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पानी में अधिक फ्लोराइड बिगाड़ सकता है सेहत
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:09 PM IST
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पानी
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिले के पानी में बढ़ी फ्लोराइड की मात्रा ने लोगों के लिए बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की ओर से कराए गए सर्वे में जिले के पानी मेें फ्लोराइड मानक से अधिक मात्रा में मिला। वहीं पानी में नाइट्रेट की मात्रा भी अधिक मिली है। ऐसे में हड्डी के साथ गैस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है।
जानकारों की मानें तो प्रति लीटर भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम और नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा होने पर बीमारियों की आशंका रहती है। इन तत्वों की अधिकता को चल प्रदूषित श्रेणी में माना जाता है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जिले के पानी में फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई है। ऐसे में बीमारियों की आशंका बढ़ने लगी है। वहीं भूगर्भ जल की स्थिति को सुधारने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास ठंडे पड़े हैं।
जलेसर ब्लॉक में सर्वाधिक फ्लोराइड युक्त जल
जिले के जलेसर ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी मिला है। वहीं अवागढ़, निधौलीकलां ब्लॉक में भी पानी में फ्लोराइड मिला है। वहीं नाइट्रेट की मात्रा भी जलेसर, जैथरा, सकीट, अलीगंज, शीतलपुर ब्लॉक में नाइट्रेट की मात्रा अधिक है।
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इन जिलों के पानी में अधिक फ्लोराइड
आगरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद, जौनपुर, हाथरस, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, सोनभद्र, वाराणसी, उन्नाव
ये होती हैं बीमारियां
पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने से दांतों और हड्डियों की समस्या होती है। दांत पीले पड़ने लगते हैं और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। दंत रोग विशेषज्ञ डा. आशुतोष यादव कहते हैं कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक सेहत के लिए नुकसानदेह है। इससे दांतों और हड्डियों की समस्या अधिक होती है। वहीं नाइट्रेट की अधिक मात्रा से मस्तिष्क विकार, गैस्ट्रिक कैंसर, दिल और फेफड़े की बीमारी होने की आशंका रहती है।
जिले के पानी में बढ़ती फ्लोराइड की मात्रा हानिकारक है। इससे निपटने के लिए लोगों को प्रयास करने होंगे। साथ ही भूगर्भ जल का स्तर भी गिरता जा रहा है। इसके लिए पेड़ों का कटान रोकने की आवश्यकता है।
डा. राकेश सक्सेना, पर्यावरणप्रेमी और प्राचार्य डिग्री कालेज
आंकड़ों पर नजर
1.62 मिली ग्राम पाई गई फ्लोराइड की मात्रा
62 मिली ग्राम प्रति लीटर पाई गई नाइट्रेट की मात्रा
1.5 मिलीग्राम होनी चाहिए फ्लोराइड
45 मिलीगाम प्रति लीटर होना चाहिए नाइट्रेट
05 ब्लॉक जिले में है प्रभावित
08 ब्लॉक है जिले में
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जानकारों की मानें तो प्रति लीटर भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम और नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा होने पर बीमारियों की आशंका रहती है। इन तत्वों की अधिकता को चल प्रदूषित श्रेणी में माना जाता है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जिले के पानी में फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई है। ऐसे में बीमारियों की आशंका बढ़ने लगी है। वहीं भूगर्भ जल की स्थिति को सुधारने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास ठंडे पड़े हैं।
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जलेसर ब्लॉक में सर्वाधिक फ्लोराइड युक्त जल
जिले के जलेसर ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी मिला है। वहीं अवागढ़, निधौलीकलां ब्लॉक में भी पानी में फ्लोराइड मिला है। वहीं नाइट्रेट की मात्रा भी जलेसर, जैथरा, सकीट, अलीगंज, शीतलपुर ब्लॉक में नाइट्रेट की मात्रा अधिक है।
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इन जिलों के पानी में अधिक फ्लोराइड
आगरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद, जौनपुर, हाथरस, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, सोनभद्र, वाराणसी, उन्नाव
ये होती हैं बीमारियां
पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने से दांतों और हड्डियों की समस्या होती है। दांत पीले पड़ने लगते हैं और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। दंत रोग विशेषज्ञ डा. आशुतोष यादव कहते हैं कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक सेहत के लिए नुकसानदेह है। इससे दांतों और हड्डियों की समस्या अधिक होती है। वहीं नाइट्रेट की अधिक मात्रा से मस्तिष्क विकार, गैस्ट्रिक कैंसर, दिल और फेफड़े की बीमारी होने की आशंका रहती है।
जिले के पानी में बढ़ती फ्लोराइड की मात्रा हानिकारक है। इससे निपटने के लिए लोगों को प्रयास करने होंगे। साथ ही भूगर्भ जल का स्तर भी गिरता जा रहा है। इसके लिए पेड़ों का कटान रोकने की आवश्यकता है।
डा. राकेश सक्सेना, पर्यावरणप्रेमी और प्राचार्य डिग्री कालेज
आंकड़ों पर नजर
1.62 मिली ग्राम पाई गई फ्लोराइड की मात्रा
62 मिली ग्राम प्रति लीटर पाई गई नाइट्रेट की मात्रा
1.5 मिलीग्राम होनी चाहिए फ्लोराइड
45 मिलीगाम प्रति लीटर होना चाहिए नाइट्रेट
05 ब्लॉक जिले में है प्रभावित
08 ब्लॉक है जिले में