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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   बीपीएड-एमपीएड की मान्यता छिनी

बीपीएड-एमपीएड की मान्यता छिनी

Thu, 25 Apr 2013 02:37 PM IST
Lucknow
Lucknow Updated Thu, 25 Apr 2013 02:37 PM IST
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लखनऊ। दूसरों को मान्यता के नियम समझाने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय मानकों में खुद फिसड्डी साबित हुआ है। शिक्षकों की कमी पूरी न करने के चलते राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने लविवि की बीपीएड एवं एमपीएड कोर्स की मान्यता वापस ले ली है। मामले में लविवि के जिम्मेदारों की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैसले के चार महीने बाद भी उन्हें इसकी भनक तक नहीं है। लविवि के सभी आला अधिकारी इस निर्णय की जानकारी से इन्कार कर रहे हैं।
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लविवि में बीपीएड की 50 और एमपीएड की 30 सीटें हैं। इन पाठ्यक्रमों में योग्य शिक्षकों के न होने का मामला अक्सर उठता रहा है। बहुत बार तो यहां स्कूली शिक्षकों से पढ़ाने की शिकायतें सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि बीपीएड के लिए 45 हजार और एमपीएड के लिए 36 हजार रुपये फीस वसूली जाती है। पाठ्यक्रमों के मानक पूरे न होने के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने एनसीटीई को निर्णय लेने का आदेश दिया था। एनसीटीई ने पिछले साल 16 मार्च को विवि को नोटिस जारी कर इन पाठ्यक्रमों में अप्रूव्ड शिक्षकों की सूची मांगी थी। जिम्मेदारों ने जवाब देने तक की जहमत नहीं उठाई। 21 जनवरी-13 की एनसीटीई की उत्तर क्षेत्र की कमेटी ने इन दोनों ही पाठ्यक्रमों की मान्यता रद्द कर दी। 23 जनवरी को फैसले की चिट्ठी भी विवि के रजिस्ट्रार सहित शासन के अधिकारियों को भेजी गई थी लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अनभिज्ञता का खामियाजा यह हुआ है कि आदेश के 60 दिनों के भीतर अपील करने का मौका भी विवि गंवा चुका है। नए सत्र से इसमें दाखिले नहीं हो सकेंगे। लूटा के महामंत्री डॉ. विनोद जैन का कहना है कि जिम्मेदारों ने जानबूझ कर यह पाठ्यक्रम बंद कराया है।
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