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उरई के मकान में बंधा मिला अपहृत
Lucknow
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। महानगर से अपहृत कूरियर व्यवसायी उरई की सुशील नगर कॉलोनी के एक बंद मकान में चारपाई पर बंधा मिला। मंगलवार तड़के उरई पुलिस की मदद से उसे सकुशल बरामद किया गया जबकि अपहरण की साजिश रचने वाला मास्टरमाइंड मौके से भागने में सफल रहा। मास्टरमाइंड अपहृत व्यवसायी का सहकर्मी ही था। शक के आधार पर पुलिस तीन अन्य दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अपहर्ताओं ने कूरियर व्यवसायी की आशिक मिजाजी जैसी कमजोरी का इस्तेमाल किया।
पिछले शनिवार को इलाहाबाद जाने के लिए घर से निकले कूरियर व्यवसायी पवन पाठक (50) का अपहरण हो गया था। सोमवार को घर वालों को अपहरण की जानकारी उस समय मिली जब एक अंजान व्यक्ति ने पड़ोसी की मेडिकल शॉप पर फोन कर घर वालों से बात करने के लिए कहा। व्यवसायी की पत्नी के फोन करने पर अपहर्ताओं ने पवन के एवज में 10 लाख रुपये फिरौती मांगी। शिकायत मिलने पर एसएसपी आरके चतुर्वेदी के निर्देशन में पुलिस टीम ने पवन के सेलफोन नंबर को सर्विलांस पर लिया। उसकी पहली लोकेशन चारबाग रेलवे स्टेशन मिली। यहां के स्टैंड से पुलिस को पवन की स्कूटी मिली। वारदात के 12 घंटे के भीतर पुलिस को व्यवसायी के सेलफोन नंबर पर चार कॉल मिलीं। ये कॉल्स झांसी, उरई समेत अलग-अलग शहरों में रिसीव की गई थीं। पुलिस ने संदिग्ध तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। युवकों की निशानदेही पर पुलिस ने पवन को उरई के दिलीप चौहान नामक व्यक्ति के बंद मकान से बरामद किया। पवन चारपाई से बंधा था और उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा था। पुलिस ने बताया कि दिलीप चौहान ही अपहरणकांड का मास्टरमाइंड है जो मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस का दावा है कि देर रात उसकी गिरफ्तारी संभव है। उसके बाद ही पवन को साथ लेकर वह लखनऊ के लिए रवाना होगी।
आर्थिक तंगी ने बनाया अपराधी
बेरोजगार दिलीप चौहान आर्थिक तंगी की वजह से अपराधी बन गया। दिलीप की पवन से पहली मुलाकात एक साल पहले उस समय हुई थी जब दिलीप नौकरी की तलाश में पवन की कूरियर एजेंसी के दफ्तर पहुंचा। 2500 रुपये तनख्वाह पर तीन महीने नौकरी करने के बाद दिलीप ने नौकरी छोड़ दी। इस दौरान वह पवन का बहुत करीबी हो गया था और उसके कई अंतरंग राज भी जान गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिलीप को पता था कि पवन आशिक मिजाज है और इसी कमजोरी को पकड़कर दिलीप ने अपहरण की साजिश रची।
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रेलवे में नौकरी मिलने पर पार्टी के बहाने बुलाया
दिलीप ने पवन को अपने जाल में फंसाने के लिए उसे बताया कि उसकी रेलवे में नौकरी लग गई है। इस खुशी को मनाने के लिए उसने उरई में एक जबरदस्त पार्टी दी है। पार्टी में पवन की हर पसंद का ख्याल रखा गया है। इस पर पवन काम से इलाहाबाद जाने के बहाने उरई के लिए निकल पड़ा। उसने चारबाग में अपनी स्कूटी खड़ी की और झांसी इंटरसिटी पकड़ी। उसने लखनऊ के एटीएम से 40 हजार और उरई के एटीएम से 10 हजार रुपये भी निकाले।
व्यवसायी की भूमिका की भी जांच
पुलिस पवन की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस को पवन के अपहर्ताओं के साथ मिले होने का शक है। इसके लिए पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस पवन के सेलफोन के कॉल डिटेल्स भी खंगाल रही है।
घर वालों ने साधी चुप्पी
पवन के उरई में मिलने की खबर से घर वालों के चेहरे पर खुशी लौट आई मगर वे कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ एक ही जवाब है कि पवन के घर आने के बाद ही मीडिया से बात करेंगे। इधर, पवन के अपहरण की जानकारी मिलने पर रिश्तेदार और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। महानगर कोतवाली के कई अफसर भी पवन के घर पहुंचे। पवन के सकुशल मिलने की खबर पर घर में घी के दिए जलाए गए।
वर्जन
