सिर्फ कोडिंग से नहीं बचेगी नौकरी: Zoho के श्रीधर वेम्बू ने बताया AI के दौर में सफल होने का 'सीक्रेट मंत्र'

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 20 Apr 2026 06:36 PM IST
सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते असर के बीच Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को अहम सलाह दी है। उनका कहना है कि अब सिर्फ कोडिंग स्किल काफी नहीं है, बल्कि डोमेन एक्सपर्टीज और बेहतर कस्टमर एक्सपीरियंस ही असली फर्क पैदा करेंगे।

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जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    तकनीकी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस रफ्तार से पैर पसार रहा है, उसने सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के मन में अपने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, जोहो (Zoho) के संस्थापक और दिग्गज उद्यमी श्रीधर वेम्बू ने इंजीनियरों के लिए एक बेहद खरी और काम की सलाह साझा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए वेम्बू ने कहा कि प्रोग्रामिंग या कोडिंग स्किल्स किसी भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर के करियर की 'नींव' (Bedrock) होती हैं और इन्हें खोना नहीं चाहिए, लेकिन आज के दौर में सिर्फ कोडिंग के दम पर टिके रहना मुमकिन नहीं है।

    क्या है वह 'एक स्किल' जिसकी वेम्बू कर रहे हैं वकालत?

    वेम्बू का मानना है कि कोडिंग केवल एक जरिया है, असली मूल्य उस 'डोमेन एक्सपर्टीज' में है जो इंजीनियर के पास होती है। ग्राहक केवल कोड लिखने के पैसे नहीं देता, बल्कि वह सुरक्षा, विश्वसनीयता, बेहतर सपोर्ट और कंप्लायंस के लिए भुगतान करता है।

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    एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को यह समझना होगा कि वह जिस क्षेत्र के लिए सॉफ्टवेयर बना रहा है, चाहे वह फाइनेंस हो, हेल्थकेयर हो या मैन्युफैक्चरिंग, उस क्षेत्र की बारीकियों और समस्याओं की उसे गहरी समझ होनी चाहिए। AI कोड तो लिख सकता है, लेकिन वह किसी विशिष्ट उद्योग की पेचीदगियों को एक इंसान की तरह महसूस नहीं कर सकता।

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    प्रोटोटाइप और फाइनल प्रोडक्ट का फर्क

    सॉफ्टवेयर जगत में इस समय AI द्वारा उत्पादकता बढ़ाने को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। इस पर वेम्बू ने आगाह करते हुए कहा कि AI किसी भी काम का 'वर्किंग प्रोटोटाइप' (शुरुआती मॉडल) तो बहुत तेजी से बना सकता है, लेकिन एक फाइनल प्रोडक्ट बनाने में कई चरण शामिल होते हैं। हर स्टेज को केवल ऑटोमेशन या मशीनों के जरिए तेज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कंपनियों और तकनीकी टीमों को सलाह दी कि वे इंजीनियरों की प्रोडक्टिविटी मैट्रिक्स (कि किसने कितना कोड लिखा) के पीछे भागने के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि वे AI का इस्तेमाल करके कस्टमर एक्सपीरियंस को कैसे बेहतर बना सकते हैं।

    सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की जटिलता होगी कम

    सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के दौरान अक्सर कई ऐसी जटिलताएं पैदा हो जाती हैं जिनकी जरूरत नहीं होती। वेम्बू के अनुसार, सॉफ्टवेयर में बहुत सारी बेवजह की उलझनें होती हैं, जिन्हें AI के जरिए खत्म किया जा सकता है। अगर इंजीनियर AI का सही इस्तेमाल करके प्रक्रियाओं को सरल बना लें, तो वे अपना कीमती समय ऐसी समस्याओं को सुलझाने में लगा पाएंगे जो उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सहज और मूल्यवान हों।

    कुल मिलाकर, वेम्बू ने साफ संदेश दिया कि मशीन से कोड लिखवाना आसान हो गया है, लेकिन उस कोड को एक भरोसेमंद और उपयोगी समाधान में बदलना आज भी एक स्किल्ड डोमेन एक्सपर्ट के हाथ में ही है।

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