Apple: एंटीट्रस्ट मामले में बढ़ी एपल की मुसीबतें, भारत में लग सकता है 3.5 लाख करोड़ का जुर्माना
Apple Antitrust Case India:
टेक दिग्गज एपल भारत में एक बड़ी कानूनी मुसीबत में फंसता नजर आ रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने डेटा साझा करने से इनकार करने पर एपल पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। इस मामले में कंपनी पर करीब 38 अरब डॉलर तक का भारी जुर्माना लग सकता है।

विस्तार
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार एपल इस समय भारत में एक ऐसी कानूनी जंग लड़ रही है, जो उसे बहुत महंगी पड़ सकती है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के साथ चल रहे इस विवाद में एप्पल ने खुद स्वीकार किया है कि उस पर लगभग 38 बिलियन डॉलर (करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है।
यह रकम इतनी बड़ी है कि अगर यह जुर्माना लगाया जाता है, तो यह दुनिया के इतिहास में किसी भी कंपनी पर लगने वाला सबसे बड़ा एंटीट्रस्ट जुर्माना होगा। विवाद की मुख्य वजह एपल द्वारा सीसीआई को अपनी वित्तीय जानकारी देने से बार-बार इनकार करना है।
एप स्टोर पर एकाधिकार का है मामला
एपल के खिलाफ इस पूरी लड़ाई की जड़ उसका एप स्टोर (Apple App Store) है। दुनिया भर में एपल पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह आईफोन बाजार में अपनी दबदबा होने का गलत फायदा उठाता है। आईफोन यूजर्स के पास एप खरीदने के लिए केवल एपल का आधिकारिक एप स्टोर ही एकमात्र विकल्प होता है, जहां कंपनी डेवलपर्स से भारी कमीशन वसूलती है। डेवलपर्स के पास एपल की शर्तों को मानने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता। भारत में भी इसी मुद्दे पर जांच चल रही है और सीसीआई ने शुरुआती जांच में एपल को अपनी बाजार स्थिति का दुरुपयोग करने का दोषी पाया है।
भारत में मामला क्यों अलग है?
एपल का बचाव इस तर्क पर टिका है कि भारत में उसकी स्थिति अन्य देशों जैसी नहीं है। जब 2021 में यह मामला शुरू हुआ, तब भारत के स्मार्टफोन बाजार में एपल की हिस्सेदारी महज 4% थी, जो अब बढ़कर लगभग 9% हो गई है। एपल का कहना है कि एंड्रॉइड के मुकाबले वह भारत में एक बड़ा खिलाड़ी नहीं है, इसलिए डेवलपर्स पर दबदबा बनाने का आरोप सही नहीं है।
फिलहाल, एपल अदालत में इस कानून को चुनौती दे रहा है और चाहता है कि जब तक कोर्ट का फैसला न आ जाए, तब तक सीसीआई (CCI) अपनी कार्रवाई रोक दे। इसी वजह से कंपनी ने नियामक द्वारा मांगी गई आर्थिक जानकारियां देने से मना कर दिया है।
38 अरब डॉलर जुर्माने की आशंका?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीआई अब इस मामले में और इंतजार करने के मूड में नहीं है और वह जुर्माने की प्रक्रिया को तेज करने की योजना बना रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर एपल वित्तीय डेटा साझा नहीं करता है, तो वह भविष्य में जुर्माने की राशि को कम करवाने या उसे चुनौती देने का मौका खो सकता है।
हालांकि, तकनीकी रूप से यह जुर्माना 38 बिलियन डॉलर (3.5 लाख करोड़) तक पहुंच सकता है क्योंकि यह कंपनी के वैश्विक टर्नओवर पर आधारित होता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि असल में इतनी बड़ी राशि का जुर्माना लगना काफी मुश्किल है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एपल अपने इस रुख को बरकरार रखता है या भारत के सख्त नियमों के आगे झुकता है।