अपहृत कूरियर व्यवसायी को उरई के एक मकान से सकुशल बरामद कर लिया गया है। शक के दायरे में आए तीन संदिग्धों से पूछताछ जारी है। अपहरण का मास्टरमाइंड व्यवसायी का सहकर्मी निकला जो घटनास्थल से भागने में सफल रहा। वह बहुत जल्द पुलिस गिरफ्त में होगा।
- आरके चतुर्वेदी, एसएसपी
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पिछले शनिवार को इलाहाबाद जाने के लिए घर से निकले कूरियर व्यवसायी पवन पाठक (50) का अपहरण हो गया था। सोमवार को घर वालों को अपहरण की जानकारी उस समय मिली जब एक अंजान व्यक्ति ने पड़ोसी की मेडिकल शॉप पर फोन कर घर वालों से बात करने के लिए कहा। व्यवसायी की पत्नी के फोन करने पर अपहर्ताओं ने पवन के एवज में 10 लाख रुपये फिरौती मांगी। शिकायत मिलने पर एसएसपी आरके चतुर्वेदी के निर्देशन में पुलिस टीम ने पवन के सेलफोन नंबर को सर्विलांस पर लिया। उसकी पहली लोकेशन चारबाग रेलवे स्टेशन मिली। यहां के स्टैंड से पुलिस को पवन की स्कूटी मिली। वारदात के 12 घंटे के भीतर पुलिस को व्यवसायी के सेलफोन नंबर पर चार कॉल मिलीं। ये कॉल्स झांसी, उरई समेत अलग-अलग शहरों में रिसीव की गई थीं। पुलिस ने संदिग्ध तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। युवकों की निशानदेही पर पुलिस ने पवन को उरई के दिलीप चौहान नामक व्यक्ति के बंद मकान से बरामद किया। पवन चारपाई से बंधा था और उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा था। पुलिस ने बताया कि दिलीप चौहान ही अपहरणकांड का मास्टरमाइंड है जो मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस का दावा है कि देर रात उसकी गिरफ्तारी संभव है। उसके बाद ही पवन को साथ लेकर वह लखनऊ के लिए रवाना होगी।
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आर्थिक तंगी ने बनाया अपराधी
बेरोजगार दिलीप चौहान आर्थिक तंगी की वजह से अपराधी बन गया। दिलीप की पवन से पहली मुलाकात एक साल पहले उस समय हुई थी जब दिलीप नौकरी की तलाश में पवन की कूरियर एजेंसी के दफ्तर पहुंचा। 2500 रुपये तनख्वाह पर तीन महीने नौकरी करने के बाद दिलीप ने नौकरी छोड़ दी। इस दौरान वह पवन का बहुत करीबी हो गया था और उसके कई अंतरंग राज भी जान गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दिलीप को पता था कि पवन आशिक मिजाज है और इसी कमजोरी को पकड़कर दिलीप ने अपहरण की साजिश रची।
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रेलवे में नौकरी मिलने पर पार्टी के बहाने बुलाया
दिलीप ने पवन को अपने जाल में फंसाने के लिए उसे बताया कि उसकी रेलवे में नौकरी लग गई है। इस खुशी को मनाने के लिए उसने उरई में एक जबरदस्त पार्टी दी है। पार्टी में पवन की हर पसंद का ख्याल रखा गया है। इस पर पवन काम से इलाहाबाद जाने के बहाने उरई के लिए निकल पड़ा। उसने चारबाग में अपनी स्कूटी खड़ी की और झांसी इंटरसिटी पकड़ी। उसने लखनऊ के एटीएम से 40 हजार और उरई के एटीएम से 10 हजार रुपये भी निकाले।
व्यवसायी की भूमिका की भी जांच
पुलिस पवन की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस को पवन के अपहर्ताओं के साथ मिले होने का शक है। इसके लिए पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस पवन के सेलफोन के कॉल डिटेल्स भी खंगाल रही है।
घर वालों ने साधी चुप्पी
पवन के उरई में मिलने की खबर से घर वालों के चेहरे पर खुशी लौट आई मगर वे कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका सिर्फ एक ही जवाब है कि पवन के घर आने के बाद ही मीडिया से बात करेंगे। इधर, पवन के अपहरण की जानकारी मिलने पर रिश्तेदार और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। महानगर कोतवाली के कई अफसर भी पवन के घर पहुंचे। पवन के सकुशल मिलने की खबर पर घर में घी के दिए जलाए गए।
वर्जन
अपहृत कूरियर व्यवसायी को उरई के एक मकान से सकुशल बरामद कर लिया गया है। शक के दायरे में आए तीन संदिग्धों से पूछताछ जारी है। अपहरण का मास्टरमाइंड व्यवसायी का सहकर्मी निकला जो घटनास्थल से भागने में सफल रहा। वह बहुत जल्द पुलिस गिरफ्त में होगा।
- आरके चतुर्वेदी, एसएसपी