{"_id":"124-45624","slug":"Lucknow-45624-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू से बच्चे सहित दो की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू से बच्चे सहित दो की मौत
Lucknow
Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। राजधानी में डेंगू से एक बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो गई। दोनों का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा था।
सरोजनीनगर के मीरानपुर पिनवट ग्राम पंचायत निवासी रामचंद्र के बेटे आदित्य (9) को पांच दिन से बुखार आ रहा था। स्थानीय निजी अस्पताल में इलाज के बावजूद जब उसे फायदा नहीं हुआ तो परिजनों ने सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उधर मड़ियांव निवासी लाले रावत (70) की भी डेंगू से मौत हो गई। लाले सरोजनी नगर अपने रिश्तेदार के घर गया था, जहां उसे बुखार आ गया। निजी अस्पताल में जांच कराने के बाद जब प्लेटलेट्स काउंट कम मिले तो डेंगू का इलाज शुरू किया गया। बुखार नियंत्रण में नहीं आया तो उसे सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान लाले की मौत हो गई। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि लाले की किडनी फेल थी। इसी के चलते उसकी मौत हुई है।
मरीज ने ट्रेन में दम तोड़ा
शहीद एक्सप्रेस से दिल्ली से मधुबनी बिहार जा रहे अजय सिंह (37) की मौत शनिवार सुबह ट्रेन में ही हो गई। अजय के साथ उनकी पत्नी और बच्ची भी थी। अजय डेंगू से पीड़ित थे। कोच संख्या एस-5 की सीट नंबर 24 पर यात्रा कर रहे अजय सिंह की हालत बरेली में ही बिगड़ गई। तेज बुखार की शिकायत के बाद उन्हें दवा दी गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद शाहजहांपुर पहुंचते-पहुंचते उन्हें तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। लखनऊ पहुंचने पर रेलवे के डॉ.कमल किशोर ने उनकी जांच की तो पता चला कि अजय की मौत हो चुकी है।
बॉक्स-
बटलर पैलेस में डेंगू की दस्तक
लखनऊ। राजधानी में डेंगू फैलता जा रहा है। बलरामपुर, सिविल, डॉ. लोहिया अस्पताल में लगभग 20 मरीज बुखार के भर्ती हैं। इनमें से अधिकतर की प्लेटलेट्स काउंट कम है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों को बुखार है, प्लेटलेट्स काउंट भी कम है लेकिन डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। हाल ही में बटलर पैलेस निवासी पुलिस के एक आला अधिकारी की बेटी को भी डेंगू के लक्षणों के कारण पीजीआई में भर्ती कराया गया था। उसकी प्लेटलेट्स काउंट कम थी। लगभग एक पखवारे पहले भी संजय गांधी पीजीआई में जांच के बाद छह लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इनमें से चार लोग आलमबाग, एक तेलीबाग और एक गोमती नगर का मरीज था। चार मरीजों का पीजीआई में इलाज चल रहा था। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
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सावधानी बरतें
सीएमओ डॉ.एस.एन.एस.यादव का कहना है कि घरों के अंदर साफ पानी में डेंगू का मच्छर पैदा होता है। बारिश के बाद टायरों, टूटू बर्तनों, फ्लॉवर पॉट, कूलर और एसी से निकलने वाले पानी में डेंगू मच्छर अंडे देती है। ये मच्छर दिन में काटता है। इसलिए घर में ऐसे बर्तनों को साफ कर दें। जिससे मच्छरों का प्रजनन ही न हो सके। यदि आसपास मच्छर बहुत हैं तो सीएमओ कार्यालय के कंट्रोल रूम में फोन नंबर 0522-2622080 पर कॉल कर रोग फैलने की सूचना दी जा सकती है। ये कंट्रोल रूम 24 घंटे खुला रहता है। मलेरिया के मच्छरों से बचने के लिए आस-पास गंदा पानी न इकठ्ठा न होने दें। रात को मच्छरदानी लगाकर या फिर मच्छर रोधी दवा लगाकर सोएं। बच्चों को पूरी बांह के कपड़े और पैंट पहनाएं। खासतौर से शाम के समय सावधानियां बरतें।
