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नो प्रिंट-नो डिलीवरी से पेट्रोल की कम तौल पर लगेगा ब्रेक

Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। पूरी कीमत चुकाने के बावजूद कम पेट्रोल-डीजल मिलने की आशंका से अब आपको निजात मिलने वाली है। पेट्रोल-डीजल सप्लाई से जुड़ी देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने इस दिशा में प्रयास करना शुरू कर दिया है। अगले वर्ष मार्च तक राजधानी में संचालित आईओसी के सभी पेट्रोल पंपों को नए सॉफ्टवेयर से अपडेट कर उसे ‘नो प्रिंट-नो डिलीवरी’ (एनपी-एनडी) सिस्टमयुक्त बनाया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत किसी ग्राहक को दिए जाने वाले पेट्रोल या डीजल की पूरी मात्रा डिस्पेंसर यूनिट से निकलने के बाद बिल अपने आप प्रिंट होकर निकलेगा। मांगी गई कीमत की मात्रा का पूरा पेट्रोल या डीजल देने और बिल प्रिंटिंग के बाद ही डिस्पेंसर मशीन न्यूट्रल होकर किसी दूसरे ग्राहक को पेट्रोल-डीजल देगी। आईओसी के महाप्रबंधक यूपी सिंह का दावा है कि इससे पेट्रोल पंपों पर जोड़-तोड़ से होने वाली घटतौली पर स्थायी तौर से रोक लगाई जा सकेगी। दरअसल, पेट्रोल पंप पर डिलीवरीमैन कुछ जोड़-तोड़कर ग्राहकों को कीमत से कम पेट्रोल-डीजल सप्लाई करते हैं। पंप के रीडिंग मीटर में सही मात्रा दिखने के बावजूद वाहनों में कम पेट्रोल-डीजल भरा जाता है। इसका पता ग्राहक को तब चलता है जब उसकी गाड़ी औसत से कम एवरेज देती है। आईओसी के महाप्रबंधक यूपी सिंह ने बताया कि वर्तमान में तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर स्थापित डिस्पेंसर यूनिटों में ऑटोमेशन के पहले और दूसरे लेवल का इस्तेमाल कर रही हैं। ‘नो प्रिंट-नो डिलीवरी’ के आधुनिक वितरण सिस्टम में ऑटोमेशन की हाईटेक तीसरे लेवल की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। शहर में इसकी शुरुआत पिछले दिनों माती इलाके में स्थित मैसर्स नंदनी फिलिंग स्टेशन पर थर्ड जेनरेशन के अत्याधुनिक डिस्पेंसर यूनिट को लगाकर हुई। इस तकनीक में पेट्रोल-डीजल बांटने वाली डिस्पेंसर यूनिट का ऑटोमेशन सिस्टम दूसरे वितरण पर तब तक रोक लगाए रखेगा जब तक फीडेड पेट्रोल की पूरी मात्रा का वितरण व इसका बिल प्रिंट होकर नहीं निकल जाता। बिल निकलते ही पेट्रोल देने वाले पाइप की नोजल अपने आप बंद हो जाएगी। सिंह के मुताबिक अगले वर्ष मार्च तक लखनऊ जिले में आईओसी द्वारा संचालित करीब 150 पेट्रोल पंपों पर इस व्यवस्था को लागू करने का लक्ष्य है।
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