{"_id":"8ef62918-b298-11e2-ae1a-d4ae52bc57c2","slug":"1984-anti-sikh-riots-pain-came-sajjan-kumar-benefits","type":"story","status":"publish","title_hn":"सज्जन की रिहाई से फिर हरे हुए 1984 के जख्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सज्जन की रिहाई से फिर हरे हुए 1984 के जख्म
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2013 01:21 AM IST
विज्ञापन
1984 में सिख विरोधी दंगों के आरोपी रहे कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार की अदालत से रिहाई के बाद अलीगढ़ में रह रहे दंगा पीड़ितों के भी जख्म एक बार फिर से हरे हो गए हैं।
विज्ञापन
उनकी पीड़ा है कि मानवीयता के खिलाफ किए गए इस अपराध के दोषियों को सजा मिलना तो दूर उनको अपराध मुक्त किया जा रहा है, जबकि पीड़ित परिवार आज तक घटना से उबर नहीं पाए हैं।
विज्ञापन
दिल्ली में सिख विरोधी दंगों की आंच अलीगढ़ तक आ गई थी। यहां दो दर्जन से अधिक परिवार आगजनी और हिंसा का शिकार हुए थे।
लाखों का नुकसान
श्याम कांप्लेक्स में रहने वाले लाहौर इलेक्टॉनिक्स के संचालक हरविंदर सिंह होरा के परिवार की दुकान जला दी गई थी। लाखों का नुकसान हुआ।
अब 29 साल बाद उन्हें मुआवजे के नाम पर 3 महीने पहले 49 हजार रुपये का मरहम मिला है।
1984 में 20 साल रहे हरविंदर सिंह कहते हैं कि उस समय दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों की आंच अलीगढ़ तक आ पहुंची थी। यहां पर हम सभी लोग डरे सहमे थे। सज्जन कुमार की रिहाई के बाद लगता है इंसाफ नहीं मिला।
विज्ञापन
हरविंदर सिंह के साथ बैठे उनके बेटे 18 वर्षीय तरनप्रीत सिंह सभी बातें सुन रहे होते हैं। तरन कहते हैं कि जब परिवार के लोग उस समय की बातें बताते हैं तो डर सा लगने लगता है।
सज्जन नहीं तो फिर दोषी कौन?
मामू-भांजा में गुरुनानक इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक सतबीर सिंह और बलजीत सिंह का परिवार आज समृद्ध है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उनकी भी यादों के बंद कमरे में हलचल पैदा कर दी है।
कहते हैं कि इस घटना का जिक्र भी आता है तो लगता है जख्म पर पड़ा हुआ खुरंट किसी ने उलीच दिया हो। उस समय फौरी तौर पर राहत के नाम पर पहले 2 हजार रुपये और बाद में 1800 रुपये दिए गए थे।
व्यापार शुरू करने के लिए 25 हजार रुपये कर्ज बतौर दिए थे। कहते हैं कि अगर सज्जन कुमार अपराधी नहीं है तो फिर उन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है? यह सवाल तो अनुत्तरित ही रह जाता है।