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यूपी: 'जेलर' पहुंचा जेल की सलाखों की पीछे
अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Wed, 11 Dec 2013 02:41 PM IST
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इलाहाबाद की नैनी जेल के जेलर वीके अरोड़ा को अदालत ने मंगलवार को जेल भेज दिया। उनके खिलाफ वर्ष 2010 में मुरादाबाद जिला कारागार में तैनाती के दौरान दहेज उत्पीड़न के बंदी अनुज शर्मा की हत्या का केस दर्ज है।
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पुलिस रिकार्ड में इस मुकदमे में वो चार साल से फरार चल रहे थे। इससे पहले अदालत उनकी कुर्की का आदेश जारी कर चुकी थी। मंगलवार को अरोड़ा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में समर्पण किया। सीजेएम ने जमानत अर्जी खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया।
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दहेज उत्पीड़न के बंदी अनुज शर्मा की मौत जिला जेल में 27 जनवरी 2010 को हुई थी। अनुज की मौत के बाद जेल प्रशासन उसकी लाश लेकर जिला अस्पताल पहुंचा था और उसे जिंदा दर्शाते हुए अस्पताल में भर्ती कराने की नाकाम कोशिश भी की थी।
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अनुज को जमानत मिल चुकी थी और उसकी मौत ऐन रिहाई वाले दिन हुई थी। अनुज के भाई खुशीराम ने तत्कालीन जेलर वीके अरोड़ा और तीन बंदियों पर भाई की हत्या का आरोप लगाया था। पोस्टमार्टम में अनुज की मौत पिटाई से होने की पुष्टि हुई थी।
उसके शरीर पर चोटों के 27 निशान मिले थे। जिसके बाद जेलर वीके अरोड़ा और तीन बंदी रक्षकों के खिलाफ अनुज की हत्या का केस दर्ज किया गया था। मामले में हुई न्यायिक जांच में भी अनुज की मौत को हत्या बताते हुए जेलर और बंदी रक्षकों को दोषी बताया था।
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इस मामले में दो बंदी रक्षक तो पहले ही न्यायालय में समर्पण कर चुके थे लेकिन जेलर वीके अरोड़ा को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। पुलिस ने उन्हें फरार घोषित किया और फिर उनकी कुर्की का वारंट भी ले लिया था।
वीके अरोड़ा ने मंगलवार को सीजेएम शाजिया नजर जैदी की अदालत में सरेंडर किया। सीजेएम से जेलर ने जमानत की गुहार लगाई, जिसे सीजेएम ने खारिज कर दिया। सीजेएम के आदेश पर जेलर को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।