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गर्मी से लोग बेहाल, अब बारिश का ही सहारा
Updated Tue, 27 Jun 2017 11:38 PM IST
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धूप से बचने को छतरी लगाकर जाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। चिल-चिलाती धूप और उमस के कारण आमजन का हाल बेहाल हो गया। शहर से लेकर गांव तक पानी का संकट दिखाई दिया। गर्मी से अकुलाए लोग बरसात का इंतजार कर रहे हैं। मंगलवार को पारा 45 तक पहुंच गया। गर्मी से बचने को कोई पेड़ की छांव में तो कोई ऐसी तलाशते ही दिखाई दिए। घरों में महिलाओं एवं बच्चे को काफी दिक्कत थी। मासूम बच्चे बिजली के जाती ही गर्मी के कारण परेशान हो रहे थे।
दोपहर के वक्त शहर के हर मार्ग पर सन्नाटा दिखाई दिया। ओवरब्रिज के नीचे सजे मंगलबाजार में सन्नाटा पसरा हुआ था। दो दिन बाद खुले जिला मुख्यालय पर आने वाले फरियादियों की भीड़ काफी कम ही रही।
चिल-चिलाती धूप के कारण हर कोई गर्मी से बचाव का ही इंतजाम करके घरों से बाहर निकला। युवतियां चेहरों को ही ढंककर तो बुजुर्ग महिलाएं छतरी लेकर व युवक गमछा को साथ लेकर ही निकले। गर्मी बढ़ने के साथ बाजारों में शीतल पेयों की बिक्री में भी काफी वृद्धि हो गई है।
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गर्मी का ही असर है कि बाजारों में हरी सब्जियों के आने की गति थम गई। टमाटर के भाव तो 50 रुपया प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। वहीं, तोरई एवं लौकी और कद्दू का आना कम हो गया। इनके भी भाव बाजारों में बढ़ गए। किसानों का कहना है कि चिल-चिलाती धूप के कारण हर तीसरे दिन सब्जियों की फसलों की सिंचाई करने को विवश होना पड़ रहा है। भिंडी की आवक काफी कम हो गई। हालांकि बाहरी मंडियों के आने के कारण भी यहां पर अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
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दोपहर के वक्त शहर के हर मार्ग पर सन्नाटा दिखाई दिया। ओवरब्रिज के नीचे सजे मंगलबाजार में सन्नाटा पसरा हुआ था। दो दिन बाद खुले जिला मुख्यालय पर आने वाले फरियादियों की भीड़ काफी कम ही रही।
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चिल-चिलाती धूप के कारण हर कोई गर्मी से बचाव का ही इंतजाम करके घरों से बाहर निकला। युवतियां चेहरों को ही ढंककर तो बुजुर्ग महिलाएं छतरी लेकर व युवक गमछा को साथ लेकर ही निकले। गर्मी बढ़ने के साथ बाजारों में शीतल पेयों की बिक्री में भी काफी वृद्धि हो गई है।
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गर्मी का ही असर है कि बाजारों में हरी सब्जियों के आने की गति थम गई। टमाटर के भाव तो 50 रुपया प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। वहीं, तोरई एवं लौकी और कद्दू का आना कम हो गया। इनके भी भाव बाजारों में बढ़ गए। किसानों का कहना है कि चिल-चिलाती धूप के कारण हर तीसरे दिन सब्जियों की फसलों की सिंचाई करने को विवश होना पड़ रहा है। भिंडी की आवक काफी कम हो गई। हालांकि बाहरी मंडियों के आने के कारण भी यहां पर अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।