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120 पदों के मुकाबले तैनात हैं केवल 35 आरक्षी
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:51 PM IST
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कासगंज।
जेल में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। केवल पचलाना में एक चौकी है। जेल में आंतरिक सुरक्षा की व्यवस्था भी काफी कमजोर है। जेल में तैनात होने वाले आरक्षियों के स्वीकृत पदों के मुकाबले काफी कम आरक्षियों की तैनाती है। जिससे सतर्कता में चूक का अंदेशा हो सकता है।
बागपत की जेल में कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर हत्या देने के बाद से जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जेल के अंदर कैसे हत्या हुई यह बात हर किसी को चौका रही है। इस हत्याकांड को लेकर जेलों में अलर्ट घोषित किया गया। इस अलर्ट के चलते जिला जेल में तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं है।
दो वर्ष पूर्व जिले में जिला कारागार शुरू हुआ, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी जेल के स्वीकृत पदों के मुताबिक आरक्षियों की तैनाती नहीं हो पाई है। जिला जेल में 120 पदों के मुकाबले केवल 35 आरक्षी ही तैनात किए गए हैं। जेल में कैदियों की संख्या भी 800 के आस पास है। हालांकि यहां की जिला जेल नए मॉडल की है। जिसमें सीसीटीवी और वॉच टॉवर की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन दो वर्षों में जेल में सुरक्षा संबंधी कोई समस्या सामने नहीं आई है, लेकिन पदों के मुकाबले आरक्षियों की तैनाती आवश्यक है जिससे मजबूत सुरक्षा बन सके।
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- जले में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। सोमवार को जेल में तलाशी अभियान चलाया गया। जेल पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन जेल में आरक्षियों के स्वीकृत पदों के मुकाबले तैनाती कम है।
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जेल में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। केवल पचलाना में एक चौकी है। जेल में आंतरिक सुरक्षा की व्यवस्था भी काफी कमजोर है। जेल में तैनात होने वाले आरक्षियों के स्वीकृत पदों के मुकाबले काफी कम आरक्षियों की तैनाती है। जिससे सतर्कता में चूक का अंदेशा हो सकता है।
बागपत की जेल में कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर हत्या देने के बाद से जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जेल के अंदर कैसे हत्या हुई यह बात हर किसी को चौका रही है। इस हत्याकांड को लेकर जेलों में अलर्ट घोषित किया गया। इस अलर्ट के चलते जिला जेल में तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं है।
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दो वर्ष पूर्व जिले में जिला कारागार शुरू हुआ, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी जेल के स्वीकृत पदों के मुताबिक आरक्षियों की तैनाती नहीं हो पाई है। जिला जेल में 120 पदों के मुकाबले केवल 35 आरक्षी ही तैनात किए गए हैं। जेल में कैदियों की संख्या भी 800 के आस पास है। हालांकि यहां की जिला जेल नए मॉडल की है। जिसमें सीसीटीवी और वॉच टॉवर की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन दो वर्षों में जेल में सुरक्षा संबंधी कोई समस्या सामने नहीं आई है, लेकिन पदों के मुकाबले आरक्षियों की तैनाती आवश्यक है जिससे मजबूत सुरक्षा बन सके।
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- जले में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। सोमवार को जेल में तलाशी अभियान चलाया गया। जेल पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन जेल में आरक्षियों के स्वीकृत पदों के मुकाबले तैनाती कम है।