{"_id":"5a413e7d4f1c1ba7668bc1c1","slug":"101514225277-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरें में मुफलियों के निवाले फिर आ गए....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरें में मुफलियों के निवाले फिर आ गए....
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। पदम विभूषण पं. बनारसीदास चतुर्वेदी के 126वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में अर्जुन सिंह चतुर्वेदी की अध्यक्षता में चौबे कमलापति की धर्मशाला में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में दूरदराज से आए शायरों ने अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी।
अनवर कमाल अनवर ने रचना सुनाते हुए कहा कि फिर भूख अमीरे शहर को जर की सता उठी, खतरे में मुफलिसों के निवाले फिर आ गए। जहीरउद्दीन ने कहा न तुम बूढ़े मां बाप से आंख फेरो, कि ये बोझ हंसते हुए तुम उठा लो। हबीब अहमद हबीब ने कहा कि अब बुलंदी का क्या करूंगा मैं, जिंदगी सीड़ियां उतर आई।
हरीश चतुर्वेदी ने कहा कि जाने कैसी है मेहरबां सरकार रोज जानें किसान देते हैं। नसीम अनवर तरकश ने कहा कि प्यार तो बीबी से है साली भी दिलबर जान है, एक तरफ बूढ़ा शहर है एक तरफ तूफान है। ओमपाल सिंह निडर ने कहा कि साथ किनारों तक चलकर ही खुद को मीत समझने वाले, मैं तो मीत तभी मानूंगा मझदारों में साथ चलोगे।
विज्ञापन
कृष्ण कुमार कनक ने कहा कि नयनों से हंसकर रह जाना बिन बोले सब कुछ कह जाना, ऐसी अदा निराली मेरे यार की याद मुझे है अपने पहले प्यार की। डा. रामसनेही लाल शर्मा यायावर, अरमान वारसी, जावेद कमर, चंद्रप्रकाश चंद्र, यशपाल यश, ओमप्रकाश मधुर, राजेश जैन सरल, भोलानाथ चतुर्वेदी, अतुल चतुर्वेदी ने भी काव्य पाठ किया।
संचालन हरीश चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम में प्रकाश चंद्र चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी, अनिल चतुर्वेदी, सतेंद्र चतुर्वेदी, प्रमोद सैनी, राकेश शर्मा, संजय चतुर्वेदी, राधाकिशन शर्मा, सीए राजीव चतुर्वेदी शामिल रहे।
विज्ञापन
अनवर कमाल अनवर ने रचना सुनाते हुए कहा कि फिर भूख अमीरे शहर को जर की सता उठी, खतरे में मुफलिसों के निवाले फिर आ गए। जहीरउद्दीन ने कहा न तुम बूढ़े मां बाप से आंख फेरो, कि ये बोझ हंसते हुए तुम उठा लो। हबीब अहमद हबीब ने कहा कि अब बुलंदी का क्या करूंगा मैं, जिंदगी सीड़ियां उतर आई।
विज्ञापन
हरीश चतुर्वेदी ने कहा कि जाने कैसी है मेहरबां सरकार रोज जानें किसान देते हैं। नसीम अनवर तरकश ने कहा कि प्यार तो बीबी से है साली भी दिलबर जान है, एक तरफ बूढ़ा शहर है एक तरफ तूफान है। ओमपाल सिंह निडर ने कहा कि साथ किनारों तक चलकर ही खुद को मीत समझने वाले, मैं तो मीत तभी मानूंगा मझदारों में साथ चलोगे।
विज्ञापन
कृष्ण कुमार कनक ने कहा कि नयनों से हंसकर रह जाना बिन बोले सब कुछ कह जाना, ऐसी अदा निराली मेरे यार की याद मुझे है अपने पहले प्यार की। डा. रामसनेही लाल शर्मा यायावर, अरमान वारसी, जावेद कमर, चंद्रप्रकाश चंद्र, यशपाल यश, ओमप्रकाश मधुर, राजेश जैन सरल, भोलानाथ चतुर्वेदी, अतुल चतुर्वेदी ने भी काव्य पाठ किया।
संचालन हरीश चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम में प्रकाश चंद्र चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी, अनिल चतुर्वेदी, सतेंद्र चतुर्वेदी, प्रमोद सैनी, राकेश शर्मा, संजय चतुर्वेदी, राधाकिशन शर्मा, सीए राजीव चतुर्वेदी शामिल रहे।