त्वचा पर काले या लाल चकत्ते हों तो हो जाएं सावधान
डॉ.एस.एन.एस.यादव के अनुसार डेंगू के मरीजों में मौत तभी होगी जब उसे द्वितीयक (सेकेंडरी) संक्रमण हो। आमतौर पर डेंगू बुखार 0 से 5 दिन तक रहता है। यदि इसके बाद बुखार ठीक हो जाए तो मरीज को कोई दिक्कत नहीं होगी। यदि बुखार 6 से 10 दिन तक रहता है तो यह सेकेंडरी संक्रमण की श्रेणी में आ जाएगा। इसके बाद जरूरी है कि डेंगू, मलेरिया और टायफायड की जांच कराई जाए। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उस नजर रखी जाए कि मरीज की प्लेटलेट्स काउंट कम न हो। सेकेंडरी इन्फेक्शन में मरीज को सेप्टीसीमिया होने की संभावना होती है। इसलिए मरीज के स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखना जरूरी है। विशेष रूप से गुर्दों की क्रियाशीलता की जांच बहुत जरूरी है। क्योंकि डेंगू के सेकेंडरी इन्फेक्शन में लाल रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स टूटने लगते हैं। जो किडनी में जाकर फंसते हैं। इससे रक्त में यूरिया बढ़ जाता है। यदि रोगी डायलिसिस न की जाए तो उसकी मौत हो जाती है।
ऐसे बचे डेंगू से
घर के कूलर बाल्टी, घड़े और ड्रम का पानी बदलते रहें
घर के आस-पास पानी न इकठ्ठा होने दें
यदि कहीं पानी जमा है तो उसे मिट्टी से पाट दें
जमा पानी में मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल आयल डालें
सोतें समय मच्छरदानी में सोएं
मच्छर निरोधक क्रीम, सरसों या नीम का तेल लगाएं
घर में नीम की पत्ती का धुआं करें
पूरी बांह की शर्ट और पैंट पहनें
बच्चों को शाम को मोजा भी पहनाएं
बुखार एक दिन से ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें
घर में बुखार का रोगी हो तो उसे अलग और मच्छरदानी में रखें
मरीज को आराम करने दें
फलों का जूस पीने के लिए दें
क्या न करें
घर में या आस-पास पुराने बर्तन, टायर, कूलर में पानी न जमा होनें दें
कूड़ा एकत्र न होने दें
एस्प्रिन, डिस्प्रिन, ब्रूफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं न लें। यह प्लेटलेट्स घटाती हैं
झोला छाप से न कराएं इलाज
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सरोजनीनगर के मीरानपुर पिनवट ग्राम पंचायत निवासी रामचंद्र के बेटे आदित्य (9) को पांच दिन से बुखार आ रहा था। स्थानीय निजी अस्पताल में इलाज के बावजूद जब उसे फायदा नहीं हुआ तो परिजनों ने सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उधर मड़ियांव निवासी लाले रावत (70) की भी डेंगू से मौत हो गई। लाले सरोजनी नगर अपने रिश्तेदार के घर गया था, जहां उसे बुखार आ गया। निजी अस्पताल में जांच कराने के बाद जब प्लेटलेट्स काउंट कम मिले तो डेंगू का इलाज शुरू किया गया। बुखार नियंत्रण में नहीं आया तो उसे सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान लाले की मौत हो गई। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि लाले की किडनी फेल थी। इसी के चलते उसकी मौत हुई है।
मरीज ने ट्रेन में दम तोड़ा
शहीद एक्सप्रेस से दिल्ली से मधुबनी बिहार जा रहे अजय सिंह (37) की मौत शनिवार सुबह ट्रेन में ही हो गई। अजय के साथ उनकी पत्नी और बच्ची भी थी। अजय डेंगू से पीड़ित थे। कोच संख्या एस-5 की सीट नंबर 24 पर यात्रा कर रहे अजय सिंह की हालत बरेली में ही बिगड़ गई। तेज बुखार की शिकायत के बाद उन्हें दवा दी गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद शाहजहांपुर पहुंचते-पहुंचते उन्हें तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। लखनऊ पहुंचने पर रेलवे के डॉ.कमल किशोर ने उनकी जांच की तो पता चला कि अजय की मौत हो चुकी है।
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बटलर पैलेस में डेंगू की दस्तक
