Smartphone स्मार्टफोन संवार रहा है बच्चों का भविष्य, लॉकडाउन में व्हाट्सएप बना बड़ा मददगार

Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Mon, 13 Apr 2020 07:20 PM IST
सार
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Smartphone Zoom App And Whatsapp Helps For School Children Study
child using mobile - फोटो : Pixabay

    विस्तार

    अभी तक आप अपने बच्चे को मोबाइल से दूर रहने की सलाह देते आए हैं। लेकिन हो सकता है कि अब आप खुद अपना मोबाइल बच्चे को इस्तेमाल करने के लिए दें। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन हुए देश में मोबाइल बच्चों को पढ़ाने का नया माध्यम बनकर उभरा है।

    अनेक सरकारी और प्राइवेट स्कूल इसका जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ाई के इस नए डिजिटल माहौल से जहां बच्चे काफी खुश हैं, तो वहीं अध्यापक भी इसे काफी उत्साहजनक मान रहे हैं।

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    फिलहाल, देश के अनेक सरकारी-प्राइवेट स्कूलों में स्मार्टफोन सहारे बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश हो रही है और व्हाट्सएप, यूट्यूब और वीडियो इसके वाहक बन गए हैं।

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    देश के हजारों पब्लिक स्कूलों के चेयरमैन और प्रिंसिपल्स जैसे शीर्ष प्रतिनिधियों के संगठन इंटरनेशनल यूनाइटेड एजुकेशनिस्ट फ्रेटर्निटी के चेयरमैन जयंत चौधरी ने अमर उजाला को बताया कि स्मार्टफोन से बच्चों को पढ़ने का तरीका काफी कारगर साबित हो रहा है।

    हर क्लास के विशेष टीचर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उसमें बच्चों को पढ़ने के मैटेरियल भेज रहे हैं। पढ़ाई की सामग्री की वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड कर दी जाती है। बच्चे इसे अपनी सुविधानुसार समय पर मैटेरियल पढ़कर अध्ययन करते हैं और वीडियो देखकर उन्हें समझने की कोशिश करते हैं।

    इसके बाद उन्हें जो चीजें नहीं समझ आई रहती हैं, उन पर वे व्हाट्सएप के जरिए अपने अध्यापक से सवाल करते हैं। अध्यापक भी व्हाट्सएप से ही उन सवालों के जवाब दे देते हैं। इससे बच्चों की ज्यादातर समस्याएं हल हो जाती हैं।

    टेस्ट भी ऑनलाइन

    जयंत चौधरी के मुताबिक पढ़ाने के बाद अध्यापक इन्हीं माध्यमों से बच्चों के टेस्ट भी ले रहे हैं और उनका मूल्यांकन भी कर रहे हैं। यह नया माहौल बच्चों को काफी उत्साहित करने वाला है। इसके लिए उन्हें अपने अध्यापकों को कुछ बेसिक ट्रेनिंग दी है।

    लेकिन अब यह काफी कारगर तरीके से चल रहा है। इसमें बच्चों के परिवार से भी सहयोग मिल रहा है। जूम जैसे ऑनलाइन माध्यमों को कुछ अभिभावक सुरक्षित नहीं मान रहे हैं, जिसके कारण अभी ऑनलाइन क्लास का कॉन्सेप्ट बहुत लोकप्रिय नहीं हो पा रहा है।

    हमदर्द पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल सहर सैयद बताती हैं कि ऑनलाइन सिस्टम से बच्चों और अभिभावकों में पढ़ाई को लेकर हुआ नुकसान काफी कम हो गया है। अभिभावकों के साथ-साथ बच्चे इसे काफी सकारात्मक तरीके से ले रहे हैं।

    छोटे बच्चों को टेक्स्ट भेजकर उसकी हार्ड कॉपी बनवाकर पढ़ाया जा रहा है तो बड़े बच्चों को ऑनलाइन ही मैटेरियल दिया जा रहा है। अध्यापक और अभिभावकों की मीटिंग भी व्हाट्सएप के जरिए हो रही है।

    ऑनलाइन शिक्षा को आसान बना रहा गूगल

    वहीं, कई स्कूल अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। उत्तम स्कूल फॉर गर्ल्स, गाजियाबाद में जूम के जरिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म की सबसे अच्छी बात यह है कि एक साथ सौ बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।

    इसमें शिक्षिका अपनी स्क्रीन भी शेयर करके साथ-साथ वीडियो भी दिखा पा रही हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाने के लिए गूगल हैंगआउट, गूगल क्लासरूम और गूगल फॉर्म्स का विकल्प खूब लोकप्रिय हो रहा है।

    गूगल फॉर्म्स के सहारे ऑनलाइन टेस्ट भी ले लिया जाता है और चाहें तो ऑटो असेसमेंट भी एक्टिवेट किया जा सकता है। विद्यार्थी अपने टेस्ट के परिणाम खुद ही देख पाते हैं। इससे उन्हें अपनी कमियों का भी पता चल जाता है।

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