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बोलेरो ने कार में मारी टक्कर, पिता-पुत्र की मौत
Lucknow
Updated Mon, 22 Jul 2013 05:33 AM IST
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लखनऊ। मानक नगर में कनौसी ओवरब्रिज पर रविवार सुबह बेकाबू बोलेरो ने कार सवार पिता-पुत्र की जान ले ली। बालागंज की ओर से आ रही बोलेरो की रफ्तार इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में बोलेरो सवार चार लोग भी घायल हो गए। इन सभी का ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने कार व बोलेरो को कब्जे में ले लिया। पुलिस बोलेरो के मालिक व चालक की तलाश कर रही है। हादसे में मृत बुजुर्ग निशक्त थे। जबकि बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। हादसे के बाद रिंग रोड पर आधे घंटे जाम लग गया।
मूलरूप से बांदा के बक्शा गांव निवासी राम मिलन (50) अपनी पत्नी निर्मला व बेटे नागेश्वर कुशवाहा (19), अनुराग व बेटी प्रतिभा के साथ आलमबाग के विश्वेश्वर नगर में रहते थे। राम मिलन एवं उनकी पत्नी निर्मला की जन्म से आंखों की रोशनी चली गई थी। राम मिलन सरकारी प्रेस में लिपिक पद पर काम करते थे। जबकि उनकी पत्नी निर्मला चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। बेटा नागेश्वर एनी बेसेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक रविवार सुबह राम मिलन को अपने एक दोस्त के साथ मोहनलालगंज के संत निरंकारी आश्रम में प्रवचन सुनने जाना था। बेटा नागेश्वर अपने पिता राम मिलन को लेकर कार से पिता के दोस्त के घर पारा जा रहा था। वहां से उन्हें आश्रम जाना था। सुबह सात बजे वह मानक नगर में कनौसी ओवरब्रिज पहुंचे थे कि रास्ते में बालागंज की ओर से आ रही एक बेकाबू बोलेरो कार से जा टकराई। बोलेरो की रफ्तार इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। पिता-पुत्र कार में फंस गए और मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। बोलेरो सवार चार लोगों को भी चोटें आईं। इनका ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक सीतापुर निवासी शिव गोविंद, सोनाली यादव, स्नेहलता व कमल बोलेरो बुक करके अपनी पोती की रिंग सेरेमनी में ग्वालियर जा रहे थे। पुलिस ने कार में फंसे पिता-पुत्र को बड़ी मुश्किल से कार का गेट काटकर बाहर निकाला और ट्रॉमा सेंटर भेजा। एसओ मानक नगर बृजेश राय का कहना है कि बोलेरो के नंबर के आधार पर गाड़ी मालिक व चालक की तलाश की जा रही है।
दूसरी ओर हादसे में निशक्त राम मिलन की मौत की खबर सुनकर नेशनल फेडरेशन ऑफ राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान के प्रदीप, अनिरुद्ध, अनिल व प्रवीण समेत तमाम पदाधिकारी और उसके साथी घर पहुंच गए। सभी ने राम मिलन की मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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खौफनाक मंजर देखकर कांप गए लोग
ओवरब्रिज पर खौफनाक मंजर देखकर लोग कांप गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बोलेरो की टक्कर से कार के परखच्चे उड़ गए थे। कार के कई हिस्से सड़क पर बिखरे थे। खून से लथपथ पिता-पुत्र की लाश कार में फंसी थी। शव की हालत देखकर किसी पुलिसकर्मी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह उन्हें बाहर निकाले। बमुश्किल, एक सिपाही ने कार का गेट उखाड़ कर दोनों को बाहर निकाला। थोड़े देर में घटना स्थल पर भीड़ जमा हो गई। लोगों का कहना था कि बोलेरो के चालक को झपकी आ गई थी इससे हादसा हो गया।
घर का जिम्मेदार था नागेश्वर
निशक्त राम मिलन व उनके बेटे नागेश्वर कुशवाहा की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। दृष्टिबाधित निर्मला पर तो मानो पहाड़ टूट पड़ा हो। बुढ़ापे का सहारा पति और जवान बेटा साथ छोड़ गया। बड़ा बेटा नागेश्वर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाले था। निर्मला का रो-रोकर बुरा हाल है। निर्मला के मुताबिक आंखों की रोशनी न होने के बाद पति ने हिम्मत नहीं हारी। खुद नौकरी करने के साथ ही मुझे ही नौकरी करने की प्रेरणा दी। उनकी मेहनत और जज्बे की वजह से मैं आज अपने पैरों पर खड़ी हूं। सीएमएस में चौथी क्लास का स्टूडेंट नागेश्वर का छोटा भाई अनुराग भी गमगीन खड़ा था। बहन प्रतिभा अपने भाई का शव देखकर बिलख रही थी।
