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2011 में भी एटा में विवादों में रही थी जिला खेल प्रतियोगिता
Updated Sun, 30 Sep 2018 11:10 PM IST
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एटा। सात वर्ष पूर्व भी फर्जी खिलाडिय़ों को लेकर जिला युवा समारोह विवादो में रहा था। जिला स्तर पर सुनवाई न होने पर इसकी गूंज सूचना आयोग तक पहुंची थी। तब भी अनियमितता के आरोप तत्कालीन आयोजन संस्था जनता इंटर कालेज परसोंन पर लगे थे।
ओवर ऑल चैपिंयनशिप के नाम पर फर्जी छात्र-छात्राओं को खिलाना कुछ संस्थाओं की आदत रही है। 2011 में जिला युवा समारोह एवं मंडलीय रैली के आयोजक रहे जनता इंटर कालेज परसोंन पर फर्जी आवेदकों को खिलाने के गंभीर आरोप लगे थे। कुछ प्रतिभागी छात्र-छात्राओं ने फर्जी विद्यार्थियों को खिलाने की लिखित डीआईओएस से की थी।
कोई कार्रवाई न होने पर जाटवपुरा निवासी विनोद ने जनसूचना अधिकार के अंतर्गत अपर जिलाधिकारी प्रशासन के माध्यम से नौ प्रश्रों का जबाव मांगा था। इनमें कुछ प्रतिभागियों के विवरण, आयु प्रमाणपत्र, कक्षा-अनुक्रमांक, नामांकन संख्या, फोटो सहित अर्हता प्रमाणपत्र प्रतिभागी बच्चों के चयन समिति के साथ फोटो एवं प्रतियोगिता कराने वाले व्यायाम शिक्षकों का भी नाम विद्यालय सहित ब्यौरा मांगा था।
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निर्धारित समय में सूचना न देने पर तत्कालीन डीआईअेाएस जितेंद्र कुमार मलिक ने नाराजगी जताते हुए आयोजक संस्था को पत्र लिखकर अविलंब विवरण प्रस्तुत करने को कहा। इतना ही नहीं मामले की जांच जीजीआईसी लालगढ़ी की प्रधानाचार्य को सौंपी गई थी।
ओवर ऑल चैपिंयनशिप के नाम पर फर्जी छात्र-छात्राओं को खिलाना कुछ संस्थाओं की आदत रही है। 2011 में जिला युवा समारोह एवं मंडलीय रैली के आयोजक रहे जनता इंटर कालेज परसोंन पर फर्जी आवेदकों को खिलाने के गंभीर आरोप लगे थे। कुछ प्रतिभागी छात्र-छात्राओं ने फर्जी विद्यार्थियों को खिलाने की लिखित डीआईओएस से की थी।
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कोई कार्रवाई न होने पर जाटवपुरा निवासी विनोद ने जनसूचना अधिकार के अंतर्गत अपर जिलाधिकारी प्रशासन के माध्यम से नौ प्रश्रों का जबाव मांगा था। इनमें कुछ प्रतिभागियों के विवरण, आयु प्रमाणपत्र, कक्षा-अनुक्रमांक, नामांकन संख्या, फोटो सहित अर्हता प्रमाणपत्र प्रतिभागी बच्चों के चयन समिति के साथ फोटो एवं प्रतियोगिता कराने वाले व्यायाम शिक्षकों का भी नाम विद्यालय सहित ब्यौरा मांगा था।
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निर्धारित समय में सूचना न देने पर तत्कालीन डीआईअेाएस जितेंद्र कुमार मलिक ने नाराजगी जताते हुए आयोजक संस्था को पत्र लिखकर अविलंब विवरण प्रस्तुत करने को कहा। इतना ही नहीं मामले की जांच जीजीआईसी लालगढ़ी की प्रधानाचार्य को सौंपी गई थी।