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सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, सीताराम मंदिर भी संवरेंगे
Updated Fri, 03 Aug 2018 11:02 PM IST
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सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, सीताराम मंदिर भी संवरेंगे
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
सोरों के लोगों की सीएम योगी आदित्यनाथ की तीर्थनगरी के विकास की घोषणा के बाद से यहां होने वाले कार्यों पर नजर है। बाशिंदों को इंतजार है कि कब यहां तीर्थस्थानों के विकास के कार्य शुरू होंगे। शुक्रवार को लखनऊ से पहुंचकर आर्किटेक्ट की टीम ने महत्वपूर्ण स्थानों, मंदिरों का निरीक्षण करते हुए मैपिंग की।
तीर्थनगरी सोरों में छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पौराणिक तीर्थस्थान हैं। इन सभी तीर्थों को विकसित किया जाना है। मोतिया थल नाम का एक पुराना सरोवर बटुकनाथ मंदिर के पास है। यह सरोवर पिछले कई दशकों से सूखा पड़ा है। बताया जाता है कि इस सरोवर में पहले लोग दर्शन से पहले स्नान करते थे, लेकिन अब इसके अस्तित्व को पुनर्जीवित किया जाएगा। यह सरोवर कैसे विकसित हो इस बारे में आर्किटेक्ट की टीम ने निरीक्षण किया। इस सरोवर को विकास की योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा पुरातत्व विभाग के अधीन सीताराम मंदिर पर भी आर्किटेक्ट की टीम ने निरीक्षण कर लोगों से बातचीत की। इसके अलावा सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, बटुकनाथ मंदिर, संत तुलसीदास के गुरु नरसिंह की पाठशाला का भी निरीक्षण करके मापतौल की गई। इन सभी स्थानों को सजाने संवारने और विकसित करने की योजना है। आर्किटेक्ट अब्दुल रऊफ ने मंदिरों व अन्य स्थानों पर भ्रमण करने के बाद टीम से उनकी मैपिंग कराई। तीर्थनगरी के इतिहास के जानकार डा. राधा कृष्ण दीक्षित से आर्किटेक्ट टीम ने विचार विमर्श किया एवं उन्हें महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। ईओ संतराम सरोज एवं अवर अभियंता सत्येंद्र सिंह भी आर्किटैक्ट टीम के साथ मौजूद रहे। ईओ संतराम सरोज ने बताया कि लगातार आर्किटेक्ट की टीम विकास के प्रस्तावों पर काम कर रही है।
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सोरों के लोगों की सीएम योगी आदित्यनाथ की तीर्थनगरी के विकास की घोषणा के बाद से यहां होने वाले कार्यों पर नजर है। बाशिंदों को इंतजार है कि कब यहां तीर्थस्थानों के विकास के कार्य शुरू होंगे। शुक्रवार को लखनऊ से पहुंचकर आर्किटेक्ट की टीम ने महत्वपूर्ण स्थानों, मंदिरों का निरीक्षण करते हुए मैपिंग की।
तीर्थनगरी सोरों में छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पौराणिक तीर्थस्थान हैं। इन सभी तीर्थों को विकसित किया जाना है। मोतिया थल नाम का एक पुराना सरोवर बटुकनाथ मंदिर के पास है। यह सरोवर पिछले कई दशकों से सूखा पड़ा है। बताया जाता है कि इस सरोवर में पहले लोग दर्शन से पहले स्नान करते थे, लेकिन अब इसके अस्तित्व को पुनर्जीवित किया जाएगा। यह सरोवर कैसे विकसित हो इस बारे में आर्किटेक्ट की टीम ने निरीक्षण किया। इस सरोवर को विकास की योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा पुरातत्व विभाग के अधीन सीताराम मंदिर पर भी आर्किटेक्ट की टीम ने निरीक्षण कर लोगों से बातचीत की। इसके अलावा सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, बटुकनाथ मंदिर, संत तुलसीदास के गुरु नरसिंह की पाठशाला का भी निरीक्षण करके मापतौल की गई। इन सभी स्थानों को सजाने संवारने और विकसित करने की योजना है। आर्किटेक्ट अब्दुल रऊफ ने मंदिरों व अन्य स्थानों पर भ्रमण करने के बाद टीम से उनकी मैपिंग कराई। तीर्थनगरी के इतिहास के जानकार डा. राधा कृष्ण दीक्षित से आर्किटेक्ट टीम ने विचार विमर्श किया एवं उन्हें महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। ईओ संतराम सरोज एवं अवर अभियंता सत्येंद्र सिंह भी आर्किटैक्ट टीम के साथ मौजूद रहे। ईओ संतराम सरोज ने बताया कि लगातार आर्किटेक्ट की टीम विकास के प्रस्तावों पर काम कर रही है।
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