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एक हजार रुपये में कैसे होगी कला साधना
Lucknow
Updated Tue, 12 Mar 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। राज्य ललित कला अकादमी पर ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। इसकी वजह युवा कलाकारों को दी जानी वाली छात्रवृत्ति है। अकादमी जिस जोर-शोर से प्रदेशभर से पांच कलाकारों को छात्रवृत्ति के लिए चुनती है उन्हें छात्रवृत्ति के नाम पर मात्र एक हजार रुपए मासिक देती है। हालांकि अकादमी ने तत्कालीन संस्कृति मंत्री की घोषणा के अनुपालन में पुरस्कारों की राशि तो दोगुनी कर दी, लेकिन युवा कलाकारों को प्रोत्साहन के लिए छात्रवृत्ति की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की। यही वजह है कि आज युवा कलाकारों में काफी नाराजगी है।
हाल ही में अपना स्वर्ण जयंती वर्ष पूरे करने वाली अकादमी हर वर्ष 20-20 हजार रुपए पुरस्कार राशि वाले वार्षिक कला पुरस्कार और हर तीसरे वर्ष 50-50 हजार रुपए वाले अखिल भारतीय कला पुरस्कार देती है, लेकिन उसकी छात्रवृत्ति अभी भी एक हजार रुपए मासिक ही है। छात्रवृत्ति प्राप्त करने के दौरान कलाकारों को हर माह एक कृति तैयार कर उसका छायाचित्र अकादमी में जमा करना होता है।
कलाकारों का मानना है कि राष्ट्रीय ललित कला अकादमी ने छात्रवृत्ति तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपए कर दी और अब यह 10 हजार रुपए मासिक हो चुकी है, लेकिन राज्य ललित कला अकादमी की छात्रवृत्ति एक हजार रुपए ही है। महंगाई के इस दौर में युवा कलाकारों के सामने कला सामग्री खरीदकर कलाकृति सृजन करना मुश्किल होता जा रहा है। कलाकारों के अनुसार, छात्रवृत्ति प्राप्त करने के दौरान हर महीने कलाकृति बनानी होती है और इस कलाकृति के निर्माण पर आने वाला खर्च ही छात्रवृत्ति से काफी अधिक हो जाता है। इतनी धनराशि में केवल कागज पर रेखांकन ही बनाया जा सकता है लेकिन उसका भी फ्रेम करा पाना संभव नहीं है। पेंटिंग, छापा चित्र या मूर्ति शिल्प पर करीब पांच से पचास हजार रुपए तक खर्च हो जाते हैं। छात्रवृत्ति के साथ कुछ ऐसी शर्तें भी जुड़ी होती हैं कि कलाकार को किसी नौकरी में नहीं होना चाहिए। छात्रवृत्ति पूरी होने के बाद अकादमी प्रदर्शनी के आयोजन के लिए ढाई हजार रुपए देती है। प्रदर्शनी के आयोजन की दृष्टि से यह राशि भी काफी कम है।
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इनसेट-
एक कलाकृति पर आने वाला खर्च (औसत कृति पर अनुमानित)
पेंटिंग (कैनवास, फ्रेम और रंगों पर)- पांच से 10 हजार रुपए
छापा चित्र (प्लेट, कागज, स्याही, फ्रेम)-पांच से 10 हजार रुपए
मूर्ति शिल्प (टेरोकाटा)-पांच हजार रुपए,
मूर्ति शिल्प (पत्थर)-20 हजार रुपए
मूर्ति शिल्प (धातु)- 40-50 हजार
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हर जगह महंगाई की बात हो रही हैं लेकिन छात्रवृत्ति को नहीं बढ़ाया गया है। इतनी कम धनराशि में तो कलाकृति का फ्रेम भी नहीं लगाया जा सकता है। छात्रवृत्ति कम से कम पांच हजार रुपए मासिक होनी चाहिए।
- योगेन्द्रनाथ योगी (वरिष्ठ कलाकार, पूर्व प्राचार्य-कला एवं शिल्प महाविद्यालय)
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हाल ही में अपना स्वर्ण जयंती वर्ष पूरे करने वाली अकादमी हर वर्ष 20-20 हजार रुपए पुरस्कार राशि वाले वार्षिक कला पुरस्कार और हर तीसरे वर्ष 50-50 हजार रुपए वाले अखिल भारतीय कला पुरस्कार देती है, लेकिन उसकी छात्रवृत्ति अभी भी एक हजार रुपए मासिक ही है। छात्रवृत्ति प्राप्त करने के दौरान कलाकारों को हर माह एक कृति तैयार कर उसका छायाचित्र अकादमी में जमा करना होता है।
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कलाकारों का मानना है कि राष्ट्रीय ललित कला अकादमी ने छात्रवृत्ति तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपए कर दी और अब यह 10 हजार रुपए मासिक हो चुकी है, लेकिन राज्य ललित कला अकादमी की छात्रवृत्ति एक हजार रुपए ही है। महंगाई के इस दौर में युवा कलाकारों के सामने कला सामग्री खरीदकर कलाकृति सृजन करना मुश्किल होता जा रहा है। कलाकारों के अनुसार, छात्रवृत्ति प्राप्त करने के दौरान हर महीने कलाकृति बनानी होती है और इस कलाकृति के निर्माण पर आने वाला खर्च ही छात्रवृत्ति से काफी अधिक हो जाता है। इतनी धनराशि में केवल कागज पर रेखांकन ही बनाया जा सकता है लेकिन उसका भी फ्रेम करा पाना संभव नहीं है। पेंटिंग, छापा चित्र या मूर्ति शिल्प पर करीब पांच से पचास हजार रुपए तक खर्च हो जाते हैं। छात्रवृत्ति के साथ कुछ ऐसी शर्तें भी जुड़ी होती हैं कि कलाकार को किसी नौकरी में नहीं होना चाहिए। छात्रवृत्ति पूरी होने के बाद अकादमी प्रदर्शनी के आयोजन के लिए ढाई हजार रुपए देती है। प्रदर्शनी के आयोजन की दृष्टि से यह राशि भी काफी कम है।
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इनसेट-
एक कलाकृति पर आने वाला खर्च (औसत कृति पर अनुमानित)
पेंटिंग (कैनवास, फ्रेम और रंगों पर)- पांच से 10 हजार रुपए
छापा चित्र (प्लेट, कागज, स्याही, फ्रेम)-पांच से 10 हजार रुपए
मूर्ति शिल्प (टेरोकाटा)-पांच हजार रुपए,
मूर्ति शिल्प (पत्थर)-20 हजार रुपए
मूर्ति शिल्प (धातु)- 40-50 हजार
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हर जगह महंगाई की बात हो रही हैं लेकिन छात्रवृत्ति को नहीं बढ़ाया गया है। इतनी कम धनराशि में तो कलाकृति का फ्रेम भी नहीं लगाया जा सकता है। छात्रवृत्ति कम से कम पांच हजार रुपए मासिक होनी चाहिए।
- योगेन्द्रनाथ योगी (वरिष्ठ कलाकार, पूर्व प्राचार्य-कला एवं शिल्प महाविद्यालय)