{"_id":"5b58c0cf4f1c1bb37b8b48d1","slug":"11532543183-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"500 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन करने को तैयार मुड़िया संत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
500 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन करने को तैयार मुड़िया संत
Updated Wed, 25 Jul 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। गोवर्धन में चल रहे मुड़िया पूर्णिमा मेले में इस बार 500 वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा का निर्वहन 27 जुलाई को किया जाएगा। मुड़िया संत श्रीपाद सनातन गोस्वामी के विरह में सिर मुंडाकर शोभायात्राएं निकालेंगे। कहा जाता है कि श्रीपाद सनातन सिर मुंडाकर रहते थे, इसी कारण उन्हें मुड़िया बाबा के नाम से जाना जाता है।
कहते हैं कि प्रभु भक्ति के लिए ब्रज में श्रीपाद सनातन गोस्वामी का आगमन हुआ। वे यहां चक्लेश्वर के समीप भजनकुटी बनाकर रहने लगे। वे गिरिराज जी के अनन्य भक्त थे और नित्य प्रति गोवर्धन की परिक्रमा करते थे। वृद्धावस्था में गिरिराज प्रभु ने उन्हें चरण चिन्ह युक्त शिला दी। बाद में वे इसी की परिक्रमा करने लगे। यह शिला आज भी दामोदर मंदिर में विराजमान है।
सन् 15वीं सदी के मध्य में गुरु पूर्णिमा के दिन ही श्रीपाद सनातन गोस्वामी निकुंज वासी हो गए थे। उनके विरह में उनके अनुयायियों ने सिर मुंडाकर मानसी गंगा में स्नान किया और उनके पार्थिव शरीर को साथ लेकर गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा की। तभी से इस दिन को मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाने लगा। उनकी भजन कुटी आज भी गोवर्धन स्थित चक्कलेश्वर महादेव के समीप बनी हुई है।
विज्ञापन
27 जुलाई को सुबह नौ बजे मंदिर से मुड़िया शोभायात्रा निकाली जाएगी जो सनातन गोस्वामी की समाधि, दसविसा, हरदेव जी, दानघाटी, बड़ा बाजार, हाथी दरवाजा, सिद्ध बाबा होते हुए मंदिर पर पहुंचकर संपन्न होगी।
महंत रामकृष्ण दास, राधाश्याम सुंदर मंदिर
शोभायात्रा का शुभारंभ 27 को शाम चार बजे से किया जाएगा। इसमें ढोल-मजीरों की धुन पर मुड़िया संत नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा में सनातन गोस्वामी का डोला भी शामिल होगा। इससे पूर्व मंदिर में पूजन-अर्चन होगा।
महंत गोपाल दास, चैतन्य महाप्रभु मंदिर
विज्ञापन
कहते हैं कि प्रभु भक्ति के लिए ब्रज में श्रीपाद सनातन गोस्वामी का आगमन हुआ। वे यहां चक्लेश्वर के समीप भजनकुटी बनाकर रहने लगे। वे गिरिराज जी के अनन्य भक्त थे और नित्य प्रति गोवर्धन की परिक्रमा करते थे। वृद्धावस्था में गिरिराज प्रभु ने उन्हें चरण चिन्ह युक्त शिला दी। बाद में वे इसी की परिक्रमा करने लगे। यह शिला आज भी दामोदर मंदिर में विराजमान है।
विज्ञापन
सन् 15वीं सदी के मध्य में गुरु पूर्णिमा के दिन ही श्रीपाद सनातन गोस्वामी निकुंज वासी हो गए थे। उनके विरह में उनके अनुयायियों ने सिर मुंडाकर मानसी गंगा में स्नान किया और उनके पार्थिव शरीर को साथ लेकर गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा की। तभी से इस दिन को मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाने लगा। उनकी भजन कुटी आज भी गोवर्धन स्थित चक्कलेश्वर महादेव के समीप बनी हुई है।
विज्ञापन
27 जुलाई को सुबह नौ बजे मंदिर से मुड़िया शोभायात्रा निकाली जाएगी जो सनातन गोस्वामी की समाधि, दसविसा, हरदेव जी, दानघाटी, बड़ा बाजार, हाथी दरवाजा, सिद्ध बाबा होते हुए मंदिर पर पहुंचकर संपन्न होगी।
महंत रामकृष्ण दास, राधाश्याम सुंदर मंदिर
शोभायात्रा का शुभारंभ 27 को शाम चार बजे से किया जाएगा। इसमें ढोल-मजीरों की धुन पर मुड़िया संत नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा में सनातन गोस्वामी का डोला भी शामिल होगा। इससे पूर्व मंदिर में पूजन-अर्चन होगा।
महंत गोपाल दास, चैतन्य महाप्रभु मंदिर