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अव्यवस्थाओं के साथ जूझ रहे बच्चा वार्ड के मरीज
Updated Thu, 28 Jun 2018 11:57 PM IST
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फिरोजाबाद। अव्यवस्थाओं के साथ बच्चा वार्ड में मरीजों को जूझना पड़ता है। वार्ड में पड़े पलंग पर दिखाने के लिए चमचमाती सफेद चादर डाल दी जाती है। उस पलंग पर लेटने के लिए बच्चों को परेशानी होती है। क्योंकि पलंग की हालत एकदम खस्ता बनी हुई है। कई बार तो चादर भी गंदी दी जाती है।
बच्चा वार्ड के पलंग पर पड़े गद्दे पूरी तरह फटे हुए थे। बच्चों को उन गद्दे पर लिटाया जाता था तो वह असहज महसूस करने लगते थे। एक पलंग की हालत तो काफी ज्यादा खराब थी।
वार्ड फुल होने पर ही उस पलंग पर मरीज भर्ती होने को तैयार होते हैं। गर्मियों के मौसम में वार्ड फुल चल रहा है। जितने पलंग नहीं हैं, उससे ज्यादा मरीज वार्ड में भर्ती हैं। इससे कुछ तीमारदार अपने बच्चों को बरामदे में लेकर ही बैठे रहते हैं। सीएमएस डा. आरके पंाडेय का कहना है कि अस्पताल में जो लोग आते हैं, सरकारी सामग्री को समझकर फाड़ देते हैं। फिर भी हम व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे।
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- तबस्सुम का कहा है कि पलंग पर जो गद्दा पड़ा हुआ है वो पूरी तरह फटा हुआ है। बच्चे को लिटाया जाए तो उसे बच्चा रोने लगता है। घर से कपड़े मंगवाकर बिछवाने पड़ते हैं।
- नीरज का कहना है कि वार्ड में गंदगी बहुत रहती है। सफाई पर विशेष ध्यान नहीं है। इधर, गद्दे भी पट्टे पड़े हुए हैं। सरकार बहुत रुपया खर्च कर रही है। मगर व्यवस्थाओं की तरफ ध्यान नहीं।
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बच्चा वार्ड के पलंग पर पड़े गद्दे पूरी तरह फटे हुए थे। बच्चों को उन गद्दे पर लिटाया जाता था तो वह असहज महसूस करने लगते थे। एक पलंग की हालत तो काफी ज्यादा खराब थी।
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वार्ड फुल होने पर ही उस पलंग पर मरीज भर्ती होने को तैयार होते हैं। गर्मियों के मौसम में वार्ड फुल चल रहा है। जितने पलंग नहीं हैं, उससे ज्यादा मरीज वार्ड में भर्ती हैं। इससे कुछ तीमारदार अपने बच्चों को बरामदे में लेकर ही बैठे रहते हैं। सीएमएस डा. आरके पंाडेय का कहना है कि अस्पताल में जो लोग आते हैं, सरकारी सामग्री को समझकर फाड़ देते हैं। फिर भी हम व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे।
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- तबस्सुम का कहा है कि पलंग पर जो गद्दा पड़ा हुआ है वो पूरी तरह फटा हुआ है। बच्चे को लिटाया जाए तो उसे बच्चा रोने लगता है। घर से कपड़े मंगवाकर बिछवाने पड़ते हैं।
- नीरज का कहना है कि वार्ड में गंदगी बहुत रहती है। सफाई पर विशेष ध्यान नहीं है। इधर, गद्दे भी पट्टे पड़े हुए हैं। सरकार बहुत रुपया खर्च कर रही है। मगर व्यवस्थाओं की तरफ ध्यान नहीं।