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पोक्सो एक्ट में युवक को 20 साल का कठोर कारावास
Updated Thu, 23 Aug 2018 08:14 PM IST
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- फोटो : self
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मथुरा। तीन साल पहले राया क्षेत्र के एक गांव में घर के निकट अन्य बच्चों के साथ खेलती तीन साल की मासूम को अपने घर की छत पर ले जाने वाले युवक को अदालत ने पोक्सो एक्ट में 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी तय किया है। इसे अदा न करने पर सजा एक साल और बढ़ा दी जाएगी।
अप्रैल 2016 में थाना राया के एक गांव में अपने घर के निकट बच्चों के साथ खेलती तीन साल की बच्ची को 20 वर्षीय युवक विशंभर बुरी नीयत से अपने घर की छत पर ले गया था। बालिका के रोने की आवाज सुनकर छत पर पहुंची उसकी मां को देखकर विशंभर भाग गया। इस दौरान बालिका ने अपने साथ किए जा रहे कृत्य की जानकारी मां को दी।
विशेष न्यायालय पोक्सो एक्ट के न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इसकी सुनवाई करते हुए दोषी को पोक्सो एक्ट का दोषी माना है। इसमें अभियुक्त को 20 साल का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाएगी।
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न्यायालय ने इस मामले में सरकार को भी आदेशित किया है कि पोक्सो एक्ट के अंतर्गत एक लाख रुपये का प्रतिकर एक माह के दौरान पीड़िता को प्रदान करें। यह राशि पीड़िता के वयस्क होने तक उसके नाम बैंक खाते में फिक्स जमा कराई जाए। इस मामले में पैरवी एडीजीसी वीरेंद्र लवानियां ने की।
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अप्रैल 2016 में थाना राया के एक गांव में अपने घर के निकट बच्चों के साथ खेलती तीन साल की बच्ची को 20 वर्षीय युवक विशंभर बुरी नीयत से अपने घर की छत पर ले गया था। बालिका के रोने की आवाज सुनकर छत पर पहुंची उसकी मां को देखकर विशंभर भाग गया। इस दौरान बालिका ने अपने साथ किए जा रहे कृत्य की जानकारी मां को दी।
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विशेष न्यायालय पोक्सो एक्ट के न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इसकी सुनवाई करते हुए दोषी को पोक्सो एक्ट का दोषी माना है। इसमें अभियुक्त को 20 साल का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाएगी।
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न्यायालय ने इस मामले में सरकार को भी आदेशित किया है कि पोक्सो एक्ट के अंतर्गत एक लाख रुपये का प्रतिकर एक माह के दौरान पीड़िता को प्रदान करें। यह राशि पीड़िता के वयस्क होने तक उसके नाम बैंक खाते में फिक्स जमा कराई जाए। इस मामले में पैरवी एडीजीसी वीरेंद्र लवानियां ने की।