारेबाजी की। घंटों बाद भी गांव के किसी भी बच्चे को दवा नहीं पिलाने दी। तो इसकी सूचना उपजिलाधिकारी अलीगंज शिव सिंह को दी गई।
सूचना पर पहुंचे एसडीएम के सामने ग्रामीणों ने घायल बच्चों को पेश कर उपेक्षा के आरोप लगाए। आश्वासन एवं समझाने के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। और गांव के सैकड़ों नौनिहाल जिंदगी की दो बूंद पीने से वंचित रहे।
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सैकड़ों बच्चे वंचित हुए
तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांव में सैकड़ों बच्चे हैं। जिन्हें दवा पिलानी थी। लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने अपने बच्चों को बूथ तक नहीं जाने दिया। और न ही टीम को अपने घरों में पहुंचने दिया।
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सूचना के बाद भी नहीं पहुंचे प्रधान
विरोध की सूचना से ब्लाक एवं तहसील प्रशासन गंभीर हो गया। उपजिलाधिकारी स्वंय पहुचे। लेकिन सूचना के बाद भी ग्राम प्रधान नही पहुंचे। बताते चलें कि प्रधान निकटवर्ती गांव पहाड़पुर के निवासी दयासिंह शाक्य हैं।
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स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
ग्रामीण मुरारी लाल, प्रेम किशोर, भोलागशंकर आदि का कहना है कि बारिश से पहले भी स्कूल का रास्ते पर कीचड़ रहता है इसके चलते बूंदाबांदी के बाद यहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
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वर्जन
1. गांव के मुख्य मार्ग के साथ साथ ही अंदर की गलियों की हालत भी खस्ता है। कई बार जिम्मेदारों के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
देवेन्द्र कुमार
2. पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसको लेकर आम दिनों में भी दलदल बना रहता है।
पंकज कुमार
3. जिम्मेदारों के चक्कर काट काटकर हम थक चुके हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। हम लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।
दलवीर सिंह
4. गांव में चारों ओर गंदगी का आलम है। मुख्य मार्ग पर निकलने से डर लगता है। जब तक हमारी कोई सुनवाई नहीं करेगा। तब तक दवा हम बच्चों को नहीं पिलाएंगे।
महेन्द्र पाल
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ग्रामीणों की सड़क में हो रहे गड्ढों को लेकर अपनी मांग थी। जब दवा पीने से मना किया तो जिलाधिकारी को अवगत कराया। अलीगंज एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। मगर ग्रामीण दवा पीने को तैयार नहीं हुए है। हमारी टीम अभी भी ग्रामीणों को समझाने में जुटी हुई है। उम्मीद है सोमवार को ग्रामीण दवा पीने को तैयार हो जाएंगे।
डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ
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जैथरा विकास खंड के गांव बिछंद के लोग गांव की बदहाली को लेकर आक्रोशित हैं। गांव का विकास न होने का गुस्सा रविवार को ग्रामीणों ने अपने बच्चों को पोलियो की दवा न पिलाकर उतारा। अभियान का विरोध कर नाराजगी जता रहे ग्रामीणों का कहना है कि गांव की अव्यवस्थाओं की ओर प्रधान, प्रशासन का ध्यान नहीं है।
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इससे लोगों का जीवन नर्क हो रहा है। कीचड़ भरे रास्तों पर गिरने से तीन बच्चों के हाथ टूट चुके है, गौतम पुत्र संजीव, रोहित पुत्र सुमन तथा रिषभ पुत्र रामब्रजेश शामिल है। वहीं दर्जनभर अन्य घायल हुए हैं। शिकायतों के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।
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पोलियो की दवा का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने दवा पिलाने पहुंची टीम को बंधक बनाकर नारेबाजी की। घंटों बाद भी गांव के किसी भी बच्चे को दवा नहीं पिलाने दी। तो इसकी सूचना उपजिलाधिकारी अलीगंज शिव सिंह को दी गई।
सूचना पर पहुंचे एसडीएम के सामने ग्रामीणों ने घायल बच्चों को पेश कर उपेक्षा के आरोप लगाए। आश्वासन एवं समझाने के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। और गांव के सैकड़ों नौनिहाल जिंदगी की दो बूंद पीने से वंचित रहे।
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सैकड़ों बच्चे वंचित हुए
तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांव में सैकड़ों बच्चे हैं। जिन्हें दवा पिलानी थी। लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने अपने बच्चों को बूथ तक नहीं जाने दिया। और न ही टीम को अपने घरों में पहुंचने दिया।
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सूचना के बाद भी नहीं पहुंचे प्रधान
विरोध की सूचना से ब्लाक एवं तहसील प्रशासन गंभीर हो गया। उपजिलाधिकारी स्वंय पहुचे। लेकिन सूचना के बाद भी ग्राम प्रधान नही पहुंचे। बताते चलें कि प्रधान निकटवर्ती गांव पहाड़पुर के निवासी दयासिंह शाक्य हैं।
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स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
ग्रामीण मुरारी लाल, प्रेम किशोर, भोलागशंकर आदि का कहना है कि बारिश से पहले भी स्कूल का रास्ते पर कीचड़ रहता है इसके चलते बूंदाबांदी के बाद यहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
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वर्जन
1. गांव के मुख्य मार्ग के साथ साथ ही अंदर की गलियों की हालत भी खस्ता है। कई बार जिम्मेदारों के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
देवेन्द्र कुमार
2. पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसको लेकर आम दिनों में भी दलदल बना रहता है।
पंकज कुमार
3. जिम्मेदारों के चक्कर काट काटकर हम थक चुके हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। हम लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।
दलवीर सिंह
4. गांव में चारों ओर गंदगी का आलम है। मुख्य मार्ग पर निकलने से डर लगता है। जब तक हमारी कोई सुनवाई नहीं करेगा। तब तक दवा हम बच्चों को नहीं पिलाएंगे।
महेन्द्र पाल
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ग्रामीणों की सड़क में हो रहे गड्ढों को लेकर अपनी मांग थी। जब दवा पीने से मना किया तो जिलाधिकारी को अवगत कराया। अलीगंज एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। मगर ग्रामीण दवा पीने को तैयार नहीं हुए है। हमारी टीम अभी भी ग्रामीणों को समझाने में जुटी हुई है। उम्मीद है सोमवार को ग्रामीण दवा पीने को तैयार हो जाएंगे।
डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