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टैबलेट बेचने के नाम पर लाखों ठगने वाला एमडी धरा गया
Lucknow
Updated Mon, 18 Mar 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। जानकीपुरम पुलिस ने कंपनी खोलकर टैबलेट बेचने के नाम पर ग्राहकों और बेरोजगारों से लाखों रुपए हड़पने वाले जालसाज प्रबंध निदेशक को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उसका भाई व मामले का दूसरा आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, मड़ियांव के जानकीपुरम विस्तार निवासी अभिजीत वर्मा ने डेढ़ साल पहले सेक्टर-क्यू चौराहे पर ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी खोली। इसके बाद उसने एक स्कीम शुरू की, जिसमें ग्राहकों से 7,500 रुपए का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया जाना था और कुछ दिनों बाद होम डिलवरी से उनके घर टैबलेट पहुंचना था। अभिजीत ने टैबलेट बेचने के लिए इंटर व स्नातक पास बेरोजगारों को नौकरी के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। इसमें चुने जाने वाले एजेंटों को 10,000 रुपए हर महीने वेतन मिलने की बात कही गई थी। काफी संख्या में आवेदन आए, जिसमें से 100 बेरोजगारों का चयन किया गया। इन सभी से सिक्योरिटी मनी के रूप में 7,500-7,500 रुपए जमा कराए गए और कंपनी के एजेंट के रूप में आसपास के जिलों में टैबलेट बेचने के लिए भेज दिया गया। हर एजेंट को प्रतिमाह पांच टैबलेट बेचने का टारगेट दिया गया।
एजेंट ग्राहकों से 7,500 रुपए का ड्राफ्ट ले आए। हालांकि डेढ़ साल बीतने के बाद भी उन्हें टैबलेट की डिलवरी नहीं हुई। इसके बाद जानकीपुरम के एक ग्राहक ने क्षेत्रीय थाने में लिखित शिकायत की। उसने यह भी आरोप लगाया कि टैबलेट न मिलने पर जब कंपनी के प्रबंध निदेशक अभिजीत वर्मा से पैसे वापस मांगे तो उसने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने धोखाधड़ी व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कर अभिजीत को दबोच लिया, जबकि उसका भाई व कंपनी का डिप्टी डायरेक्टर नरेंद्र वर्मा मौके से फरार हो गया। पुलिस आरोपी अभिजीत से पूछताछ कर रही है।
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दो और मामले भी दर्ज
पुलिस की मानें तो ब्लू स्टार कंपनी के प्रबंध निदेशक अभिजीत वर्मा व उसके भाई नरेंद्र वर्मा के खिलाफ वर्ष 2012 में धोखाधड़ी के दो और मामले भी दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए कई बार अभिजीत को बुलाया, लेकिन वह नहीं मिला। इससे पहले जब भी पुलिस सेक्टर-क्यू स्थित उसके दफ्तर पहुंचती तो वहां ताला लटका मिलता।
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सिर्फ एक दर्जन बांटे टैबलेट
पुलिस ने बताया अभिजीत ने ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को अपने जाल में फंसाने के लिए शुरू में एक दर्जन लोगों को टैबलेट बांटे थे। यह सभी दिल्ली की एक कंपनी के बने हुए थे। इसके बाद किसी को कुछ नहीं मिला।
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पुलिस के मुताबिक, मड़ियांव के जानकीपुरम विस्तार निवासी अभिजीत वर्मा ने डेढ़ साल पहले सेक्टर-क्यू चौराहे पर ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी खोली। इसके बाद उसने एक स्कीम शुरू की, जिसमें ग्राहकों से 7,500 रुपए का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया जाना था और कुछ दिनों बाद होम डिलवरी से उनके घर टैबलेट पहुंचना था। अभिजीत ने टैबलेट बेचने के लिए इंटर व स्नातक पास बेरोजगारों को नौकरी के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। इसमें चुने जाने वाले एजेंटों को 10,000 रुपए हर महीने वेतन मिलने की बात कही गई थी। काफी संख्या में आवेदन आए, जिसमें से 100 बेरोजगारों का चयन किया गया। इन सभी से सिक्योरिटी मनी के रूप में 7,500-7,500 रुपए जमा कराए गए और कंपनी के एजेंट के रूप में आसपास के जिलों में टैबलेट बेचने के लिए भेज दिया गया। हर एजेंट को प्रतिमाह पांच टैबलेट बेचने का टारगेट दिया गया।
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एजेंट ग्राहकों से 7,500 रुपए का ड्राफ्ट ले आए। हालांकि डेढ़ साल बीतने के बाद भी उन्हें टैबलेट की डिलवरी नहीं हुई। इसके बाद जानकीपुरम के एक ग्राहक ने क्षेत्रीय थाने में लिखित शिकायत की। उसने यह भी आरोप लगाया कि टैबलेट न मिलने पर जब कंपनी के प्रबंध निदेशक अभिजीत वर्मा से पैसे वापस मांगे तो उसने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने धोखाधड़ी व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कर अभिजीत को दबोच लिया, जबकि उसका भाई व कंपनी का डिप्टी डायरेक्टर नरेंद्र वर्मा मौके से फरार हो गया। पुलिस आरोपी अभिजीत से पूछताछ कर रही है।
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दो और मामले भी दर्ज
पुलिस की मानें तो ब्लू स्टार कंपनी के प्रबंध निदेशक अभिजीत वर्मा व उसके भाई नरेंद्र वर्मा के खिलाफ वर्ष 2012 में धोखाधड़ी के दो और मामले भी दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए कई बार अभिजीत को बुलाया, लेकिन वह नहीं मिला। इससे पहले जब भी पुलिस सेक्टर-क्यू स्थित उसके दफ्तर पहुंचती तो वहां ताला लटका मिलता।
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सिर्फ एक दर्जन बांटे टैबलेट
पुलिस ने बताया अभिजीत ने ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को अपने जाल में फंसाने के लिए शुरू में एक दर्जन लोगों को टैबलेट बांटे थे। यह सभी दिल्ली की एक कंपनी के बने हुए थे। इसके बाद किसी को कुछ नहीं मिला।