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अस्पताल की आक्सीजन पाइप लाइन में मिला रिसाव
Updated Thu, 17 Aug 2017 11:55 PM IST
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अस्पताल में अाक्सीजन की लाइन
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में बिछाई गई ऑक्सीजन पाइप लाइन जांच में कई स्थानों से लीक मिली है। कई वार्सल भी ढीले मिले। पाइप लाइन दो साल से चालू नहीं की गई है। गोरखपुर हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की लिखा पढ़ी पर प्लांट लगाने वाली कंपनी की टीम ने गुरुवार को इसकी जांच की। मिली खामियों को ठीक किया।
गोरखपुर में ऑक्सीजन की वजह से हुई मासूमों की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने जिला अस्पताल में लगी ऑक्सीजन पाइप लाइन की जांच के लिए शासन को पत्र लिखा था। इस पर अस्पताल में पाइन लगाने वाली लखनऊ ऑप्टीकल की टीम सुशील कुमार के नेतृत्व में गुरुवार को अस्पताल पहुंची।
टीम ने अस्पताल परिसर के आपात कालीन, हृदय रोग कक्ष, बर्न वार्ड, कुपोषण वार्ड में लगी पाइन लाइन का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर पाइप लाइन में रिसाव मिला।
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कहीं वर्सल लीक तो कहीं ढीले मिले। कई स्थानों पर स्विच ही खराब थे। टीम के सदस्यों ने कमियां सही करने के बाद जब जानकारी की तो पता चला दो साल से पाइप लाइन चालू ही नहीं है। मरीजों को पाइप लाइन के बजाए सिलेंडर केे माध्यम से ऑक्सीजन दी जाती है।
टीम प्रभारी सुशील ने बताया वह केवल कमियंा सही करने आए हैं। उनकी कंपनी ने ही अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन पाइप लाइन प्लांट लगाया था। प्लांट चालू नहीं होने के कारण उसमें कमियंा आई हैं। वह अपनी रिपोर्ट कंपनी के अधिकारी मनीष कुमार को देंगे। विभाग को पाइप लाइन की कमियां तथा सुधार के उपाय भी बताए।
जिला अस्पताल परिसर के आपात कालीन, हृदय रोग, बर्न, कुपोषण वार्ड सहित अस्पताल परिसर में लगी ऑक्सीजन पाइप लाइन के 30 प्वाइंट लगे हैं। आठ प्वाइंट कक्ष के बाहर लगे हैं। जिनमें से पांच प्वाइंट भी चालू हालत में नहीं मिले हैं। वर्तमान स्थिति में ऑक्सीजन पाइप लाइन चालू हालत में नहीं है
मार्च 2013 में बिछाई गई पाइप लाइन की लागत 30 लाख रुपये आई थी। एक प्वाइंट तैयार करने में 99,750 रुपये खर्च हुआ था। कुल तीस प्वाइंट है। जिन्हें लगाने में विभाग को 2,99,2500 रुपये का खर्च आया। दो साल से बंद पड़ी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एके उपाध्याय ने कहा कि गोरखपुर में हुए हादसे के बाद ऑक्सीजन पाइन लाइन को रुटीन वे में चेक कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया था। मामूली कमियां थी, जिसे टीम द्वारा सही करके सिस्टम अपडेट कर दिया गया है। शीघ्र ही पाइप लाइन को चालू कराया जाएगा।
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गोरखपुर में ऑक्सीजन की वजह से हुई मासूमों की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने जिला अस्पताल में लगी ऑक्सीजन पाइप लाइन की जांच के लिए शासन को पत्र लिखा था। इस पर अस्पताल में पाइन लगाने वाली लखनऊ ऑप्टीकल की टीम सुशील कुमार के नेतृत्व में गुरुवार को अस्पताल पहुंची।
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टीम ने अस्पताल परिसर के आपात कालीन, हृदय रोग कक्ष, बर्न वार्ड, कुपोषण वार्ड में लगी पाइन लाइन का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर पाइप लाइन में रिसाव मिला।
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कहीं वर्सल लीक तो कहीं ढीले मिले। कई स्थानों पर स्विच ही खराब थे। टीम के सदस्यों ने कमियां सही करने के बाद जब जानकारी की तो पता चला दो साल से पाइप लाइन चालू ही नहीं है। मरीजों को पाइप लाइन के बजाए सिलेंडर केे माध्यम से ऑक्सीजन दी जाती है।
टीम प्रभारी सुशील ने बताया वह केवल कमियंा सही करने आए हैं। उनकी कंपनी ने ही अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन पाइप लाइन प्लांट लगाया था। प्लांट चालू नहीं होने के कारण उसमें कमियंा आई हैं। वह अपनी रिपोर्ट कंपनी के अधिकारी मनीष कुमार को देंगे। विभाग को पाइप लाइन की कमियां तथा सुधार के उपाय भी बताए।
जिला अस्पताल परिसर के आपात कालीन, हृदय रोग, बर्न, कुपोषण वार्ड सहित अस्पताल परिसर में लगी ऑक्सीजन पाइप लाइन के 30 प्वाइंट लगे हैं। आठ प्वाइंट कक्ष के बाहर लगे हैं। जिनमें से पांच प्वाइंट भी चालू हालत में नहीं मिले हैं। वर्तमान स्थिति में ऑक्सीजन पाइप लाइन चालू हालत में नहीं है
मार्च 2013 में बिछाई गई पाइप लाइन की लागत 30 लाख रुपये आई थी। एक प्वाइंट तैयार करने में 99,750 रुपये खर्च हुआ था। कुल तीस प्वाइंट है। जिन्हें लगाने में विभाग को 2,99,2500 रुपये का खर्च आया। दो साल से बंद पड़ी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एके उपाध्याय ने कहा कि गोरखपुर में हुए हादसे के बाद ऑक्सीजन पाइन लाइन को रुटीन वे में चेक कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया था। मामूली कमियां थी, जिसे टीम द्वारा सही करके सिस्टम अपडेट कर दिया गया है। शीघ्र ही पाइप लाइन को चालू कराया जाएगा।