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संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारियां सिफर
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:49 PM IST
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मैनपुरी। जिले में संक्रामक रोग का कहर जारी है। पर, इससे निपटने को स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां सिफर हैं। विभाग ने रोगों पर रोकथाम के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए हैं। जिला अस्पताल में न तो दवाएं है और न ही पर्याप्त संख्या में चिकित्सक हैं।
जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल है। इस अस्पताल पर नजर डालें तो यहां न तो पर्याप्त दवाइयां हैं और न ही चिकित्सक। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 30 पदों के सापेक्ष मात्र 12 की तैनाती है। इसमें से भी सीएमएस डॉ.एके उपाध्याय स्थानांतरण के चलते अवकाश पर चले गए हैं।
सिर्फ 11 डॉक्टरों के सहारे जिला अस्पताल की सेवाएं चल रही हैं। दवाइयों के नाम पर यहां टीटी इंजेक्शन तक नहीं है। जबकि इन दिनों रोजाना 700 से 900 मरीज पहुंचते हैं। इनमें आधे मरीज विभिन्न संक्रामक बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं। वहीं करीब तीन दर्जन मरीज रोजाना भर्ती होते हैं।
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जिला अस्पताल में मानवीय संवदेनाओं को तार- तार किया जा रहा है। दुर्घटना में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों को जेल इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है। यह इंजेक्शन मामूली सर्जरी से पहले दर्द रोकने के लिए पीड़ित को लगाया जाता है। यहां आने वाले मरीजों को बिना इस इंजेक्शन के ही टांके लगाए जा रहे हैं। जिससे मरीज को असहनीय दर्द सहना पड़ता है।
वहीं स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 10 हजार रुपये की धनराशि ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय एएनएम के खातों में भेजी जाती है। पर प्रधान के साथ मिलकर एएनएम इस धनराशि का बंदर बांट कर रहे हैं। गांव-गांव गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं। कहीं भी इस धनराशि का उपयोग होने की जानकारी गांववालों तक को नहीं है।
प्रभारी सीमएएस डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि जो भी व्यवस्थाएं हैं, उनसे बेहतर उपचार के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए कई बार लिखा जा चुका है। पर, शासन से ही डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा रही है।
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जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल है। इस अस्पताल पर नजर डालें तो यहां न तो पर्याप्त दवाइयां हैं और न ही चिकित्सक। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 30 पदों के सापेक्ष मात्र 12 की तैनाती है। इसमें से भी सीएमएस डॉ.एके उपाध्याय स्थानांतरण के चलते अवकाश पर चले गए हैं।
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सिर्फ 11 डॉक्टरों के सहारे जिला अस्पताल की सेवाएं चल रही हैं। दवाइयों के नाम पर यहां टीटी इंजेक्शन तक नहीं है। जबकि इन दिनों रोजाना 700 से 900 मरीज पहुंचते हैं। इनमें आधे मरीज विभिन्न संक्रामक बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं। वहीं करीब तीन दर्जन मरीज रोजाना भर्ती होते हैं।
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जिला अस्पताल में मानवीय संवदेनाओं को तार- तार किया जा रहा है। दुर्घटना में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों को जेल इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है। यह इंजेक्शन मामूली सर्जरी से पहले दर्द रोकने के लिए पीड़ित को लगाया जाता है। यहां आने वाले मरीजों को बिना इस इंजेक्शन के ही टांके लगाए जा रहे हैं। जिससे मरीज को असहनीय दर्द सहना पड़ता है।
वहीं स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 10 हजार रुपये की धनराशि ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय एएनएम के खातों में भेजी जाती है। पर प्रधान के साथ मिलकर एएनएम इस धनराशि का बंदर बांट कर रहे हैं। गांव-गांव गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं। कहीं भी इस धनराशि का उपयोग होने की जानकारी गांववालों तक को नहीं है।
प्रभारी सीमएएस डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि जो भी व्यवस्थाएं हैं, उनसे बेहतर उपचार के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए कई बार लिखा जा चुका है। पर, शासन से ही डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा रही है।