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समाजवादी बनने को करुणा और सरोकार का समावेश जरूरी

Sat, 23 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Sat, 23 Mar 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम का नारा लगाने मात्र से कोई सच्चा समाजवादी नहीं बन सकता। इसके लिए करुणा और सरोकार का समावेश जरूरी है। इसे अंगीकार करने वाला ही डॉ. लोहिया के चिंतन और विचारधारा को आगे बढ़ाकर समाजवादी सोच का बेहतर परिणाम दे सकता है। ये विचार डॉ. लोहिया के समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यमित्र दुबे ने शुक्रवार को व्यक्त किए। वे डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में ‘डॉ. लोहिया के समाजवाद की वर्तमान में उपयोगिता’ विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश के प्रतिष्ठित यश भारती सम्मान के लिए चुने जाने वाले डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दुबे ने बताया कि अन्याय का विरोध डॉ. लोहिया के सिद्धांतों की बुनियाद रहा। एक समाजवादी चिंतक के तौर पर लोहिया मार्क्स व गांधी दोनों से प्रभावित थे लेकिन उनका समाजवाद न तो मार्क्सवादी था, न गांधीवादी और न ही इन दोनों का विरोधी। यही वजह रही कि लोहिया के समाजवाद को एक व्यावहारिक राष्ट्रीय समाजवाद से जोड़ कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया यथार्थवादी थे और इसी वजह से समाजवाद के पुरातनपंथी विचारों को उन्होंने अस्वीकार करते हुए समाजवाद के साथ लोकतांत्रिक सिद्धांतों को अपनाया और इसे जीवित रखा। लोहिया सामाजिक-आर्थिक न्याय के लिए आर्थिक शक्ति राज्य के हाथों में सौंपने के पक्षधर जरूर थे लेकिन निरंकुश शासन को अस्वीकार कर वे राजनीतिक और आर्थिक सत्ता को देश, राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर बांटकर चौखंभा राज्य की स्थापना करना चाहते थे। संगोष्ठी में हिस्सा ले रहे वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव ने कहा कि डॉ. लोहिया का राजनीतिक चिंतन पूरी तरह से निष्पक्ष, कपट रहित और बेदाग रहा। राजनीति में वे भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद या किसी भी प्रकार के व्यवसायीकरण के हमेशा खिलाफ रहे। उनका मानना था कि भारत गांवों का देश है इसलिए कृषि का विकास और गांवों का उत्थान उनके आर्थिक चिंतन का मुख्य केंद्र रहा। उन्होंने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि तानाशाही का विरोध करके डॉ. लोहिया ने यह पहले ही जता दिया था कि आने वाले समय में लोकतंत्र का सबसे बड़ा शत्रु गुंडाराज होगा। संगोष्ठी के पहले सत्र को विधि विवि की कार्यवाहक कुलपति अनीता मिश्रा, इलाहाबाद से आए प्रो. बी नारायन, प्रो. रमेश दीक्षित, डॉ. विनोद चंद्रा, विधि विवि के डॉ. एके तिवारी व विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा विवि के डाू. विजय वर्मा सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
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