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जै ब्रजवासी, जै ब्रजभाषा, जै बोलो ब्रजधाम की
Updated Thu, 22 Mar 2018 08:39 PM IST
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कृष्णा
- फोटो : डैमो
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वृंदावन (मथुरा) उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान द्वारा आयोजित ब्रज उत्सव कार्यक्रम में गुरुवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। मथुरा-वृंदावन नगर निगम में भाजपा पार्षद दल के उपनेता राधाकृष्ण पाठक ने कहा कि ब्रजभाषा का काव्य के क्षेत्र में अपूर्व योगदान है। महंत हरिबोल बाबा ने कहा कि कवि समाज को काव्य के माध्यम से दिशा प्रदान करने का कार्य करते हैं।
इससे पूर्व कवि सम्मेलन में कवि मोहनलाल मोही ने पग-पग पै राधे-राधे है रहि, घर-घर झांकी श्याम की। जै ब्रजवासी, जै ब्रजभाषा, जै बोलो ब्रजधाम की... सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि अशोक ने टेढ़ी ही टेढ़ी बहे यमुना, टेढ़े ही मूल कदंब की डारी। टेढ़ी ही लाठी कूॅ हाथ लिये, टेढ़ो मेरौ बांकेबिहारी... गुनगुनाया तो संपूर्ण वातावरण तालियों से गूंज उठा।
कवियत्री चंद्रेश जैन ने दे दे ओ वरदान मैया शारदे...., रमेश उपाध्याय ने मै हूॅ बंदर तू मदारी, चाहे कैसे तू नचाये..., निशेषजार ने साधो छीज रही ब्रजभाषा... सुनाकर समा बांधा। इस दौरान कवि वरुण चतुर्वेदी, रामगोपाल ग्वाल, डॉ. उमाशंकर राही आदि ने भी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ब्रजकिशोर त्रिपाठी, हरिवंश खंडेलवाल, विनोद शर्मा, कृष्णगोपाल शर्मा, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, विश्वबंधु, आशीष, ब्रजेंद्र शर्मा, राहुल पटेल, राकेश पांडेय उपस्थित थे।
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इससे पूर्व कवि सम्मेलन में कवि मोहनलाल मोही ने पग-पग पै राधे-राधे है रहि, घर-घर झांकी श्याम की। जै ब्रजवासी, जै ब्रजभाषा, जै बोलो ब्रजधाम की... सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि अशोक ने टेढ़ी ही टेढ़ी बहे यमुना, टेढ़े ही मूल कदंब की डारी। टेढ़ी ही लाठी कूॅ हाथ लिये, टेढ़ो मेरौ बांकेबिहारी... गुनगुनाया तो संपूर्ण वातावरण तालियों से गूंज उठा।
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कवियत्री चंद्रेश जैन ने दे दे ओ वरदान मैया शारदे...., रमेश उपाध्याय ने मै हूॅ बंदर तू मदारी, चाहे कैसे तू नचाये..., निशेषजार ने साधो छीज रही ब्रजभाषा... सुनाकर समा बांधा। इस दौरान कवि वरुण चतुर्वेदी, रामगोपाल ग्वाल, डॉ. उमाशंकर राही आदि ने भी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ब्रजकिशोर त्रिपाठी, हरिवंश खंडेलवाल, विनोद शर्मा, कृष्णगोपाल शर्मा, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, विश्वबंधु, आशीष, ब्रजेंद्र शर्मा, राहुल पटेल, राकेश पांडेय उपस्थित थे।
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