'बैंक' से आई मेल खोलने से पहले ध्यान से पढ़ें डोमेन का नाम, थोड़े से हेरफेर से होता है बड़ा फर्जीवाड़ा

Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Mon, 24 Aug 2020 09:08 PM IST
सार
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Read the domain name carefully before opening the mail from 'Bank', a little manipulation leads to big fraud
Hacker - फोटो : For Refernce Only

    विस्तार

    कोरोना काल में साइबर हमले अप्रत्याशित रूप से बढ़ गये हैं। आर्थिक धोखाधड़ी साइबर हमलों का सबसे बड़ा (96 फीसदी ) कारण होता है। इसके बाद लोगों के आंकड़े चुराने के लिए साइबर हमले किए जाते हैं। सबसे ज्यादा ईमेल के माध्यम से लोगों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी की जा रही है। जैसे ही बैंक के मिलते-जुलते नाम से कोई मेल आती है, लोग उसे बैंक से जुड़ी जानकारी समझ लेते हैं और अपनी गोपनीय जानकारी साइबर अपराधियों को थमा बैठते हैं।

    इससे बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है और लोगों के खातों से रकम उड़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मेल में अगर कोई लिंक खोलने के लिए या कोई अटैचमेंट खोलने के लिए कहा जा रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए, यह साइबर फ्रॉड करने का माध्यम हो सकता है।

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    डोमेन का नाम सबसे ज्यादा अहम

    साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक़ फिशिंग वाली मेल अक्सर बैंक ग्राहकों को किसी लिंक पर क्लिक करने या किसी अटैचमेंट को खोलने के लिए कहती हैं। लेकिन जब तक यह आपके बैंक के आधिकारिक डोमेन नेम (जैसे @sbi.com, @hdfc.com या @icici.com) से नहीं आती हैं, आपको ऐसे लिंक या अटैचमेंट को नहीं खोलना चाहिए।

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    कुछ परिस्थितियों में यह डोमेन नाम भी भ्रम पैदा करने वाला हो सकता है। कई बार इनकी स्पेलिंग में किसी एक अक्षर या संकेत चिन्ह का अंतर हो सकता है। इसलिए फ्रॉड से बचने के लिए किसी ईमेल को खोलने से पहले एक बार भेजने वाली ईमेल आईडी के डोमेन नेम को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

    ऐसे डोमेन नाम ग्राहकों को ऐसी वेबसाइट पर ले जाते हैं जो हूबहू असली वेबसाइट की नकल होते हैं और लोग उन्हें बैंक की असली वेबसाइट समझकर अपनी जानकारी दे देते हैं जो उनके लिए भारी नुकसान का सौदा साबित होता है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह के खतरों से लोगों को बचाने के लिए बैंकों और ग्राहकों, दोनों को जागरूकता बढ़ानी होगी। आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा सेवाएं ऑनलाइन या डिजिटलीकरण के माध्यम से दी जाएंगी, इसलिए यह भी स्वाभाविक है कि आगे आने वाले समय में भी इस तरह के हमले लगातार बढ़ें। साइबर सुरक्षा को बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर हम आने वाली पीढ़ी में साइबर सिक्योरिटी की एक बेहतर संस्कृति विकसित कर सकते हैं।

    कितने हो रहे साइबर अपराध

    इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (CERT-In) की वार्षिक रिपोर्ट 2019 के मुताबिक संस्था ने साइबर क्राइम के कुल 3 लाख 94 हजार 499 मामले हैंडल किए थे। इनमें ईमेल फिशिंग के 472, वायरस अटैक के 62163, वेबसाइट डीफेसमेंट के 24,366 मामले शामिल थे।

    वेबसाइट अटैक को डोमेन के नजरिए से देखें तो कुल 24366 मामलों में सबसे ज्यादा 17229 डॉट इन (.in) डोमेन वाली वेबसाइटस पर हमला किया गया था। इसके बाद डॉट कॉम (.com) डोमेन वाली वेबसाइट पर हमले हुए थे।

    डॉट ओआरजी (.org) वाली 481, डॉट नेट (.net) वाली 188 और अन्य 32 वेबसाइट पर हमले हुए थे। .org और .net वाली वेबसाइट पर कम हमले होने की एक बड़ी वजह ऐसी वेबसाइट्स की संख्या बहुत कम होना है।

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