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सड़कों पर भरी रफ्तार, कागजों में खड़ी रही बस
Updated Thu, 07 Jun 2018 11:16 PM IST
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इसी बस में की गई लूटपाट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एटा। एटा डिपो सड़क पर फर्राटा भरता रहा, लेकिन कागजों में बसें खड़ी हैं। हजारों रुपये प्रतिदिन की कमाई से अपनी जेब भरने में कर्मचारी जुटे रहे। अधिकारियों ने भी अपने भले के लिए कुछ भी बोलना गंवारा नहीं समझा। एटा डिपो में रोडवेज बसों के संचालन के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। आलम यह है कि सड़क पर दौड़नी वाली बसों को वापसी के दस्तावेजों में दर्ज किया गया, लेकिन लाभ-हानि खाते में बसों से आय को कम दर्शाकर करोड़ों रुपये का खेल हो गया। घपले की जांच के लिए शासन स्तर तक मामला उछल चुका है। मामला उछलने के बाद संलिप्त विभागीय अधिकारी और कर्मचारी लीपापोती में लग गए हैं। जांच की जद में बड़े-बड़ों की गर्दन फंसती नजर आ रही है।
एटा डिपो में वर्ष 2011 से 2017 तक बड़े पैमाने पर डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) के दौरान आने वाली बसों को डिपो में खड़ा दिखाकर आय को हड़पा जाता था। इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्ता के चलते बात दबा दी जाती थी। इसका संज्ञान विभागीय उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचने दिया गया और छह वर्ष में करोड़ों रुपये की चपत विभाग को लगाई गई। अधिकारियों की मिलीभगत होने के चलते बसों को डिपो रिटर्न दिखाया गया उन बसों को पीएल (लाभ-हानि) में नहीं दर्शाया गया। जांच हमेशा पीएल की ही कराई गई और अधिकारी साफ बचते रहे।
ऐसे होता रहा है घपला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोडवेज में बस की निकासी दिल्ली के लिए कर दी गई। डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) के दौरान बस की इनकम को पीएल में नहीं दर्शाया गया। आय अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से बंदर बांट कर लिया गया और रोडवेज को चूना लगा दिया। डिपो में लगभग 150 बसें हैं, एक दिन में 10 बसों की आय का गबन किया गया।
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1. रोडवेज में वर्ष 2011 से 2017 तक डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) व पीएल के दस्तावेजों में हेराफेरी करके करोड़ों रूपए का घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री, रोडवेज एमडी से की गई है। साथ ही उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए मांग की गई है।
राकेश कुमार गौतम, अक्षम चालक
2. पीएल से छेड़छाड की चर्चाएं चल रही हैं, अभी तक मेरे सामने कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया गया है। मैंने अभी चार्ज लिया है, अगर मामला सामने आएगा तो जांच मेें पूरा सहयोग किया जाएगा।
मदन लाल, एआरएम
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एटा डिपो में वर्ष 2011 से 2017 तक बड़े पैमाने पर डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) के दौरान आने वाली बसों को डिपो में खड़ा दिखाकर आय को हड़पा जाता था। इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्ता के चलते बात दबा दी जाती थी। इसका संज्ञान विभागीय उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचने दिया गया और छह वर्ष में करोड़ों रुपये की चपत विभाग को लगाई गई। अधिकारियों की मिलीभगत होने के चलते बसों को डिपो रिटर्न दिखाया गया उन बसों को पीएल (लाभ-हानि) में नहीं दर्शाया गया। जांच हमेशा पीएल की ही कराई गई और अधिकारी साफ बचते रहे।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोडवेज में बस की निकासी दिल्ली के लिए कर दी गई। डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) के दौरान बस की इनकम को पीएल में नहीं दर्शाया गया। आय अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से बंदर बांट कर लिया गया और रोडवेज को चूना लगा दिया। डिपो में लगभग 150 बसें हैं, एक दिन में 10 बसों की आय का गबन किया गया।
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1. रोडवेज में वर्ष 2011 से 2017 तक डिपो रिटर्न (फ्लीट समीक्षा) व पीएल के दस्तावेजों में हेराफेरी करके करोड़ों रूपए का घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री, रोडवेज एमडी से की गई है। साथ ही उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए मांग की गई है।
राकेश कुमार गौतम, अक्षम चालक
2. पीएल से छेड़छाड की चर्चाएं चल रही हैं, अभी तक मेरे सामने कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया गया है। मैंने अभी चार्ज लिया है, अगर मामला सामने आएगा तो जांच मेें पूरा सहयोग किया जाएगा।
मदन लाल, एआरएम