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मूलरूप से बांदा के बक्शा गांव निवासी राम मिलन (50) अपनी पत्नी निर्मला व बेटे नागेश्वर कुशवाहा (19), अनुराग व बेटी प्रतिभा के साथ आलमबाग के विश्वेश्वर नगर में रहते थे। राम मिलन एवं उनकी पत्नी निर्मला की जन्म से आंखों की रोशनी चली गई थी। राम मिलन सरकारी प्रेस में लिपिक पद पर काम करते थे। जबकि उनकी पत्नी निर्मला चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। बेटा नागेश्वर एनी बेसेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक रविवार सुबह राम मिलन को अपने एक दोस्त के साथ मोहनलालगंज के संत निरंकारी आश्रम में प्रवचन सुनने जाना था। बेटा नागेश्वर अपने पिता राम मिलन को लेकर कार से पिता के दोस्त के घर पारा जा रहा था। वहां से उन्हें आश्रम जाना था। सुबह सात बजे वह मानक नगर में कनौसी ओवरब्रिज पहुंचे थे कि रास्ते में बालागंज की ओर से आ रही एक बेकाबू बोलेरो कार से जा टकराई। बोलेरो की रफ्तार इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। पिता-पुत्र कार में फंस गए और मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। बोलेरो सवार चार लोगों को भी चोटें आईं। इनका ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक सीतापुर निवासी शिव गोविंद, सोनाली यादव, स्नेहलता व कमल बोलेरो बुक करके अपनी पोती की रिंग सेरेमनी में ग्वालियर जा रहे थे। पुलिस ने कार में फंसे पिता-पुत्र को बड़ी मुश्किल से कार का गेट काटकर बाहर निकाला और ट्रॉमा सेंटर भेजा। एसओ मानक नगर बृजेश राय का कहना है कि बोलेरो के नंबर के आधार पर गाड़ी मालिक व चालक की तलाश की जा रही है।
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दूसरी ओर हादसे में निशक्त राम मिलन की मौत की खबर सुनकर नेशनल फेडरेशन ऑफ राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान के प्रदीप, अनिरुद्ध, अनिल व प्रवीण समेत तमाम पदाधिकारी और उसके साथी घर पहुंच गए। सभी ने राम मिलन की मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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खौफनाक मंजर देखकर कांप गए लोग
ओवरब्रिज पर खौफनाक मंजर देखकर लोग कांप गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बोलेरो की टक्कर से कार के परखच्चे उड़ गए थे। कार के कई हिस्से सड़क पर बिखरे थे। खून से लथपथ पिता-पुत्र की लाश कार में फंसी थी। शव की हालत देखकर किसी पुलिसकर्मी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह उन्हें बाहर निकाले। बमुश्किल, एक सिपाही ने कार का गेट उखाड़ कर दोनों को बाहर निकाला। थोड़े देर में घटना स्थल पर भीड़ जमा हो गई। लोगों का कहना था कि बोलेरो के चालक को झपकी आ गई थी इससे हादसा हो गया।
घर का जिम्मेदार था नागेश्वर
निशक्त राम मिलन व उनके बेटे नागेश्वर कुशवाहा की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। दृष्टिबाधित निर्मला पर तो मानो पहाड़ टूट पड़ा हो। बुढ़ापे का सहारा पति और जवान बेटा साथ छोड़ गया। बड़ा बेटा नागेश्वर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाले था। निर्मला का रो-रोकर बुरा हाल है। निर्मला के मुताबिक आंखों की रोशनी न होने के बाद पति ने हिम्मत नहीं हारी। खुद नौकरी करने के साथ ही मुझे ही नौकरी करने की प्रेरणा दी। उनकी मेहनत और जज्बे की वजह से मैं आज अपने पैरों पर खड़ी हूं। सीएमएस में चौथी क्लास का स्टूडेंट नागेश्वर का छोटा भाई अनुराग भी गमगीन खड़ा था। बहन प्रतिभा अपने भाई का शव देखकर बिलख रही थी।