क्वालिटी के मानकों पर खुद खरी नहीं आईक्यूएसी

Lucknow Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। गठन के लगभग एक साल बाद भी इसका कामकाज धरातल पर नहीं दिख रहा है। विवि की वेबसाइट पर बना इसका लिंक भी केवल आईक्यूएसी में शामिल सदस्यों के नाम गिनाने तक ही सीमित हैं। यहां तक कि आसानी से उपलब्ध नैक की गाइडलाइंस तक जिम्मेदार पोर्टल पर नहीं डाल सके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जो सेल अपनी क्वालिटी नहीं बचा पा रही है वह लविवि एवं कॉलेज कैंपस की क्वालिटी पर क्या काम करेगी।
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद ने विश्वविद्यालयों को नैक के मूल्यांकन के साथ ही इंटरनल क्वालिटी एश्यारेंस सेल गठित करने का सुझाव दिया था, जिससे शैक्षणिक मानकों की निगरानी की जा सके और उसे बेहतर करने का सुझाव प्रभावी रूप से आ सके। शासन ने भी विश्वविद्यालयों को इस आशय का सुझाव दिया था हालांकि उसने इसका दायरा कॉलेजों तक बढ़ा दिया। स्थितियों को देखते हुए लविवि में प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में नवंबर में सेल गठित की गई। इसमें तीन बाहरी सदस्य भी रखे गए, जिसमें टीसीएस के क्षेत्रीय प्रमुख जयंत कृष्णा, रिलायंस के अनंत जौहरी एवं सुधीर हलवासिया शामिल हैं। कमेटी गठित होने के बाद अब तक इसकी दो बैठक हुई है, जो विश्वविद्यालय में नेट कनेक्टिविटी पर चर्चा तक सीमित रही। पहली बैठक कर्मचारियों को कंप्यूटर ट्रेनिंग की औपचारिकता तक सीमित रही। इसके बाद एक और बैठक कॉलेजों की आयोजित की गई, जिसमें उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर डाटा अपलोड करने एवं उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा सेल का क्या कामकाज रहा इसका कोई हिसाब नहीं है। जिम्मेदारों ने दावा किया था कि आईक्यूएसी सक्रिय रूप से जल्दी ही दिखेगी। पठन-पाठन की गतिविधियों के साथ ही विकास की योजनाओं एवं प्रशासनिक दक्षता पर भी नजर रखेगी, लेकिन मामला दावे से आगे नहीं बढ़ सका।
लविवि की वेबसाइट पर इसका एक लिंक बनाया गया है जिसमें इसके उद्देश्य तथा कमेटी के सदस्यों का विवरण मौजूद है। हालांकि नैक गाइडलाइंस, रिपोर्ट, एक्टिविटीज आदि के टैब भी इसमें बने हुए हैं, लेकिन इनमें कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। जिस नैक मूल्यांकन के मूल उद्देश्य को लेकर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल का गठन किया गया था उसके दिशा-निर्देश तक वेबसाइट पर लविवि के जिम्मेदार नहीं उपलब्ध करा सके हैं। यह स्थिति तब है जब लविवि के वेबसाइट प्रभारी प्रो. आरके मिश्रा स्वयं आईक्यूएसी के को-ऑर्डिनेटर है। यहां तक कि विश्वविद्यालय में कार्यवाहक रजिस्ट्रार की भूमिका निभा रहे आरपी सिंह पुन: अपने मूल पद पर लौट चुके हैं और लविवि में जेबी सिंह के रूप में नए रजिस्ट्रार की तैनाती हो चुकी है, लेकिन आईक्यूएसी की लिंक में अभी भी आरपी सिंह ही लविवि के रजिस्ट्रार हैं। ऐसे में जब सेल अपने सदस्यों की सूची तक नहीं सही कर पाई है तो अन्य मोर्चों पर उससे बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद बेमानी ही नजर आ रही है।
आईक्यूएसी के को-ऑर्डिनेटर प्रो. आरके मिश्र ने बताया क‌ि आईक्यूएसी की भूमिका मूलत: नैक मूल्यांकन के बाद शुरू होती है। दो ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए गए थे। एक कर्मचारियों के लिए एवं दूसरा कॉलेजों के शिक्षकों के लिए। नैक गाइडलाइंस की विशेष आवश्यकता नहीं थी। आईक्यूएसी को अलग लिंक विकसित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह नहीं हो पाया। हालांकि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर आईक्यूएसी का एक दूसरा लिंक है जो सक्रिय है।

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