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जाड़े तक लखनऊ जू में दहाड़ेंगे एशियाई बबर शेर
Lucknow
Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। लखनऊ जू जल्द ही एशियाई बबर शेरों की दहाड़ से गूंजेगा। अप्रैल माह केपहले सप्ताह में देश भर के तमाम चिड़ियाघरों में भेजे गये एक प्रस्ताव पर राजकोट जू लखनऊ प्राणि उद्यान को एक जोड़ा बबर शेर देने पर राजी हो गया है। सेंट्रल जू अथारिटी से भी इसके लिए अनुमति मिल चुकी है। हालांकि इसके बदले में राजकोट जू को जो वन्यजीव यहां ज्यादा हैं उन्हें देना पड़ेगा। पहले दौर में यहां एक मादा शेरनी आयेगी, उसके कुछ ही दिनों बाद नर। निदेशक प्राणि उद्यान रेणु सिंह के मुताबिक अभी लखनऊ प्राणि उद्यान में एक उम्रदराज मेल हाइब्रिड लॉयन प्रिंस और एक उम्रदराज फीमेल हाइब्रिड लॉयन शुभांगी ही है। जू में करीब 12 साल पहले एशियाई शेर थे। उन्होंने बताया कि राजकोट समेत कई अन्य जू से शेर मांगने के प्रस्ताव भेजे गये थे। राजकोट जू ने प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। उन्होंने बताया कि आगामी 6 महीने के भीतर राजकोट जू से यहां शेर आ जायेंगे। पहले युवा शेरनी (लगभग साढ़े चार वर्ष) आयेगी उसके बाद जल्द ही एक नर बबर शेर आयेगा। फिलहाल नर बबर शेर का बच्चा अभी अपनी मां के साथ ही रह रहा है। निदेशक प्राणि उद्यान का मानना है कि नये मेहमानों के आने से प्राणि उद्यान में रौनक बढ़ेगी।
अभी जू में हैं हाइब्रिड लॉयन: पिछले साल जनवरी में एक हाइब्रिड शेरनी आस्था की मौत हो गई थी। वहीं बीते मई में 17 साल की बूढ़ी शेरनी बेबी की मौत हो गई। फिलहाल लखनऊ जू में एक उम्रदराज मेल हाइब्रिड लॉयन प्रिंस (16) और एक उम्रदराज फीमेल हाइब्रिड लॉयन शुभांगी (साढ़े 15 वर्ष) ही हैं। हाइब्रिड होने के चलते ये संतानोत्पत्ति में सक्षम नहीं हैं। इससे इनका कुनबा नहीं बढ़ सकता है।
सेंट्रल जू अथॉरिटी से मिली अनुमति : निदेशक प्राणि उद्यान ने बताया कि लखनऊ जू को राजकोट जू से मिलने वाले मादा और नर शेरों के मामले में सेंट्रल जू अथारिटी से भी अनुमति मिल चुकी है। हालांकि शेरों के बदले राजकोट जू को घड़ियाल, सीवेक कैट, काकाटील, गोल्डेन-सिल्वर फीजेंट, हाइना दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि चूंकि पहले दौर में राजकोट जू से मादा एशियाई शेरनी आयेगी और उसके बाद नर आयेगा। इसलिये आदान-प्रदान की शृंखला लंबी खिंच सकती है। राजकोट जू से आने वाली मादा के लिये शेरों के बाड़े के पास एक बाड़ा भी लगभग तैयार है।
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बढ़ेगा शेरों का कुनबा : जानकारों की मानें तो लखनऊ जू में युवा एशियाई शेरों का जोड़ा आने से उनका कुनबा बढ़ सकेगा। चूंकि आने वाली मादा लगभग साढ़े चार वर्ष की है, जो आते-आते लगभग 5 साल की हो जायेगी और उसके बाद आने वाला नर शेर भी युवा ही रहेगा। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि प्राणि उद्यान में जोड़े के रूप में रहने के दौरान इनका कुनबा भी बढ़ सकता है।
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अभी जू में हैं हाइब्रिड लॉयन: पिछले साल जनवरी में एक हाइब्रिड शेरनी आस्था की मौत हो गई थी। वहीं बीते मई में 17 साल की बूढ़ी शेरनी बेबी की मौत हो गई। फिलहाल लखनऊ जू में एक उम्रदराज मेल हाइब्रिड लॉयन प्रिंस (16) और एक उम्रदराज फीमेल हाइब्रिड लॉयन शुभांगी (साढ़े 15 वर्ष) ही हैं। हाइब्रिड होने के चलते ये संतानोत्पत्ति में सक्षम नहीं हैं। इससे इनका कुनबा नहीं बढ़ सकता है।
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सेंट्रल जू अथॉरिटी से मिली अनुमति : निदेशक प्राणि उद्यान ने बताया कि लखनऊ जू को राजकोट जू से मिलने वाले मादा और नर शेरों के मामले में सेंट्रल जू अथारिटी से भी अनुमति मिल चुकी है। हालांकि शेरों के बदले राजकोट जू को घड़ियाल, सीवेक कैट, काकाटील, गोल्डेन-सिल्वर फीजेंट, हाइना दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि चूंकि पहले दौर में राजकोट जू से मादा एशियाई शेरनी आयेगी और उसके बाद नर आयेगा। इसलिये आदान-प्रदान की शृंखला लंबी खिंच सकती है। राजकोट जू से आने वाली मादा के लिये शेरों के बाड़े के पास एक बाड़ा भी लगभग तैयार है।
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बढ़ेगा शेरों का कुनबा : जानकारों की मानें तो लखनऊ जू में युवा एशियाई शेरों का जोड़ा आने से उनका कुनबा बढ़ सकेगा। चूंकि आने वाली मादा लगभग साढ़े चार वर्ष की है, जो आते-आते लगभग 5 साल की हो जायेगी और उसके बाद आने वाला नर शेर भी युवा ही रहेगा। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि प्राणि उद्यान में जोड़े के रूप में रहने के दौरान इनका कुनबा भी बढ़ सकता है।