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तीमारदार फोन करते रहे, नहीं आई एंबुलेंस
Updated Fri, 04 Aug 2017 11:59 PM IST
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फिरोजाबाद। डीजल का बजट न आने के कारण 108 और 102 एंबुलेंस सेवा शुक्रवार को पूरी तरह से ठप हो गई। गर्भवती और मरीजों को अस्पताल आना हो या फिर वापस जाना हो तीमारदार ई-रिक्शा या आटो रिक्शा का सहारा ले रहे हैं। ट्रामा सेंटर एवं अस्पताल के बाहर आटो खडे़ रहे। वहीं, सीएचसी, पीएचसी पर भी मरीजों को तीमारदार निजी वाहनों से लाए।
मरीज एंबुलेंस को बुलाने के लिए 108 और 102 नंबर फोन में डायल करते रहे लेकिन उनके पास एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद लोग मरीजों को प्राइवेट वाहनों में लेकर आए। शासन ने एंबुलेंस चलाने वाली कंपनी को बजट नहीं दिया है। इससे एंबुलेंस सीएचसी एवं पीएचसी पर खड़ी हैं।
इस दौरान गर्भवतियों को भी अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें उठानी पड़ी।
जिले में 108 एवं 102 एंबुलेंस की की संख्या करीब 50 है। मगर डीजल न होने के कारण शोपीस बनी हुई हैं। सीएमओ डा. एसके दीक्षित का कहना है कि बजट न होने के कारण एंबुलेंस खड़ी हुई है। बजट शासन स्तर से ही एंबुलेंस को दिया जाता है।
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एंबुलेंस न चलने का फायदा उठाते हुए जिला महिला अस्पताल एवं ट्रामा सेंटर के बाहर काफी संख्या में आटो चालक खडे़ दिखाई दिए। उन्होंने मन मुताबिक रुपये मांगे। तीमारदारों ने मरीज की जान बचाने के लिए मजबूरन उनके मनमाफिक रुपये दिए।
अगर कहीं दुर्घटना हो जाए तो उन घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। विभागीय लोगों के मुताबिक डीजल की यह समस्या सिर्फ फिरोजाबाद जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में है।
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मरीज एंबुलेंस को बुलाने के लिए 108 और 102 नंबर फोन में डायल करते रहे लेकिन उनके पास एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद लोग मरीजों को प्राइवेट वाहनों में लेकर आए। शासन ने एंबुलेंस चलाने वाली कंपनी को बजट नहीं दिया है। इससे एंबुलेंस सीएचसी एवं पीएचसी पर खड़ी हैं।
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इस दौरान गर्भवतियों को भी अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें उठानी पड़ी।
जिले में 108 एवं 102 एंबुलेंस की की संख्या करीब 50 है। मगर डीजल न होने के कारण शोपीस बनी हुई हैं। सीएमओ डा. एसके दीक्षित का कहना है कि बजट न होने के कारण एंबुलेंस खड़ी हुई है। बजट शासन स्तर से ही एंबुलेंस को दिया जाता है।
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एंबुलेंस न चलने का फायदा उठाते हुए जिला महिला अस्पताल एवं ट्रामा सेंटर के बाहर काफी संख्या में आटो चालक खडे़ दिखाई दिए। उन्होंने मन मुताबिक रुपये मांगे। तीमारदारों ने मरीज की जान बचाने के लिए मजबूरन उनके मनमाफिक रुपये दिए।
अगर कहीं दुर्घटना हो जाए तो उन घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। विभागीय लोगों के मुताबिक डीजल की यह समस्या सिर्फ फिरोजाबाद जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में है।