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जर्जर स्कूल के निर्माण में लगा दिया घटिया माल
Lucknow
Updated Tue, 08 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। राजधानी में सरकारी स्कूलों के निर्माण कार्यों में धांधली के प्रकरण थमने का नाम नहीं ले रहे है। स्कूल में पढ़ाने के बजाए भवन बनवाने में लगे शिक्षक बच्चों के हक का पैसा बटोरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। ताजा प्रकरण आलमबाग स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रेमवती नगर के निर्माण का है। आरोपी शिक्षकों ने जर्जर ढांचे पर पुरानी सामग्री से विद्यालय का निर्माण करा दिया। विभाग ने दोनों शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। आलमबाग स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रेमवती नगर का संचालन सामुदायिक केन्द्र के पुराने भवन में किया जाता रहा है। 40 साल से भी ज्यादा पुराना यह भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया था। सर्व शिक्षा अभियान के तहत शैक्षिक सत्र 2010-11 में निर्माण कार्यों के लिए बजट जारी किया गया था। जिसमें तीन कमरों के निर्माण के लिए छह लाख रुपये और चहारदीवारी के लिए पौने दो लाख रुपये दिए गए। यह पैसा विद्यालय की शिक्षा निधि खाते में भेजा गया। जिसका संचालन शिक्षक सतीश द्विवेदी और विजय शंकर त्रिवेदी करते हैं। जानकारों के मुताबिक बजट जारी होने के साथ ही बैंक के खाते से पूरा पैसा निकाल लिया गया। लेकिन भवन का निर्माण नहीं कराया गया। मार्च 2012 में तत्कालीन नगर शिक्षा अधिकारी पंकज गुप्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा भी किया। मई 2012 के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सर्वदानंद के आदेशों पर नवंबर 2012 में निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ। स्थिति का जायजा लेने दो दिन पहले पहुंची नगर शिक्षा अधिकारी अजय द्विवेदी की टीम ने निर्माण कार्यों में भारी गड़बड़ी पाई। उनके मुताबिक, नियमानुसार पुराने भवन के मलबे को नीलाम किया जाना चाहिए था और नई नींव तैयार करके निर्माण कार्य कराया जाना चाहिए थे। लेकिन शिक्षकों ने निर्माण कार्य में पुरानी सामग्री का ही इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। साथ ही जर्जर भवन की पुरानी नींव पर निर्माण करा दिया। आरोपी शिक्षकों के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
जिम्मेदारों की शह पर चला पूरा खेल ः राजधानी के सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों के नाम पर चल रही धांधली के बारे में अमर उजाला ने पहले ही आगाह किया था। 21 मई 2012 को शिक्षक बने ठेकेदार शीर्षक से प्रकाशित खबर में एक ही शिक्षकों को नियमों को ताक पर रखकर आधा दर्जन से ज्यादा स्कूलों के भवनों के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपे जाने का खुलासा किया था। इसी का नतीजा था कि विद्यालय खातों से बजट निकलने के सालों बाद भी प्राथमिक विद्यालय केसरी खेड़ा, प्राथमिक विद्यालय हड़ाईन खेड़ा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय हड़ाईन खेड़ा समेत तमाम विद्यालयों में अभी तक काम शुरू ही नहीं हो पाया है। वहीं, कई अन्य विद्यालय के निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे। लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां तक की शासन के स्तर पर शुरू हुई जांच की फाइलें तक दबा ली गई।
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जिम्मेदारों की शह पर चला पूरा खेल ः राजधानी के सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों के नाम पर चल रही धांधली के बारे में अमर उजाला ने पहले ही आगाह किया था। 21 मई 2012 को शिक्षक बने ठेकेदार शीर्षक से प्रकाशित खबर में एक ही शिक्षकों को नियमों को ताक पर रखकर आधा दर्जन से ज्यादा स्कूलों के भवनों के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपे जाने का खुलासा किया था। इसी का नतीजा था कि विद्यालय खातों से बजट निकलने के सालों बाद भी प्राथमिक विद्यालय केसरी खेड़ा, प्राथमिक विद्यालय हड़ाईन खेड़ा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय हड़ाईन खेड़ा समेत तमाम विद्यालयों में अभी तक काम शुरू ही नहीं हो पाया है। वहीं, कई अन्य विद्यालय के निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे। लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां तक की शासन के स्तर पर शुरू हुई जांच की फाइलें तक दबा ली गई।
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