लखनऊ। राजधानी में डेंगू फैलता जा रहा है। बलरामपुर, सिविल, डॉ. लोहिया अस्पताल में लगभग 20 मरीज बुखार के भर्ती हैं। इनमें से अधिकतर की प्लेटलेट्स काउंट कम है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों को बुखार है, प्लेटलेट्स काउंट भी कम है लेकिन डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। हाल ही में बटलर पैलेस निवासी पुलिस के एक आला अधिकारी की बेटी को भी डेंगू के लक्षणों के कारण पीजीआई में भर्ती कराया गया था। उसकी प्लेटलेट्स काउंट कम थी। लगभग एक पखवारे पहले भी संजय गांधी पीजीआई में जांच के बाद छह लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इनमें से चार लोग आलमबाग, एक तेलीबाग और एक गोमती नगर का मरीज था। चार मरीजों का पीजीआई में इलाज चल रहा था। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
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सीएमओ डॉ.एस.एन.एस.यादव का कहना है कि घरों के अंदर साफ पानी में डेंगू का मच्छर पैदा होता है। बारिश के बाद टायरों, टूटू बर्तनों, फ्लॉवर पॉट, कूलर और एसी से निकलने वाले पानी में डेंगू मच्छर अंडे देती है। ये मच्छर दिन में काटता है। इसलिए घर में ऐसे बर्तनों को साफ कर दें। जिससे मच्छरों का प्रजनन ही न हो सके। यदि आसपास मच्छर बहुत हैं तो सीएमओ कार्यालय के कंट्रोल रूम में फोन नंबर 0522-2622080 पर कॉल कर रोग फैलने की सूचना दी जा सकती है। ये कंट्रोल रूम 24 घंटे खुला रहता है। मलेरिया के मच्छरों से बचने के लिए आस-पास गंदा पानी न इकठ्ठा न होने दें। रात को मच्छरदानी लगाकर या फिर मच्छर रोधी दवा लगाकर सोएं। बच्चों को पूरी बांह के कपड़े और पैंट पहनाएं। खासतौर से शाम के समय सावधानियां बरतें।
त्वचा पर काले या लाल चकत्ते हों तो हो जाएं सावधान
डॉ.एस.एन.एस.यादव के अनुसार डेंगू के मरीजों में मौत तभी होगी जब उसे द्वितीयक (सेकेंडरी) संक्रमण हो। आमतौर पर डेंगू बुखार 0 से 5 दिन तक रहता है। यदि इसके बाद बुखार ठीक हो जाए तो मरीज को कोई दिक्कत नहीं होगी। यदि बुखार 6 से 10 दिन तक रहता है तो यह सेकेंडरी संक्रमण की श्रेणी में आ जाएगा। इसके बाद जरूरी है कि डेंगू, मलेरिया और टायफायड की जांच कराई जाए। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उस नजर रखी जाए कि मरीज की प्लेटलेट्स काउंट कम न हो। सेकेंडरी इन्फेक्शन में मरीज को सेप्टीसीमिया होने की संभावना होती है। इसलिए मरीज के स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखना जरूरी है। विशेष रूप से गुर्दों की क्रियाशीलता की जांच बहुत जरूरी है। क्योंकि डेंगू के सेकेंडरी इन्फेक्शन में लाल रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स टूटने लगते हैं। जो किडनी में जाकर फंसते हैं। इससे रक्त में यूरिया बढ़ जाता है। यदि रोगी डायलिसिस न की जाए तो उसकी मौत हो जाती है।
ऐसे बचे डेंगू से
घर के कूलर बाल्टी, घड़े और ड्रम का पानी बदलते रहें
घर के आस-पास पानी न इकठ्ठा होने दें
यदि कहीं पानी जमा है तो उसे मिट्टी से पाट दें
जमा पानी में मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल आयल डालें
सोतें समय मच्छरदानी में सोएं
मच्छर निरोधक क्रीम, सरसों या नीम का तेल लगाएं
घर में नीम की पत्ती का धुआं करें
पूरी बांह की शर्ट और पैंट पहनें
बच्चों को शाम को मोजा भी पहनाएं
बुखार एक दिन से ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें
घर में बुखार का रोगी हो तो उसे अलग और मच्छरदानी में रखें
मरीज को आराम करने दें
फलों का जूस पीने के लिए दें
क्या न करें
घर में या आस-पास पुराने बर्तन, टायर, कूलर में पानी न जमा होनें दें
कूड़ा एकत्र न होने दें
एस्प्रिन, डिस्प्रिन, ब्रूफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं न लें। यह प्लेटलेट्स घटाती हैं
झोला छाप से न कराएं इलाज