Meta-Google पर ऐतिहासिक ट्रायल शुरू: कोर्ट ने कहा- ड्रग की तरह है इंस्टाग्राम, सीक्रेट प्रोजेक्ट का हुआ जिक्र

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 11 Feb 2026 10:28 AM IST
सार

Meta Google Trail In USA:

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां मेटा और गूगल एक बड़े कानूनी संकट का सामना कर रही हैं। अमेरिका में शुरू हुए ऐतिहासिक मुकदमे में आरोप है कि इन कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को जानबूझकर ऐसा डिजाइन किया, जिससे बच्चे सोशल मीडिया के आदी हो गए और उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ा।

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मेटा-गूगल - फोटो : फ्रीपिक

    विस्तार

    क्या सोशल मीडिया कंपनियां जानबूझकर बच्चों के दिमाग से खिलवाड़ कर रही हैं? लॉस एंजेलिस की अदालत में सोमवार को शुरू हुई एक ऐतिहासिक सुनवाई ने इस सवाल को पूरी दुनिया के सामने ला खड़ा किया है। फेसबुक की मूल कंपनी Meta और गूगल का YouTube अब इस आरोप का सामना कर रहे हैं कि उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे इसके 'एडिक्ट' यानी आदी हो जाएं।

    "नशीली दवा की तरह है इंस्टाग्राम"

    वादी पक्ष के वकील मार्क लैनियर ने कोर्ट में दलील दी कि यह बच्चों के दिमाग के लिए "नशीली दवा" जितना खतरनाक है। उन्होंने कंपनियों के कुछ आंतरिक ईमेल और दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि मेटा के कर्मचारी खुद मानते थे कि इंस्टाग्राम "एक ड्रग की तरह" है और वे इस नशे को बेचने वाले हैं।

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    अदालत में 'प्रोजेक्ट मिस्ट' नाम के एक स्टडी का भी जिक्र हुआ, जिसमें मेटा को पहले से पता था कि तनाव झेल रहे बच्चे इस लत का शिकार जल्दी होते हैं। वहीं, गूगल के दस्तावेजों में यूट्यूब की तुलना किसी 'कैसीनो' से की गई है, जहां यूजर्स को उलझाए रखने के लिए दांव खेले जाते हैं।

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    20 वर्षीय युवती का मामला बना टेस्ट केस

    इस मुकदमे के केंद्र में 20 साल की एक युवती है, जिसे 'KGM' के नाम से पहचाना जा रहा है। KGM ने महज 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 9 साल में इंस्टाग्राम चलाना शुरू कर दिया था। पांचवीं क्लास तक पहुंचते-पहुंचते वह यूट्यूब पर 284 वीडियो डाल चुकी थी। आरोप है कि इस लत ने उसे डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों तक धकेल दिया। वकीलों ने टेक कंपनियों की तुलना तंबाकू कंपनियों से की, जिन्होंने मुनाफा कमाने के लिए बच्चों को अपना निशाना बनाया।

    कंपनियों ने कहा- "सिर्फ हम जिम्मेदार नहीं"

    दूसरी तरफ, मेटा के वकील पॉल श्मिट ने इन दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया एडिक्शन जैसी कोई चीज वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह साबित नहीं हुई है। उन्होंने KGM के स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि उसकी मानसिक स्थिति के पीछे पारिवारिक झगड़े, स्कूल में बुलिंग और अन्य निजी कारण थे, न कि सिर्फ मोबाइल एप्स। कंपनियों का तर्क है कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार नए फीचर्स जोड़ रही हैं।

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    दुनिया भर में बढ़ रही है सख्ती

    सिर्फ लॉस एंजिल्स ही नहीं, बल्कि न्यू मेक्सिको में भी मेटा पर बच्चों के यौन शोषण को रोकने में नाकाम रहने का मुकदमा चल रहा है। अमेरिका के 40 से अधिक राज्यों ने मेटा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इन प्लेटफॉर्म्स को बैन कर दिया है। वही, फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का कानून बना चुका है।

    आगे क्या?

    यह ट्रायल अगले 6 से 8 हफ्तों तक चलेगा, जिसमें मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों की गवाही भी संभव है। अगर अदालत कंपनियों को दोषी ठहराती है, तो सोशल मीडिया इंडस्ट्री के कामकाज और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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