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अब भी गड्ढों से भरी हैं एक हजार किलोमीटर की सड़कें
Updated Fri, 30 Jun 2017 11:47 PM IST
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मथुरा। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा द्वारा ग्रामीण इलाकों में बनाई गई 118 सड़कों में 100 से अधिक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की योजना में शामिल ही नहीं किया गया। ग्रामीण इलाकों में बनी एक हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों में आज भी बड़े-बडे़ गड्ढे हैं। ग्रामीण इन सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने को चक्कर लगा रहे हैं।
जनपद के मथुरा, फरह, नौहझील, मांट, राया, बलदेव, चौमुहां, छाता, नंदगांव, गोवर्धन ब्लाक में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में एक हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई में 123 सड़कें ग्रामीण इलाकों में बनवाई।
इनमें पांच सड़कें ऐसी हैं जिनको बने अभी पांच साल नहीं हुए। बाकी की 118 सड़कें पांच साल पूरा होने के बाद लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। प्रदेश सरकार द्वारा 15 जून तक गड्ढा मुक्त योजना में आरईएस की इन सड़कों को शामिल नहीं किया गया, जबकि इन सड़कों की स्थिति चलने लायक नहीं है। ग्रामीण सड़कों की मरम्मत व गड्डढा भरने को लेकर आरईएस के चक्कर लगा रहे हैं।
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आरईएस के एक्सईएन राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वे 118 सड़कों को लोनिवि को हस्तांतरित कर चुके हैं। उन सड़कों की मरम्मत के लिए लोनिवि के पास बजट आता है। मरम्मत के लिए उनके यहां कोई बजट नहीं आता।
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जनपद के मथुरा, फरह, नौहझील, मांट, राया, बलदेव, चौमुहां, छाता, नंदगांव, गोवर्धन ब्लाक में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में एक हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई में 123 सड़कें ग्रामीण इलाकों में बनवाई।
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इनमें पांच सड़कें ऐसी हैं जिनको बने अभी पांच साल नहीं हुए। बाकी की 118 सड़कें पांच साल पूरा होने के बाद लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। प्रदेश सरकार द्वारा 15 जून तक गड्ढा मुक्त योजना में आरईएस की इन सड़कों को शामिल नहीं किया गया, जबकि इन सड़कों की स्थिति चलने लायक नहीं है। ग्रामीण सड़कों की मरम्मत व गड्डढा भरने को लेकर आरईएस के चक्कर लगा रहे हैं।
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आरईएस के एक्सईएन राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वे 118 सड़कों को लोनिवि को हस्तांतरित कर चुके हैं। उन सड़कों की मरम्मत के लिए लोनिवि के पास बजट आता है। मरम्मत के लिए उनके यहां कोई बजट नहीं आता।